सनी देओल
सनी देओल की तसवीर | फेसबुक / @sunnydeol
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फिल्मों में मुस्लिमों का अति-सरल वर्गीकरण, जहां बहुमत को आतंकवादी या उनका सहानुभूतिकार माना जाता है, दोहरे मानकों से भरा हुआ है।

चूंकि प्रियंका चोपड़ा ने अपनी अमेरिकी टेलीविज़न श्रृंखला क्वांटिको के नवीनतम एपिसोड में भारतीय भावनाओं को चोट पहुँचाने के लिए शनिवार को ट्विटर के माध्यम से माफ़ी मांगी है, इसलिए वह एक बार फिर प्रकाश में आ गयी हैं। भारतीयों का दृष्टिकोण पाखंडी हो जाता है, खासकर जब बहुसंख्यक समुदाय का संबंध हो। एपिसोड ‘द ब्लड ऑफ रोमियो’ में भारतीय हिंदू आतंकवादियों से जुड़ी एक साजिश दिखायी गयी है।

अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा ने “भावनाओं” को चोट पहुँचाने पर खेद व्यक्त किया है, और साथ ही अपने देश को वफादारी साबित करने के प्रयास में अपनी राष्ट्रीयता पर जोर दिया।

“मैं बेहद दुखी हूँ और मुझे खेद है कि क्वांटिको के हालिया एपिसोड से कुछ भावनाओं को चोट पहुंची है। मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं था और न ही कभी होगा। मैं ईमानदारी से माफी माँगती हूँ। मैं एक गर्वपूर्ण भारतीय हूँ और यह कभी नहीं बदलेगा।”

काफी भारतीयों को यकीन नहीं होगा कि हिन्दू आतंकवाद जैसी कोई चीज भी होती है, लेकिन हमें लगता है कि मुस्लिम समुदाय को आतंकवाद और हिंसा से जोड़ने पर कोई समस्या नहीं होती।

90 के दशक के बॉलीवुड के पहलवान सनी देओल ने मुसलमानों और पाकिस्तानियों के शीर्षक वाली अधिकांश फिल्में दी हैं, इन फिल्मों में मुसलमानों और पाकिस्तानियों को भारत को आघात पहुँचाने की साजिश करते हुए एक बुराई के रूप में दिखाया गया था।

जालः द ट्रैप” जैसी एक फिल्म में हिन्दू पहचान को एक जबरदस्त फैशन के रूप में चित्रित किया गया था। हर बार जब सनी देओल आतंकवादियों से लड़ते थे तो पृष्ठभूमि में ‘ओम नमः शिव’ की ध्वनि होती थी। तब्बू द्वारा उनकी पत्नी का किरदार निभाया गया था, जो अंत में सनी देओल को धोखा दे देती है, हाँ हाँ आपने सही अंदाजा लगाया, वह एक मुसलमान निकलती है।

 

गदरः एक प्रेम कथा” और “द हीरोः लव स्टोरी ऑफ ए स्पाई” में भी कुछ ऐसा ही मामला है – जिसमें एक धर्म परायण हिन्दू को मुस्लिम खलनायक से लड़ते दिखाया गया है।

“द हीरोः लव स्टोरी ऑफ ए स्पाई” में प्रियंका चोपड़ा एक सकारात्मक मुस्लिम लड़की का किरदार निभाती हैं। उनका किरदार, शाहीन, मुख्य खलनायकों में से एक की बेटी है। सनी देओल न केवल उसके पिता तक पहुँचने के लिए उसका इस्तेमाल करता है बल्कि शाहीन बुरे लोगों को हराने में सनी देओल की मदद करते हुए मर जाती है।

सनी देओल की ब्लॉकबस्टर फिस्म “गदरः एक प्रेम कथा” के कुछ आपत्तिजनक दृश्यों को लेकर विभिन्न मुस्लिम समूहों ने विरोध किया था। इसके चलते सनी देओल ने मुस्लिम समुदाय से माफी तो नहीं माँगी थी, बल्कि विवादों से लाभ उठाते हुए फिल्म और भी सफल हो गई थी।

मुसलमानों से संम्बंधित अच्छे और बुरे होने का सरल वर्गीकरण, जिसमें बहुमत उनके बुरे पक्ष की तरफ ज्यादा है और उनको आतंकवादी या उनके सहानुभूतिकर्ता के रूप माना जाता है, हमारे राष्ट्रवाद में दोहरे मापदण्डों को दर्शाता है।

यह राष्ट्रवाद का वह ब्रांड है जिसके साथ हम सहज महसूस करते हैं जहां हम मुसलमानों के साथ विश्वासघात करने से पहले बिलकुल नहीं झिझकते।

यदि कला जीवन की नकल करने के लिए है, तो हमें देशभक्ति और वाणिज्यिक सिनेमा के माध्यम से अल्पसंख्यक समुदाय के अधीन शर्म और उत्पीड़न पर रोक लगाने और विचार करने की आवश्यकता है।

यदि हिन्दू समुदाय कि यह मांग है कि प्रियंका चोपड़ा को उनके इस नकारात्मक किरदार के लिए माफी मांगनी चाहिए तो किसी को कहना चाहिए कि सनी देओल हमारे मुस्लिम भाइयों से भी माफी मागना शुरू करें।

Read in English: If Priyanka has to say sorry for showing Hindu terrorism, so should Sunny Deol to Muslims


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