Monday, 8 August, 2022
होमलास्ट लाफजब पुलिस 'चोरों की तरह मोटी' न हो, और खाना पकाने के अधिकार की मांग

जब पुलिस ‘चोरों की तरह मोटी’ न हो, और खाना पकाने के अधिकार की मांग

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए पूरे दिन के सबसे अच्छे कार्टून.

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आज के चित्रित कार्टून में, आर प्रसाद विभिन्न राज्यों के पुलिस बलों के बीच रस्साकशी पर कटाक्ष करते हैं, जिसमें ज़ी न्यूज़ के एंकर रोहित रंजन के उनके गाजियाबाद स्थित घर से गिरफ्तारी को लेकर कांग्रेस शासित छत्तीसगढ़ और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शासित उत्तर प्रदेश की पुलिस के बीच खींचतान भी शामिल है. इस साल मई में भाजपा प्रवक्ता तजिंदर सिंह बग्गा की गिरफ्तारी को लेकर आम आदमी पार्टी (आप) शासित पंजाब की पुलिस और केंद्रीय गृह मंत्रालय की देखरेख वाली दिल्ली पुलिस के बीच इसी तरह की रस्साकशी छिड़ गई थी.

कार्टूनिस्ट आलोक निरंतर ने दिखाया है कि कैसे बीजेपी के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज ठाकरे को पावर की उम्मीद दिखाई और सत्ता एकनाथ शिंदे को दे दी.

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केरल की उच्च साक्षरता दर की ओर इशारा करते हुए, ई.पी. उन्नी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के साजी चेरियन पर कटाक्ष करते हैं, जिन्हें संविधान पर अपनी विवादास्पद टिप्पणियों के साथ प्रतिक्रिया आमंत्रित करने के बाद केरल सरकार में मंत्री के तौर पर इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया था.

सतीश आचार्य ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के जस्टिस एच.पी. संदेश, जिन्होंने पिछले सप्ताह एक सुनवाई के दौरान दावा किया था कि राज्य के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की आलोचना पर उन्हें तबादला करने की धमकी दी गई थी. उन्हें यह कहते हुए दर्शाया है, ‘मैं किसी से नहीं डरता. मैं बिल्ली के गले में घंटी बांधने के लिए तैयार हूं. जज बनने के बाद मैंने संपत्ति जमा नहीं की है. अगर मैं पद खो देता हूं तो मुझे परवाह नहीं है. मैं एक किसान का बेटा हूं.’

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 का हवाला देते हुए, कीर्तिश भट्ट ने घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमत में 50 रुपये की बढ़ोतरी पर टिप्पणी की है. दृष्टांत में, एक जोड़े को एक समाचार रिपोर्टर से यह कहते हुए देखा जा सकता है: ‘अगर हमें भोजन का अधिकार है, तो हमें इसे पकाने का भी अधिकार होना चाहिए.’

(इन कार्टून्स को अंग्रेजी में देखने के लिए यहां क्लिक करें)

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