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Friday, 14 June, 2024
होमदेशनहीं होगा निजीकरण, पीपीपी मॉडल से रेलवे को मिलेगी स्पीड- पीयूष गोयल

नहीं होगा निजीकरण, पीपीपी मॉडल से रेलवे को मिलेगी स्पीड- पीयूष गोयल

रेल मंत्रालय की मांगों पर चर्चा के लिए लोकसभा ने गुरुवार को 12 घंटे से अधिक समय तक अपनी कार्यवाही जारी रखते हुए एक कीर्तिमान स्थापित किया.

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नई दिल्ली: आम बजट के बाद लगातार के निजीकरण पर उठ रहे सवाल पर शुक्रवार को रेल मंत्री पीयूष गोयल ने विराम लगा दिया है. उन्होंने कहा, रेलवे के निजीकरण का कोई प्रश्न ही नहीं उठता है. रेलवे को सुविधा संपन्न करना, माल ढोने की क्षमता में वृद्धि करना और स्टेशन के विकास के लिए निवेश की आवश्यकता होती है. यदि कोई नई तकनीक लाता है, नया स्टेशन बनाने को तैयार हो जाता है, कोई सेमी, हाई-स्पीड ट्रेन चलाना चाहता है, यह देशहित का काम है, हमें उसे आमंत्रित करना चाहिए. हम चाहते हैं कि रेलवे की क्षमता बढ़े, इसलिये हमने निर्णय लिया कि हम पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप को प्रोत्साहित करेंगे, कुछ युनिट को कॉर्पोरेटाइज करेंगे.

सदन में क्या बोले रेलमंत्री गोयल

रेल मंत्री पीयूष गोयल ने लोकसभा में रेल मंत्रालय की अनुदान मांगों पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि 1950 में पूरे देश में 77 हजार किमी ट्रैक थे. 2014 में 89 हजार 991 किमी थे. हमारी सरकार के आने के बाद महज पांच वर्षों में बढ़कर 1 लाख 23 हजार किमी तक पहुंच गया है. हमारी सरकार के आने के बाद ‘गेज कनवर्ज़न’ और नई लाइनों के बिछाने के काम में 59 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है.

रेल मंत्री गोयल ने कहा कि 2009 से 2014 के बीच 3 हजार 38 रूट किमी का विद्युतीकरण किया गया था. हमने 5 वर्षों में 13,687 किमी विद्युतीकरण किया. इसी तरह रेलवे का माल ढोना लगभग 1300% बढ़ा है. पैसेंजर ट्रैफिक लगभग 1,642 प्रतिशत बढ़ा है.


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गोयल ने कहा कि पहले जो देश को गुमराह करने, ट्रेन और ट्रैक चुनाव जीतने के हिसाब से बजट अनाउंस किये जाते थे. पीएम मोदी ने उस विषय को समाप्त किया है. जो काम किया जा सकता वही देश के समक्ष रखा जाए. डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर को 2007 में शुरू किया गया. वहीं यूपीए कार्यकाल पर सवाल खड़ा करते हुए गोयल ने कहा 2007 से 2014 तक 7 वर्ष में 1 किलोमीटर की भी ट्रैक लिंकिंग नही कर पाए. हमारी सरकार के आने के बाद 5 वर्षों में 1,900 किमी का ट्रैक लिंकिंग अब तक पूरा कर चुकी है.

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रेलमंत्री ने लोकसभा में चर्चा के दौरान कहा कि हाईडेंसिटी नेटवर्क पर 6 लाख करोड़ खर्च किए जाएंगे. इससे लोगों को सुविधाएं मिल सकेंगी. मुंबई से दिल्ली, दिल्ली से कोलकाता जैसे रूटों पर गति बढ़ाने के लिए डेढ़ लाख करोड़ खर्च किए जाएंगे.
हमने एक एक विषय पर गहराई से विचार कर, बिना राजनैतिक हस्तक्षेप के, देश की भलाई, और जनता की सुविधा के लिये, किन चीजों पर निवेश देकर रेलवे अधिक अच्छी सेवा दे सकें, उस पर बल दिया. मंत्री ने कहा कि नई सुविधाओं, नए प्रोजेक्ट, नई तकनीक, नई क्षमता, नए स्टेशन और हाई स्पीड ट्रेनों के लिए निवेश बेहद जरूरी है.

