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Friday, 3 April, 2026
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महिलाओं को सच्चे सशक्तिकरण के लिए भय और आत्मसंदेह पर काबू पाना होगा: एनसीडब्ल्यू प्रमुख

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नयी दिल्ली, सात मार्च (भाषा) राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) की अध्यक्ष विजया किशोर राहटकर ने शनिवार को कहा कि महिलाओं का सच्चा सशक्तिकरण भय, आत्मसंदेह और लंबे समय से चली आ रही सामाजिक रूढ़ियों द्वारा निर्मित मानसिक बाधाओं को तोड़ने से शुरू होता है।

विज्ञान भवन में महिला विचारकों के एक राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए, राहटकर ने कहा कि भारतीय सभ्यता ने परंपरागत रूप से महिलाओं को केवल व्यक्तियों या सामाजिक भूमिकाओं के रूप में नहीं, बल्कि शक्ति, सृजन और चेतना के प्रतीक के रूप में देखा है।

देवी सरस्वती, लक्ष्मी और दुर्गा के सांस्कृतिक प्रतीकवाद का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय समाज ने ऐतिहासिक रूप से महिलाओं को परिवार के दायरे तक सीमित रखने के बजाय उन्हें ज्ञान, समृद्धि और शक्ति की नींव के रूप में मान्यता दी है।

उन्होंने कहा, ‘जब एक महिला यह पहचान लेती है कि वह केवल परिस्थितियों की शिकार नहीं बल्कि बदलाव की वाहक है तो वह आत्मविश्वास से भर जाती है और समाज में परिवर्तन की शक्ति बन जाती है।’

एनसीडब्ल्यू प्रमुख ने इस बात पर भी जोर दिया कि माताओं को सशक्त बनाना एक मजबूत राष्ट्र के निर्माण की कुंजी है, क्योंकि आत्मविश्वासी माताएं आत्मविश्वासी बच्चों का पालन-पोषण करती हैं, जो बदले में समाज और देश को मजबूत बनाते हैं।

‘भारती – नारी से नारायणी’ नामक दो दिवसीय सम्मेलन का आयोजन भारतीय विद्वत परिषद ने राष्ट्र सेविका समिति और शरण्या के सहयोग से यहां विज्ञान भवन में किया है।

भाषा

शुभम माधव

माधव

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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