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Tuesday, 24 March, 2026
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31 मार्च की डेडलाइन से पहले, बस्तर का आखिरी माओवादी कमांडर छत्तीसगढ़ पुलिस के सामने करेगा सरेंडर

पापा राव का सरेंडर सशस्त्र माओवादी आंदोलन के इतिहास और दंडकारण्य क्षेत्र में उसकी मौजूदगी के लिए एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है, जिसे कभी प्रतिबंधित संगठन का गढ़ माना जाता था.

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नई दिल्ली: देश से वामपंथी उग्रवाद खत्म करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा तय 31 मार्च की समयसीमा से ठीक एक हफ्ता पहले, बस्तर का आखिरी सक्रिय माओवादी कमांडर मंगलवार को छत्तीसगढ़ पुलिस के सामने सरेंडर करने वाला है.

इस कमांडर की पहचान सुनम चंद्रैया के रूप में हुई है, लेकिन पुलिस रिकॉर्ड में वह पापा राव के नाम से जाना जाता है. वह कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओवादी) के दंडकारण्य क्षेत्र में बचा आखिरी माओवादी कमांडर है.

इंटेलिजेंस और पुलिस सूत्रों ने दिप्रिंट को बताया कि पापा राव, जो स्टेट जोनल कमेटी मेंबर (SZCM) और पश्चिम बस्तर डिवीजन का प्रभारी है, उसका सरेंडर प्रतिबंधित संगठन के सशस्त्र संघर्ष के लिए आखिरी बड़ा झटका साबित हो सकता है.

छत्तीसगढ़ पुलिस के एक सूत्र ने नाम न बताने की शर्त पर दिप्रिंट को बताया, “तैयारी पहले ही हो चुकी है और अब उसका सरेंडर सिर्फ औपचारिकता है. जब तक कोई बड़ा बदलाव नहीं होता, पापा राव अपने हथियार डालकर वरिष्ठ अधिकारियों के सामने सरेंडर करेगा और मुख्यधारा में शामिल हो जाएगा.”

सूत्रों ने बताया कि बस्तर के पड़ोसी सुकमा जिले का रहने वाला पापा राव इंद्रावती नेशनल पार्क इलाके में सक्रिय था, लेकिन अब उसके साथियों की संख्या बहुत कम रह गई है.

जब पूछा गया कि क्या पापा राव ने सच में सरेंडर की पुष्टि कर दी है, तो बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पट्टिलिंगम ने कहा कि प्रतिबंधित संगठन के बचे हुए भूमिगत कैडर के पास अब ज्यादा विकल्प नहीं बचे हैं.

बस्तर आईजी ने कहा, “उनके पास ज्यादा रास्ते नहीं बचे हैं. अब समय है कि वे सामने आएं, सरेंडर करें और सरकार की सरेंडर और पुनर्वास नीति का फायदा उठाएं.”

मंगलवार को पापा राव का संभावित सरेंडर सशस्त्र माओवादी आंदोलन के इतिहास और दंडकारण्य क्षेत्र में उसकी मौजूदगी के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है, जिसे कभी प्रतिबंधित संगठन का गढ़ माना जाता था.

माओवादी 1980 के दशक की शुरुआत में आंध्र प्रदेश पुलिस के लगातार ऑपरेशन के कारण इस क्षेत्र में आए थे. छत्तीसगढ़ पुलिस और खुफिया एजेंसियों के सूत्रों ने कहा कि राव इस इलाके में सुरक्षा बलों पर हुए कई बड़े नक्सली हमलों की योजना बनाने में अहम भूमिका निभा चुका है.

छत्तीसगढ़ पुलिस के एक अधिकारी ने दिप्रिंट को बताया, “वह पूर्व DKSZC सचिव रवुला श्रीनिवास उर्फ रमन्ना का करीबी सहयोगी था, जो इस क्षेत्र के सबसे निर्दयी माओवादी नेताओं में से एक था और जिसने गुरिल्ला रणनीति और IED का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करके जंगलों में अपना नियंत्रण बनाए रखा.”

छत्तीसगढ़ पुलिस के सूत्रों ने कहा कि राव दो बड़े झटकों के कारण कमजोर हुआ: इस साल जनवरी में उसके करीबी सहयोगी दिलीप बेडजा की मौत, जो लॉजिस्टिक्स और स्थानीय सहयोग संभालता था, और पिछले साल नवंबर में उसकी पत्नी उर्मिला की मौत, जो दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) की सदस्य थी.

बेडजा की मौत बीजापुर में सुरक्षा बलों और माओवादी कैडर के बीच मुठभेड़ में हुई थी, जिसमें उस समय राव भी मौजूद था. हालांकि, वह बिना घायल हुए वहां से बच निकला था.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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