नयी दिल्ली, 20 फरवरी (भाषा) भारत ने शुक्रवार को फलस्तीन मुद्दे के ‘दो-राष्ट्र’ समाधान के लिए अपना समर्थन दोहराते हुए कहा कि 100 से अधिक देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ मिलकर उसने एक बयान जारी कर वेस्ट बैंक में अवैध बस्तियों के विस्तार के इजराइल की कोशिशों की निंदा की है।
लगभग 80 देशों और संगठनों द्वारा समर्थित प्रारंभिक बयान में भारत का जिक्र नहीं था। फलस्तीन के संयुक्त राष्ट्र दूत रियाद मंसूर ने मंगलवार को यह बयान जारी किया था।
एक नए बयान में भारत और लगभग 20 देशों और संगठनों ने ‘दो राष्ट्र’ समाधान का समर्थन किया।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल से जब साप्ताहिक संवाददाता सम्मेलन में पूछा गया कि भारत प्रारंभिक बयान का हिस्सा क्यों नहीं था, तो उन्होंने कहा कि देशों और संगठनों द्वारा उस तरह से दस्तावेज पर बातचीत नहीं की गई थी जैसा सामान्य तौर पर होता आया है।
उन्होंने कहा, ‘‘इस विशेष मुद्दे पर हमारा रुख हाल ही में भारत-अरब लीग के मंत्रिस्तरीय संयुक्त वक्तव्य में व्यक्त किया गया था।’’
जायसवाल ने कहा कि नयी दिल्ली में 31 जनवरी को आयोजित भारत-अरब लीग की बैठक में इजरायल के साथ-साथ रहने वाले एक संप्रभु और व्यवहार्य फलस्तीनी राष्ट्र के लिए जोर दिया गया, साथ ही प्रासंगिक संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों और अरब शांति पहल के अनुरूप ‘‘ पश्चिम एशिया में न्यायपूर्ण, व्यापक और स्थायी शांति’’ का आह्वान किया गया।
एक संयुक्त बयान में, दोनों पक्षों ने 1967 की सीमाओं पर आधारित एक संप्रभु, स्वतंत्र और व्यवहार्य फलस्तीनी राज्य की स्थापना का आह्वान किया, जो इजराइल के साथ शांतिपूर्वक सह-अस्तित्व में रहे। दोनों पक्षों ने फलस्तीनी लोगों के अविभाज्य अधिकारों का समर्थन किया।
जायसवाल ने कहा कि संयुक्त बयान में उल्लिखित स्थिति के अनुरूप, भारत ने ‘बयान में उठाए गए मुद्दों’ को ध्यान में रखते हुए फलस्तीनी पहल का समर्थन किया।
एक अन्य प्रश्न के उत्तर में, जायसवाल ने कहा कि भारत ने 19 फरवरी को वाशिंगटन में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नीत शांति बोर्ड की बैठक में एक ‘पर्यवेक्षक’ के रूप में हिस्सा लिया था।
उन्होंने कहा, ‘‘भारत ने वाशिंगटन में आयोजित शांति बोर्ड की बैठक में पर्यवेक्षक के रूप में हिस्सा लिया। भारत ने राष्ट्रपति ट्रंप की गाजा शांति योजना पहल और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2803 के तहत चल रहे प्रयासों का समर्थन किया है।’’
भाषा धीरज अविनाश
अविनाश
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