Saturday, 4 December, 2021
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वीडियो कॉल, कैमरों से लैस आर्मी डॉग, बंद कमरे: क्या है हैदरपोरा मुठभेड़ की इनसाइड स्टोरी

एक फर्जी मुठभेड़ में निर्दोष नागरिकों के मारे जाने के आरोपों के जवाब में शीर्ष सुरक्षा सूत्रों का कहना है कि यह मुठभेड़ इमारत को घेरने वाले सुरक्षा बलों पर गोलीबारी के बाद हुई.

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श्रीनगर: श्रीनगर के हैदरपोरा में इस महीने के शुरू में हुई एक विवादास्पद मुठभेड़ के दौरान मारे गए दो नागरिक—डॉ. मुदस्सिर गुल, अल्ताफ अहमद भट्ट—और लश्कर-ए-तैयबा का एक कथित सहयोगी आमिर अहमद उस इमारत में सुरक्षा बलों के ‘साथ’ नहीं गए थे, जहां गोली लगने से उनकी मौत हुई. दिप्रिंट को मिली जानकारी में यह बात सामने आई है.

व्यापक स्तर पर लग रहे इन आरोपों कि यह एक फर्जी मुठभेड़ थी जिसमें निर्दोष नागरिक मारे गए, के जवाब में एक शीर्ष सुरक्षा सूत्र ने दिप्रिंट को बताया कि फायरिंग उन सुरक्षा बलों के साथ शुरू हुई जो बाहर थे और जिन्होंने इमारत को घेर रखा था.

पूर्व में पुलिस ने पहले दावा किया था कि तीनों इमारत में आतंकवादियों का पता लगाने के लिए तलाशी दस्ते के साथ गए थे. लेकिन सूत्रों ने दिप्रिंट को बताया कि तीनों ‘अपने हाथ में एक फोन लेकर अंदर गए और दो उन दो कमरों को खोलने गए थे जो जो बंद थे और ऑपरेशन हेड के साथ वीडियो कॉल पर थे.’

सुरक्षा प्रतिष्ठान से जुड़े शीर्ष सूत्र के मुताबिक, पुलिस और सेना ने उस इमारत के अंदर एक भी गोली नहीं चलाई, जहां एक संदिग्ध पाकिस्तानी आतंकी बिलाल भाई कथित तौर पर छिपा हुआ था, और वास्तव में ‘वीडियो कॉल के जरिये बाहर जारी तलाशी अभियान पर नजर रखे हुए था.’

सूत्रों ने बताया, मुठभेड़ ‘इमारत के मुख्य दरवाजे पर हुई’ जब आमिर, अल्ताफ और बिलाल भाई बाहर निकल रहे थे. जब दिप्रिंट ने घटनास्थल का दौरा किया तो पाया कि पहली मंजिल की खिड़कियों पर गोलियों के निशान थे, लेकिन दूसरी मंजिल के कमरों या मुख्य दरवाजे और उसके आसपास की दुकानों पर कोई गोलियों का कोई निशान नहीं था, उस समय बंद थीं.

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सूत्रों ने यह भी दावा किया कि डॉ. मुदस्सिर गुल को पुलिस की गोली नहीं लगी थी और उनका शव ऑपरेशन खत्म होने के बाद इमारत की दूसरी मंजिल पर अटारी के नीचे मिला जहां बिलाल छिपा हुआ था.

सूत्रों ने कहा कि असल में ऑपरेशन प्रमुख को मुदस्सिर का शव खोजने और यह सुनिश्चित करने कि लिए कि इमारत में कोई और छिपा न हो कैमरे से लैस सेना के हमलावर कुत्तों को लाना पड़ा था.

पुलिस का दावा है कि पूरी मुठभेड़ इमारत के ठीक सामने सड़क के उस पार टाटा मोटर्स के शोरूम के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरों में और इमारत के अंदर लगे कैमरों में रिकॉर्ड हो गई है.

