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Monday, 24 June, 2024
होममत-विमतएल्विश यादव की जीत से पता चलता है कि बिग बॉस इन्फ्लुएंसर्स की सेनाओं के सरलीकरण के बारे में है

एल्विश यादव की जीत से पता चलता है कि बिग बॉस इन्फ्लुएंसर्स की सेनाओं के सरलीकरण के बारे में है

जब कम लोकप्रिय सेलिब्रिटीज़ शो में जाते थे तो दर्शकों का मनोरंजन करने और जीतने के लिए उटपटांग हरकतें करते थे, लेकिन अब इन्फ्लुएंसर्स बिना कुछ किए, अपने फैन्स के कारण जीत जाते हैं.

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साल 2006 में जब शो शुरू हुआ, तो बिग बॉस वो जगह थी जहां उन मशहूर हस्तियों को बढ़ावा मिला जिनका स्टारडम कम हो गया था. उनकी हरकतों ने इस कहावत को वास्तविकता दी — पब्लिसिटी कैसी भी अच्छी ही होती है. उनकी लोकप्रियता इतनी बढ़ गई कि उन्होंने दर्शकों का ध्यान और उनके वोट हासिल किए, लेकिन, अब कंटेस्टेंट्स इन्फ्लुएंसर्स हैं, जिनके हाउस में कदम रखने से पहले लाखों में फॉलोअर्स हैं. उनकी प्रसिद्धि ने इस खेल को पूरी तरह से बदल दिया है.

एमसी स्टेन का बिग बॉस 16 का खिताब जीतना और एल्विश यादव का बिग बॉस ओटीटी 2 का ताज़ जीतना बदलते दौर का संकेत है. वो लोग वैसे स्टार्स नहीं थे जिनकी चमक फीकी पड़ रही हो. उन्हें अपनी मौजूदगी दिखाने के लिए शो की नहीं, बल्कि शो को उनकी ज्यादा ज़रूरत थी. दर्शकों की संख्या के डेटा में यह साफ है. टीवी फिनाले 3.3 रेटिंग के साथ टीआरपी लिस्ट में टॉप पर था, जो पिछले साल के 1.3 से काफी आगे है. इस बीच, ओटीटी स्पिनऑफ ने रिकॉर्ड तोड़ दिए क्योंकि 2.3 करोड़ लोगों ने एक साथ फिनाले देखा था.

फैनबेस के सरलीकरण के साथ, कंटेस्टेंट की घोषणा होते ही अब दर्शकों को पता चल जाता है कि कौन जीतेगा, लेकिन ये फॉर्मेट कब तक ज़िंदा रहेगा?


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फैन्स की भीड़

बिग बॉस का सार एक कंटेस्टेंट की एक बंद घर में उन लोगों के साथ रहने की क्षमता है जिनके साथ उन्होंने पहले कभी बात तक नहीं की है. हाउस में उनकी परफॉर्मेंस के आधार पर वोट दिए जाते हैं, या कहें बस दे दिए जाते हैं.

वायरलिटी इस खेल का नाम था, जितना अधिक विवादास्पद उतना बेहतर. यहां तक कि जो लोग शो नहीं देखते हैं वो भी इन फेमस वन-लाइनर्स को जानते होंगे जो इस फॉर्मेट ने पॉप कल्चर को तोहफे में दिया है — व्हाट इज़ दिस बिहेवियर पूजा? और तुआडा कुत्ता टॉमी, ते साड्डा कुत्ता-कुत्ता?

एल्विश, एमसी स्टेन, पुनीत सुपरस्टार, उर्फी जावेद और अभिषेक मल्हान (फुकरा इंसान) जैसे इन्फ्लुएंसर्स की एंट्री से, ये फॉर्मेट अपने शीर्ष पर पहुंच चुका है. उनके बड़ी संख्या में फैन्स हैं, जो उन्हें वोट देते हैं, भले ही वो घर में कुछ भी करें.

जब जून में पुनीत सुपरस्टार को बिग बॉस ओटीटी से बाहर निकाला गया, तो उन्होंने अपने फैन्स से शो और इसे स्ट्रीम करने वाले प्लेटफॉर्म जियो सिनेमा का बहिष्कार करने के लिए कहा था, और उन्होंने सुना भी.

जिसका परिणाम हुआ कि ऐप की रेटिंग गूगल प्ले स्टोर पर गिरकर 1.1 और ऐप स्टोर पर 1.6 हो गई है, जबकि पहली रेटिंग 4.2 पर वापस आ गई है, दूसरी अभी भी बरकरार है. रिव्यू सेक्शन वास्तविक चिंताओं के साथ समान लंबी समीक्षाओं से भरा पड़ा है, जो चीज़ इसे साफ करती है वो है टाइटल— भगवान की आवाज़, जस्टिस फॉर जनता की आवाज़, बिग बॉस ओटीटी.

अगर जो लोग वोटिंग के दौरान आउट हो जाते हैं, तो वो इतना प्रभाव डालते हैं, कि विजेता ‘सिस्टम’ का खेल-खेल रहे हों.


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इन्फ्लुएंसर्स का युद्ध

एल्विश यादव की जीत अभूतपूर्व थी. ऐसे प्रभावशाली व्यक्ति, जिनके उस समय इंस्टाग्राम पर 6 मिलियन फॉलोअर्स थे और वो चौथे हफ्ते में ओटीटी स्पिनऑफ में वाइल्डकार्ड एंट्री के रूप में आए. इस शो को जीतने वाले वो पहले ऐसे कंटेस्टेंट रहे.

शो के अंत तक इंस्टाग्राम पर उनके 15.2 मिलियन फॉलोअर्स हो गए थे, जिन्हें सहज वोटों में बदला गया और एल्विश ने 80 लाख वोटों से जीत हासिल की.

बिग बॉस 16 में भी हालात वैसे ही थे. एमसी स्टेन, जो हालांकि, एक रैपर थे, उन्होंने शो से पहले ही अपना एक समाज बना लिया था. उनके इंस्टाग्राम अकाउंट पर उर्फी जावेद से भी ज़्यादा रीच आई.

इन्फ्लुएंसर्स के उदय ने बिग बॉस को बदल कर रख दिया है. अलग-अलग फील्ड से तरह-तरह के किरदारों का एक साथ आना ही इस शो को दिलचस्प बनाता है. अब, शो ने दर्शकों की संख्या बढ़ाने की कोशिश में खुद को मुश्किल में डाल लिया है. घर में इन्फ्लुएंसर्स का मतलब टीआरपी है, लेकिन इसका मतलब यह भी है कि दर्शकों को पता है कि कौन जीतेगा.

एक और कदम और बिग बॉस प्रभावशाली फैन्स के लिए एक कॉम्पिटिशन बन जाएगा. अगला पड़ाव, कैरीमिनाटी बनाम भुवन बाम है.

(लेखिका का ट्विटर हैंडल @anuverma585 है. व्यक्त विचार निजी है.)

(संपादन: फाल्गुनी शर्मा)

(इस लेख को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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