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Friday, 13 February, 2026
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हैदराबाद में रमज़ान के खाने का नया ठिकाना अब सिर्फ ओल्ड सिटी नहीं रहा

हैदराबाद की ओल्ड सिटी में अब कुछ ढीलापन सा आ गया है और वहां बहुत ज्यादा भीड़ रहती है. टोली चौकी अब एक नया और ज्यादा सही विकल्प बनकर सामने आया है.

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हर रमज़ान में हैदराबाद की ओल्ड सिटी खाने की एक मक्का बन जाती है. लाखों लोग हलीम और पथर का गोश्त खाने के लिए अपने पसंदीदा रेस्टोरेंट और स्टॉल के चक्कर लगाते हैं. जो लोग आम दिनों में उस तरफ नहीं जाते, वे भी कम से कम एक बार हलीम खाने ज़रूर जाते हैं.

पाक महीने के दौरान, चारमीनार की तरफ जाने वाली ओल्ड सिटी की मेन रोड हर रात हुज़ूम के दरिया में तब्दील हो जाती है. दुकानों को सुबह 4 बजे तक खुला रखने की इज़ाज़त रहती है. सालों से लोग भीड़ का सामना करते हुए इस ‘सफर’ पर निकलते रहे हैं, ताकि अपने रमज़ान के लज़ीज़ खाने का लुत्फ उठा सकें, लेकिन हर साल हैदराबाद का ट्रैफिक और खराब होता जा रहा है, इसलिए कुछ लोग अब इस सालाना यात्रा के बारे में दो बार सोचते हैं. अब वो वक्त नहीं रहा जब गाचीबोवली से ओल्ड सिटी एक घंटे से कम में पहुंचा जा सकता था.

सालों में, पश्चिमी हैदराबाद की टोली चौकी में एक नया और ज्यादा समझदारी भरा विकल्प सामने आया है. यह न सिर्फ गाचीबोवली और हाईटेक सिटी के करीब है, बल्कि बंजारा हिल्स और जुबली हिल्स जैसे पॉश इलाकों के भी पास है. मुझे याद है, कुछ साल पहले रमज़ान में मैं वहां से गाड़ी से गुज़र रहा था और आज तक उसका अफसोस है. खाने की वजह से नहीं, बल्कि इसलिए कि रात 11 बजे मैं सिर्फ एक किलोमीटर की दूरी पार करने के लिए 45 मिनट तक ट्रैफिक में फंसा रहा.

ट्रैफिक की वजह थे सैकड़ों लोग, जो रमज़ान के आखिरी दिनों में खरीदारी और खाने के लिए मेन सड़क पर उमड़ पड़े थे. मुझे वहां खाने की अलग-अलग चीज़े देखकर हैरानी हुई—कबाब स्टॉल से लेकर सहरी के मेन्यू तक—टोली चौकी में वह सब था जो हमें आमतौर पर ओल्ड सिटी में मिलता है और धीरे-धीरे, कम से कम 2021 से, इस इलाके ने भी वैसा ही रमज़ान का माहौल बना लिया है.

पिस्ता हाउस, शाह घौस

मैं सच बताऊं: टोली चौकी में जो भी चीज़ सामने आ जाए, मैं सब कुछ नहीं चखूंगा, लेकिन यही बात ओल्ड सिटी पर भी लागू होती है.

टोली चौकी की लगभग एक किलोमीटर लंबी मेन सड़क हर साल खाने की जन्नत में बदल जाती है. रमज़ान के खास अंदाज़ में, लोग बिना ओल्ड सिटी गए भी वहां वैसा ही ट्रैफिक जाम मिला होगा. हां, ओल्ड सिटी अच्छी है, लेकिन रमज़ान के पकवानों के मामले में वह ज़रूरी नहीं कि अकेली जगह हो, या सबसे अच्छी जगह ही हो.

उदाहरण के लिए, पुरानी दिल्ली में भी हमेशा सबसे अच्छा खाना नहीं मिलता. मुझे शाहीन बाग और यहां तक कि निजामुद्दीन में भी ज्यादा अच्छे अनुभव हुए हैं.

हैदराबाद की ओल्ड सिटी में अब कुछ ढीलापन सा आ गया है. शायद इसलिए कि हमारा ‘चलता है’ वाला रवैया हमें एक साधारण सी रात का भी पूरा मज़ा लेने से नहीं रोकता—आखिर ओल्ड सिटी तक पहुंच जाना ही अपने आप में एक खुशी है. रमज़ान में एक वक्त के बाद वहां चलना भी मुश्किल हो जाता है, खासकर चारमीनार इलाके में.

और ऐसा भी नहीं है कि वहां बहुत ज्यादा नया कुछ मिलता हो. सबसे अच्छे रेस्टोरेंट तो साल भर खुले रहते हैं, हलीम और कबाब के स्टॉल को छोड़कर.

कुछ साल पहले, जब किसी ने मुझे टोली चौकी में होने वाली एक फूड वॉक का पोस्टर भेजा, तो मैंने सोचा कि रमज़ान में वहां कौन जाएगा, लेकिन मुझे सुखद हैरानी हुई.

टोली चौकी का बड़ा फूड कोर्ट, जहां पिस्ता हाउस और मंदर जैसे मशहूर रेस्टोरेंट हैं और सामने की तरफ शाह घौस का आउटलेट भी है, इसने साफ तौर पर इसमें मदद की है.

बेशक, वहां कोई ऐतिहासिक स्मारक नहीं हैं, लेकिन अगर आप भारी और परेशान करने वाले ट्रैफिक से बचना चाहते हैं, तो इस रमज़ान टोली चौकी आपके लिए सही जगह हो सकती है.

यूनुस लसानिया हैदराबाद के पत्रकार हैं, जिनका काम मुख्य रूप से राजनीति, इतिहास और संस्कृति पर केंद्रित है. उनका एक्स हैंडल @YunusLasania है. ये उनके निजी विचार हैं.

(इस लेख को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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