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Thursday, 18 July, 2024
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रूस-यूक्रेन जंग पुतिन को समझौते के मेज तक ले आई, चीन के पास नई BRI योजना

रूस के इलाके से माल ढुलाई चीन की बीआरआई के तहत महत्वाकांक्षी योजना थी, लेकिन यूक्रेन में युद्ध से शी वैकल्पिक रूट पर विचार करने को मजबूर हैं.

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रूस-यूक्रेन जंग का आर्थिक असर विश्लेषकों को बेल्ट ऐंड रोड पहल के स्थायित्व पर सवाल उठाने पर मजबूर कर रहा है. लेकिन इस उथल-पुथल से चीन को कुछ हासिल ही हुआ है. अब बीजिंग इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट मध्य और पश्चिम एशिया की ओर ले जाना चाहता है, जिसमें क्रेमलिन की ना-नुकुर से देर हो चुकी है.

चीन के बीआरआई प्रोजेक्ट का नया फोकस यूरेशिया है. इसमें मंगोलिया की अहम भूमिका है.

सोमवार को मंगोलियाई प्रधानमंत्री ओयेन-एरदेने लुवसन्नामसराई ने फाइनेंशियल टाइम्स से कहा कि साइबेरियाई तेल क्षेत्र को मंगोलिया से चीन को जोड़ने वाली ‘पॉवर ऑफ साइबेरिया 2’ या अल्ताई गैस पाइपलाइन प्रोजेक्ट पर निर्माण कार्य 2024 में शुरू होगा. यूरोप में वहां के देशों की मास्को की ऊर्जा आपूर्ति पर निर्भरता के लिए नुक्ताचीन के बाद यह गैस पाइपलाइन प्रोजेक्ट रूस की सरकारी कंपनी गाजप्रोम के लिए खास बन गई है. कंपनी के मुखिया एलेक्सी मिलर ने कहा कि भविष्य में रूस के तेल और गैस का चीन प्राथमिक ग्राहक बनेगा.

चीन के विशेषज्ञों के बीच और सोशल मीडिया पर मंगोलियाई प्रधानमंत्री के पाइपलाइन पर बयान की खासी चर्चा है. उनके इंटरव्यू के बाद हैशटैग ‘चीन-रूस पाइपलाइन प्रोजेक्ट पर 2024 में काम शुरू’ वीबो पर ट्रेंड करने लगा.

मंगोलिया के पार

मंगोलिया खुद को चीन और रूस के बीच फंसा हुआ महसूस करता है और उसे 2023 में मैच्योर होने वाले 1.3 अरब डॉलर के बॉन्ड के भुगतान में मुश्किल आ सकती है और 2024 में 60 करोड़ डॉलर के एक और बॉन्ड का भुगतान करना है.

हालांकि, व्लादिमीर पुतिन के कीव पर हमला बोलने से ठीक पहले फरवरी में रूस और चीन के बीच 117.5 अरब डॉलर के ऊर्जा करार पर दस्तखत हुए, लेकिन यूक्रेन युद्ध का असर यह हुआ कि बीजिंग को अपनी योजनाओं को नए आत्मविश्वास से आगे बढ़ने का मौका मिल गया.

चीन के विशेषज्ञों ने यूक्रेन युद्ध की चुनौतियों से निपटने की राहें बताई हैं. दुनिया के ज्यादातर हिस्सों में बीआरआई परियोजनाएं महामारी और युद्ध की वजह से रुकी पड़ी हैं. फुदान यूनिवर्सिटी में बेल्ट ऐंड रोड और ग्लोबल गवर्नेंस के एग्जीक्यूटिव वाइस डीन हुआंग रेनवी ने कहा, ‘अगर युद्ध लंबा खींचा तो बेल्ट ऐंड रोड पहल में फेरबदल करना होगा.’


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चीन का यूरेशियाई सपना

चीनी नेतृत्व के करीबी मशहूर प्रोफेसर झांग वीवी चाहते हैं कि सत्ता संतुलन झुकाने के लिए यूरेशिया की भूमि से कनेक्टिविटी बढ़ाई जाए.