सुरक्षा पर खर्च होंगे 5 हजार 690 करोड़ रुपए 

गोयल ने कहा यात्री की 2009-2010 में केवल 2 हजार करोड़ यात्री सुरक्षा पर खर्च करते थे. हमारी सरकार का मुख्य उद्देश्य यात्रियों को सुरक्षा देना है. इसलिए हम 5 हजार 690 करोड़ रुपए खर्चा करेंगे. 2004 से 2009 के बीच लगभग 206 दुर्घटना प्रति वर्ष होते थे. 2009 से 2011 के बीच 153 दुर्घटना प्रति वर्ष और 2019 के समय में यह 95.6 से भी नीचे आ गया है.
चर्चा के दौरान गोयल ने कहा कि मंत्रालय ने एलआईसी से अब तक 18 हजार करोड़ रुपए उधार ले चुके है. बाकि जगह से एलआईसी से सस्ता कर्ज मिलने पर हमने एलआईसी से उधार लिए है.

हर कर्मचारी के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम

रेलमंत्री ने कहा कि लगातार ट्रेनिंग प्रोग्राम होने से जीवन में कुछ नया सीखने को मिलता है. इसी तर्ज पर मंत्रालय के भी हर कर्मचारी को ट्रेनिंग की जरुरत होती है. हमने तय किया है कि हर साल में एक हफ्ता कर्मचारियों के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित किया जाएगा. रेलवे एक ऐसी ऑर्गेनाइजेशन है जो 24 घंटे काम करती है, साल के 365 दिन काम करती है. जो रेलवे के 13 लाख कर्मचारी हैं उनके कर्मठ प्रयासों के लिये मैं उन्हें धन्यवाद भी देता हूं.


सभी ट्रेनों में जल्द LHB कोच 

रेलमंत्री ने कहा कि ICF कोचेस वर्षों से बनते आ रहे हैं, ये कोचेस हमारी सरकार आने तक चलते आ रहे थे. इन कोचेस के कारण दुर्घटना में लोगों की मृत्यु होती है. 30 साल पहले अधिक सुरक्षित LHB कोच लिंक हॉफमेन बुश (एलएचबी) कोच नाम दिया गया. इन टक्कररोधी कोच डिजाइन आया, हमने निर्णय लिया कि सिर्फ LHB कोच बनाए. आज देश में एक भी नया ICF कोच नही बनता. सभी ट्रेनों में पुराने कोच हटा रहे है. जल्द ही सभी ट्रेनों में  LHB कोच लगाए जाएंगे. उन्होंने कहा कि उप्र के रायबरेली में 2007-08 में मॉडर्न कोच फैक्टरी का प्रोजेक्ट शुरु हुआ, 2014 तक वहां एक भी कोच नही बना. कपूरथला और चेन्नई से लाकर वहां पेंट किया जाता था और कहते थे कि प्रोडक्शन हो गया.हम चाहते हैं कि रायबरेली की फैक्ट्री 5,000 क्षमता की हो, इससे हमारे उद्योग को बल मिले, वहां से भारत के बने ट्रेन सेट और कोच पूरे विश्व में जाए.

ट्रेनों का विद्युतीकृत जल्द 

गोयल ने कहा कि वंदेभारत एक्सप्रेस अच्छा रिस्पांस पहले दिन से ही देखने को मिल रहा है. आने वाले कुछ वर्षों में भारतीय रेल का ब्रॉडगेज नेटवर्क शत प्रतिशत विद्युतीकृत हो जायेगा. इससे हजारों करोड़ का डीजल बचेगा, विदेशी मुद्रा बचेगी, साथ ही पर्यावरण में भी बचेगा. दिल्ली से आने जाने वाली और मुंबई की सभी ट्रेनों का विद्युतीकरण होगा.

