कोहिमा, 18 अप्रैल (भाषा) नगालैंड में चिकित्सकों की सेवानिवृत्ति की उम्र दो साल बढ़ाये जाने की मांग को लेकर तीन-दिवसीय आंदोलन से राज्य के सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं सोमवार को प्रभावित रहीं।
नगालैंड इन-सर्विस डॉक्टर्स एसोसिएशन (एनआईडीए) के सदस्य सरकारी चिकित्सकों की सेवानिवृत्ति की उम्र 60 वर्ष से बढ़ाकर 62 वर्ष किये जाने की मांग के समर्थन में एक साथ आकस्मिक अवकाश पर चले गये हैं।
राज्य के मुख्य सचिव जे. आलम ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि एसोसिएशन की मांग राज्य सरकार के विचारार्थ है, लेकिन इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया जा सका है, क्योंकि कुछ विरोध के स्वर भी सामने आए हैं।
एसोसिएशन की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि आंदोलन के कारण राज्य भर में सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) में सेवाएं प्रभावित हुई, लेकिन आपातकालीन विभाग एवं गहन चिकित्सा इकाइयों (आईसीयू) में सेवाएं जारी रहीं।
बयान के अनुसार, वरिष्ठ चिकित्सक आंदोलन की अवधि के दौरान चौबीस घंटे सेवा के लिए उपलब्ध रहेंगे। इसमें कहा गया है कि आंदोलन के कारण कोविड-19 टीकाकरण और जांच का काम प्रभावित नहीं हुआ है।
एनआईडीए का कहना है कि उसकी मांग प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की 2019 में किये गये वायदे के अनुरूप है। इसने कहा है कि संगठन को यह कदम उठाने पर मजबूर किया गया है, क्योंकि राज्य सरकार एक साल में इस मसले का हल ढूंढ पाने में असफल रही है।
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि आंदोलन के पहले दिन कोहिमा और दिमापुर जिलों के प्रशासन ने रोगियों के इलाज के लिए निजी चिकित्सकों की सहायता मांगी।
नगालैंड सरकार का कहना है कि प्रधानमंत्री का बयान एक राजनीतिक रैली में आया था और इस बारे में राज्यों को कोई निर्देश नहीं दिये गये हैं।
इस बीच सरकार ने आंदोलनरत चिकित्सकों के आकस्मिक अवकाश के आवेदनों को मंजूरी नहीं दी है।
भाषा सुरेश माधव
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