ड्रैगन टीवी के ‘यह चीन है’ प्रसारण के दौरान कहा, ‘आज यूरोशिया में दुनिया की 75 फीसदी आबादी, 60 फीसदी वैश्विक जीडीपी, 75 फीसदी ज्ञात ऊर्जा भंडार है. चीन की बीआरआई और रूस का ‘ग्रेटर यूरेशियन पार्टनरशिप’ पूरे यूरेशियाई क्षेत्र को जगमग कर सकता है….मेरी राय में यरेशिया में ज्यादातर देशों के बीच सहमति है कि हर क्षेत्र में चीन और रूस के बीच सहयोग बढ़े, यूरेशियाई इलाके के विभिन्न देशों के बीच सहयोग बढ़े, सभ्यताओं का आदान-प्रदान हो और लाभकारी सहयोग बने.’

चीन सिर्फ मंगोलिया के प्रोजेक्ट में ही जोर नहीं लगा रहा है. तकरीबन 20 साल की बातचीत के बाद, चीन-किर्गीस्तान-उज्बेकिस्तान (सीकेयू) रेलवे के निर्माण का काम 2023 में शुरू होगा. हालांकि, प्रस्तावित रेल लाइन रूस से होकर नहीं गुजरेगी, लेकिन ये देश परंपरा से रूस का पिछवाड़ा रहे हैं. वहीं चीन अपनी आपूर्ति शृंखला के लिए वैकल्पिक रास्ता तलाश रहा है. सीकेयू ईरान और तुर्की के जरिए यूरोप का रास्ता आसान करेगा. इसकी कुल लंबाई 523 किलोमीटर है.

नया सीकेयू रेलवे प्रोजेक्ट यूरोप के ‘मिडिल कॉरिडोर’ को फिर जिंदा करेगा, जिसे पहले रूस से होकर गुजरने वाले रूट के मुकाबले महंगा माना जाता रहा है. ‘मिडिल कॉरिडोर’ का दूसरा पहलू बाकू-त्बिलिसी-कार्स (बीटेके) रेलवे है. यह दूसरा रूट है, जो माल यूरोप पहुंचाने के लिए चीनी आपूर्तिकर्ताओं पर पूरी तरह निर्भर है.

रूस के इलाके से माल ढुलाई चीन के बीआरआई का अहम पहलू था, लेकिन यूक्रेन जंग से बीजिंग यूरोप के लिए वैकल्पिक रूट पर विचार करने को मजबूर हुआ. हालांकि, चीनी आपूर्तिकर्ता रूसी इलाके से माल भेजने को लेकर भी डरे हुए हैं क्योंकि क्रेमलीन पर प्रतिबंध लगे हुए हैं.

रूसी इलाके के विकल्प

अगर रूस की निर्भरता चीन पर बढ़ती है तो बीजिंग क्रेमलिन से एक कदम आगे बढ़कर अपनी भू-रणनीतिक योजनाओं को यूरेशिया की ओर ले जा सकता है.

प्रोफेसर वीवी ने कहा, ‘इस मायने में हम चीनी पश्चिमी क्षेत्र को विकसित करेंगे और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की दोहरी व्यवस्था करेंगे. हमारे पास पूरे यूरेशिया को जोड़ने वाला चैनल है, बल्कि मुख्य भूमि में 18,000 किलोमीटर का समुद्र तट भी है.’

चीनी विशेषज्ञों ने यूरेशियाई क्षेत्र में बराबरी की साझेदारी के आधार पर रूस और चीन के बीच सहयोग की पेशकश की है. लेकिन यूक्रेन युद्ध ने रूस के पास चीन की परियोजनाओं पर हामी भरने के अलावा कोई चारा नहीं छोड़ा है. क्रेमलिन की बीजिंग पर कोई बढ़त नहीं है, जिससे रूस का असर अपने पिछवाड़े में सिकुड़ जाएगा.

(लेखक एक स्तंभकार और स्वतंत्र पत्रकार हैं, जो फिलहाल लंदन यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ ओरियंटल एंड अफ्रीकन स्टडीज़ (एसओएएस) से अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में एमएससी कर रहे हैं. इससे पहले वो बीबीसी वर्ल्ड सर्विस में एक चीनी मीडिया पत्रकार थे. वो @aadilbrar पर ट्वीट करते हैं. व्यक्त विचार निजी हैं.)

(इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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