ऑटोमैटिक डाटा लॉगर से समय में आया सुधार 

रेलमंत्री ने कहा कि आजादी के लगभग 67 वर्ष बाद भी समयबद्धता का पुराना सिस्टम जिसमें स्टेशन मास्टर समय लिखता था कि स्टेशन कब पहुंची और निकली, जो सही नही थी. हमने ऑटोमेटिक डाटा लॉगर लगाए, जिससे समय पालन में सुधार आया. रेल दृष्टि एप के माध्यम से सभी ट्रेनों की जानकारी मिल सकती है. इस पर हर ट्रेन का समय लगातार अपडेट होता रहता है.ऑटोमेटिक सिग्नलिंग सिस्टम का लाभ पूरे देश को मिले, ऐसे कामों के लिये सरकार यदि निवेश के लिये पहल करती है तो मुझे लगता था कि विपक्ष उसमें सहायता करना चाहिए.

2022 में सभी ट्रेनों में होंगे बॉयो टॉयलेट 

गोयल ने कहा कि 58,400 कोचेस में बॉयो टॉयलेट लगाए जाने थे. इसमें कुल 2,40,000 बॉयो टॉयलेट लगने हैं, हमने आज तक 2,10,000 के करीब बॉयो टॉयलेट लगा दिए हैं. 2022 तक सभी ट्रेनो में बॉयो टॉयलेट होंगे.वहीं हमार सरकार 5 वर्षों मे 377 लिफ्ट और 457 एक्सीलेटर भी स्टेशनों पर बनाए गए है.

तय समय पर होगा बुलेट ट्रेन का काम

चर्चा में जवाब में गोयल ने कहा कि बुलेट ट्रेन का काम अपनी गति से चला रहा है. सरकार द्वारा तय समय पर बुलेट ट्रेन का काम पूरा हो जाएगा. पालघर में आ रही दिक्कत को देखते हुए सरकार वहां के आदिवासियों से चर्चा कर रही है. जल्द ही समाधान निकाला जाएगा. काम समय पर पुरा हो जाएगा.


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रेलवे पर चर्चा करते हुए आधी रात तक चली संसद

रेलवे मंत्रालय की मांगों पर चर्चा के लिए लोकसभा ने गुरुवार को 12 घंटे से अधिक समय तक अपनी कार्यवाही जारी रखते हुए एक कीर्तिमान स्थापित किया. इस मुद्दे पर चर्चा रात 11.58 पर समाप्त हुई. इसमें 99 सांसदों ने अपनी बात रखी.

संसदीय कार्य मंत्री प्रह्रलाद जोशी ने शुक्रवार को कहा कि चर्चा आधी रात तक चली क्योंकि हर सदस्य इसका हिस्सा बनना चाहता था. जोशी ने कहा कि लगभग 18 वर्षों में यह पहली बार था जब निचले सदन की कार्यवाही इतने लंबे समय तक चली. उन्होंने कहा कि इतनी लंबी चर्चा चलाना “निस्संदेह, यह एक रिकॉर्ड था.” बहस के दौरान, विपक्ष ने आरोप लगाया कि केंद्र ने रेलवे को विकसित करने के बअब रेलवे का पूरा फोकस जनरल और स्लीपर क्लास की साफ-सफाई पर, टीटीई को मिली जिम्मेदारीजाए उसकी संपत्ति को बचा. जबकि सरकार ने तर्क दिया कि संप्रग सरकार के समय अपेक्षाकृत पूंजीगत व्यय दोगुना हो गया था.

कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी), द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) और अन्य विपक्षी दलों ने रेलवे पर “निजीकरण” के प्रयास का आरोप लगाया. इस दौरान बुलेट ट्रेन भी विपक्ष के हमले से बच नहीं पाई और इसे भी आलोचना झेलनी पड़ी।

रेल राज्य मंत्री सुरेश अंगाड़ी ने हस्तक्षेप करते हुए सरकार का बचाव किया और लोकसभा को बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बहुत सारे विकास कार्य हुए हैं.

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