नई दिल्ली: पंजाब पुलिस साइबर ठगी के आरोपों से जुड़े एक आपराधिक मामले को दर्ज करने की तैयारी कर रही है. ये आरोप एक सेवानिवृत्त इंस्पेक्टर जनरल रैंक के अधिकारी ने लगाए थे, जिन्होंने सोमवार को पटियाला में आत्महत्या की कोशिश में खुद को गोली मार ली थी.
अमर सिंह चहल को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उनका ऑपरेशन किया. पंजाब पुलिस के सूत्रों ने बताया कि वह अब खतरे से बाहर हैं. पटियाला पुलिस की एक टीम ने एक विस्तृत सुसाइड नोट बरामद किया है, जो कथित तौर पर पुलिस महानिदेशक गौरव यादव को संबोधित है. इसमें 8.10 करोड़ रुपये की ठगी से जुड़े आरोपों का जिक्र है.
एक पुलिस अधिकारी ने दिप्रिंट से कहा, “आरोपों की जांच की जा रही है और यह देखा जा रहा है कि जांच कैसे आगे बढ़ाई जाए. नोट की सामग्री के आधार पर यह तय किया जा रहा है कि शिकायतकर्ता परिवार का कोई सदस्य होगा या पुलिस स्टाफ.”
सूत्रों के अनुसार, चहल ने हथियार का इस्तेमाल करने से पहले सभी दस्तावेज और लेनदेन का पूरा विवरण अपने मोबाइल फोन और घर की डायरी में छोड़ दिया था. यह हथियार उनके एक निजी सुरक्षा अधिकारी का था.
भारतीय वायुसेना के पूर्व अधिकारी रहे चहल 1990 में डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस के रूप में पंजाब पुलिस में शामिल हुए थे. उन्होंने कई अहम पदों पर काम किया, जिनमें 2016 में अमृतसर के पुलिस कमिश्नर का पद भी शामिल है. बाद में 2018 में कांग्रेस सरकार द्वारा गठित विशेष जांच टीम की चार्जशीट में उनका नाम शामिल हुआ, जो फरीदकोट में प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की जांच कर रही थी.
अक्टूबर 2015 में कोटकपूरा और बहबल कलां में बेअदबी की घटनाओं के विरोध में प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पुलिस फायरिंग में दो लोगों की मौत हो गई थी.
एसआईटी ने इस मामले में चहल, पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी, तत्कालीन मुख्यमंत्री दिवंगत प्रकाश सिंह बादल और तत्कालीन उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल को नामजद किया था.
चहल अप्रैल 2023 से पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से जमानत पर बाहर हैं. वह मूल रूप से मानसा जिले के मत्ती गांव के रहने वाले थे और तीन साल पहले सेवानिवृत्ति के बाद पटियाला जिले में बस गए थे.
‘सिस्टमिक फ्रॉड’
अपने घर पर खुद को गोली मारने से पहले लिखे गए 12 पन्नों के नोट में चहल ने बताया कि कैसे वह ‘रजत वर्मा’ नाम के एक व्हाट्सएप अकाउंट के जाल में फंस गए, जो खुद को डीबीएस बैंक का मैनेजिंग डायरेक्टर बताता था.
उन्होंने बताया कि उन्होंने कुल 8.10 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम ऐसे निवेश प्लान में लगा दी, जिन्हें निवेश के रूप में पेश किया गया था. ये प्लान ‘एफ.777 डीबीएस वेल्थ इक्विटी रिसर्च ग्रुप’ नाम की एक कम्युनिटी के जरिए प्रचारित किए जा रहे थे, जिसे कथित तौर पर ठग चला रहे थे.
उन्होंने 28 अक्टूबर से शुरू हुई पूरी घटनाक्रम का जिक्र किया, जब उन्हें कैपिटल मार्केट से जुड़े टिप्स मिलने लगे. इसमें शेयर बाजार को प्रभावित करने वाले कारकों की जानकारी भी दी जाती थी. उन्हें एक व्हाट्सएप कम्युनिटी में जोड़ा गया, जहां लोग इन अवधारणाओं पर सवाल पूछ सकते थे.
चहल ने लिखा, “उन्होंने यह भी कहा कि पहला चरण रिटेल निवेशकों के लिए 40 दिनों तक चलेगा और डॉ. रजत वर्मा सदस्यों को ट्रेड करने देंगे. यह असल में भरोसा दिखाने की एक चाल थी.”
करीब एक हफ्ते बाद, रिटेल निवेशकों को शेयर ट्रेड करने की अनुमति दी गई. धीरे-धीरे लोग ज्यादा पैसा लगाने लगे. ठगों ने एक डैशबोर्ड भी बनाए रखा, जिसमें डेली ट्रेड स्टॉक, ओटीसी स्टॉक, आईपीएस और क्वांटिटेटिव फंड जैसे शीर्षक दिखाए जाते थे.
उनके अनुसार, इसके बाद ठगों ने जल्द लॉन्च होने वाले आईपीओ में निवेश के मौके पेश किए. पोर्टल की आंतरिक व्यवस्था इस तरह की गई थी कि जैसे-जैसे जमा राशि बढ़े, निवेशक ज्यादा शेयर ले सकें. ग्रुप का दावा था कि वे बहुत कम कीमत पर शेयर दिला रहे हैं.
चहल ने ‘वर्मा’ से आईपीओ में भारी छूट को लेकर बहस की. उन्होंने कहा कि एंकर निवेशकों को भी इतनी कम कीमत नहीं मिलती, जो आमतौर पर संस्थागत निवेशक होते हैं. इसके जवाब में ‘वर्मा’ ने कहा कि डीबीएस बैंक जैसे बड़े संस्थागत निवेशकों के लिए कीमतें हमेशा तय की जा सकती हैं.
इसी दौरान चहल को शक हुआ कि कोई वर्मा बनकर धोखाधड़ी कर रहा है. उन्होंने ग्रुप के कुछ सदस्यों को इसकी जानकारी भी दी.
जब उन्होंने 5 करोड़ रुपये निकालने की कोशिश की, तो उनसे मूल राशि का 1.5 प्रतिशत और मुनाफे पर 3 प्रतिशत टैक्स जमा करने को कहा गया, जो कुल 2.25 करोड़ रुपये बनता था. चहल ने बताया कि उन्होंने दोस्तों से उधार लेकर यह रकम जमा की.
इसके बाद भी मांगें जारी रहीं. चहल के मुताबिक, उनसे 20 लाख रुपये प्रीमियम मेंबरशिप के लिए मांगे गए और बाद में निवेश की गई रकम जल्दी निकालने के लिए 10 लाख रुपये की रिश्वत देने के लिए मजबूर किया गया.
अगर आप सुसाइडल महसूस कर रहे हैं या डिप्रेशन में हैं, तो कृपया अपने राज्य के हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करें.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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