नयी दिल्ली, 10 मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को मध्य प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग (एसईसी) को राज्य में दो सप्ताह के भीतर स्थानीय निकाय चुनाव कार्यक्रम की अधिसूचना जारी करने का निर्देश दिया।
शीर्ष दालत ने कहा कि मध्य प्रदेश के 23,263 से अधिक स्थानीय निकाय पिछले दो वर्षों से निर्वाचित प्रतिनिधियों के बिना काम कर रहे हैं और यह ‘कानून के शासन के चरमराने’ की सीमा है।
न्यायालय ने कहा कि परिसीमन या वार्ड के गठन को लेकर जारी गतिविधि किसी भी प्राधिकरण द्वारा उचित समय पर चुनाव कार्यक्रम को अधिसूचित करने और निवर्तमान निकाय के पांच वर्ष के कार्यकाल की समाप्ति से पहले निर्वाचित निकाय की स्थापना सुनिश्चित करने के लिए अपने संवैधानिक दायित्व का निर्वहन न करने का एक वैध आधार नहीं हो सकती है।
न्यायमूर्ति एएम खानविलकर की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि 2010 के संविधान पीठ के फैसले में जिस त्रि-परीक्षण प्रक्रिया का जिक्र किया गया है, उसे जब तक पूरा नहीं कर लिया जाता, तब तक अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए किसी आरक्षण का प्रावधान नहीं किया जा सकता।
पीठ में न्यायमूर्ति एएस ओका और न्यायमूर्ति सीटी रविकुमार भी शामिल थे। उसने कहा कि अगर राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा चुनाव कार्यक्रम जारी करने से पहले त्रि-परीक्षण प्रक्रिया पूरा नहीं की जा सकती है तो अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित सीटों को छोड़कर, जो एक संवैधानिक आवश्यकता है, सामान्य श्रेणी की सभी सीटों के लिए कार्यक्रम अधिसूचित किया जाना चाहिए।
शीर्ष अदालत ने मध्य प्रदेश नगर परिषद अधिनियम-1956, मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम-1993 और मध्य प्रदेश नगर पालिका अधिनियम-1961 के कुछ प्रावधानों की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर यह फैसला सुनाया।
न्यायालय ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया में देरी नहीं की जा सकती, क्योंकि पांच साल की अवधि समाप्त होने पर अवरोध की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी और समय पर चुनाव कराना प्राधिकारियों का संवैधानिक दायित्व है।
न्यायालय ने मध्य प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनाव से जुड़े मामले की सुनवाई जुलाई तक के लिए स्थगित कर दी।
इससे पहले, शीर्ष अदालत ने चार मई को महाराष्ट्र राज्य निर्वाचन आयोग को स्थानीय निकाय चुनावों से संबंधित कार्यक्रम को दो सप्ताह के भीतर अधिसूचित करने का निर्देश दिया था।
भाषा पारुल उमा
उमा
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.
