तिरुवनंतपुरम, छह मार्च (भाषा) केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच खाड़ी देशों में फंसे भारतीयों को वापस लाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है।
प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में विजयन ने कहा कि कई प्रवासी भारतीय खाड़ी देशों में फंसे हुए हैं और वहां से भारत लौटने के लिए पर्याप्त तथा किफायती उड़ानों की कमी के कारण उन्हें गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार को विमान संचालकों और एयरलाइन कंपनियों के साथ तत्काल बातचीत कर भारत के प्रमुख गंतव्यों, विशेषकर दूसरे दर्जे के शहरों के लिए उड़ान सेवाएं फिर से शुरू कराने और बढ़ाने के लिए कदम उठाने चाहिए।
उन्होंने सुझाव दिया कि विदेश स्थित भारतीय मिशनों या एक समर्पित ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से एक केंद्रीकृत पंजीकरण प्रणाली बनाई जाए, ताकि सबसे अधिक जरूरतमंद लोगों की पहचान कर उन्हें प्राथमिकता के आधार पर स्वदेश लाया जा सके। इनमें बीमार, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं, बच्चे और आर्थिक संकट से जूझ रहे लोग शामिल हैं।
विजयन ने यह भी कहा कि इन व्यवस्थाओं की जानकारी राज्य सरकारों को दी जानी चाहिए, ताकि लौटने वाले लोगों के स्वागत और आगे की सहायता के लिए आवश्यक इंतजाम किए जा सकें।
उन्होंने प्रधानमंत्री का ध्यान इस ओर भी दिलाया कि कुछ उड़ान संचालक खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के सदस्य देशों से भारत के लिए चार्टर्ड उड़ानों के टिकट सामान्य किराए से कई गुना अधिक कीमत पर बेच रहे हैं, जिससे कई प्रवासियों के लिए यात्रा करना मुश्किल हो गया है। मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से संकट की इस घड़ी में टिकट दरों को नियंत्रित करने के लिए एयरलाइन कंपनियों से सक्रिय रूप से बातचीत करने का आग्रह किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में ऐसे भारतीय भी हैं जो पर्यटक या विजिट वीजा पर वहां गए थे और उनकी वापसी भी समन्वित तरीके से सुनिश्चित की जानी चाहिए।
इसके अलावा कई भारतीय यात्री ऐसे भी हैं जो दुबई, अबू धाबी, दोहा और कुवैत जैसे खाड़ी हवाई अड्डों को ट्रांजिट हब के रूप में इस्तेमाल करते हुए अन्य देशों की यात्रा कर रहे थे, लेकिन अचानक उड़ानें रद्द होने और हवाई क्षेत्र बंद होने के कारण बीच रास्ते में ही फंस गए हैं।
विजयन ने कहा कि इन ट्रांजिट यात्रियों के लिए अलग से हेल्पलाइन या पंजीकरण प्रणाली बनाई जानी चाहिए, क्योंकि वे बिना सामान, ठहरने की व्यवस्था या स्थानीय संपर्क के दूसरे देशों में फंसे हुए हैं।
मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में प्रधानमंत्री से इस मामले में जल्द से जल्द हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है।
भाषा मनीषा वैभव
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