यद्यपि पुलिस ने दावा किया कि उसने इन तीनों लोगों को ‘मानव ढाल के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया था’ बल्कि ये सुरक्षा बलों के बाहर रहने के दौरान खुद ही अंदर चले गए थे. गौरतलब है कि अल्ताफ के परिवार ने इस पर सवाल उठाया है कि पुलिस ने तीन नागरिकों को उस इमारत के अंदर क्यों भेजा जहां एक आतंकवादी के छिपे होने का संदेह था. परिवार का कहना है, यह नागरिकों का ‘चारे’ की तरह इस्तेमाल किए जाने से कम नहीं है.

दिप्रिंट ने विवादास्पद हैदरपोरा मुठभेड़ का खुलासा करने वाली तमाम कड़ियों को जोड़ा और यह बताने की कोशिश की है कि इसमें दो नागरिकों समेत चार लोगों कैसे मारे गए.


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इमारत ‘सुरक्षित’ थी, पुलिस और सेना को ऑपरेशन बंद करना पड़ा

15 नवंबर को शाम के लगभग पांच बजे थे जब जम्मू-कश्मीर पुलिस, भारतीय सेना और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवान ‘क्षेत्र में आतंकियों की मौजूदगी’ की खुफिया सूचनाओं के बाद हैदरपोरा के बाजार क्षेत्र में पहुंचे.

इलाके की घेराबंदी की गई और सभी दुकानदारों को पास के एक शोरूम में भेज दिया गया, जिसके बाद पुलिस ने परिसर की तलाशी शुरू की.

सूत्रों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा की गई पहली तलाशी में पुलिस कर्मियों ने इमारत को ‘क्लियर और सेफ’ पाया.

भूतल पर चार से पांच दुकानें हैं, जबकि पहली मंजिल पर एक कॉल सेंटर, एक दफ्तर, एक छोटा रेस्ट रूम, आईटी सोल्यूशन्स वाली दुकान और दो वॉशरूम हैं. दफ्तर और आईटी सोल्यूशन्स की दुकान पर ताला लगा दिया गया था लेकिन इमारत के अंदर कोई नहीं मिला.

दूसरी मंजिल पर तीन कमरे हैं, जो सभी खाली थे.

उसके बाद एक और जांच के लिए सेना अंदर गई. उन्होंने भी परिसर की जांच की और साफ किया कि ‘इमारत सुरक्षित है.’

एक सूत्र ने कहा, ‘हम यह सोचकर ऑपरेशन बंद करने वाले थे कि इनपुट गलत था. चूंकि पुलिस और सेना दोनों इमारत की जांच की जांच कर चुकी थीं, इसलिए टीम लौटने वाली थी. तभी ऑपरेशनल हेड ने कहा कि जिन दो कमरों में ताला लगा था, उन्हें भी खोलकर चेक किया जाना चाहिए.’

सूत्र के मुताबिक, ऑपरेशन हेड ने तब सुरक्षा बलों से भवन के मालिक और केयरटेकर के बारे में पूछताछ करने को कहा, जिनके पास उन दो कमरों की चाबियां होंगी.

सूत्र ने कहा, ‘हमें बताया गया था कि आमिर के पास चाबी होगी. हमें अपने सूत्रों से आमिर के बारे में कुछ जानकारी मिली थी लेकिन यह नहीं पता था कि वह केयरटेकर है. तब आमिर को बुलाया गया.ट

शाम करीब छह बजे इमारत के मालिक अल्ताफ, मुदस्सिर—जिन्होंने पहली मंजिल किराये पर ली थी, जहां संदिग्ध कॉल सेंटर चल रहा था—और अन्य दुकानदारों के साथ मौजूद आमिर को इमारत में बुलाया गया था.

सूत्रों ने कहा कि तीनों लोगों की तलाशी ली गई और आमिर को अपना फोन दिखाने को कहा गया, क्योंकि वह उसकी जेब में नहीं था.

सूत्र ने कहा कि आमिर ने संबंधित अधिकारी से कहा कि उसके पास फोन नहीं है और यह इमारत के अंदर होना चाहिए. तभी टीम को शक हुआ.

दिलचस्प बात यह है कि जब घेरेबंदी की जा रही थी, पुलिस ने आमिर की तलाशी ली थी. लेकिन एक पुलिस अधिकारी ने जब अपने सहयोगी को बताया कि वह उसे जानता है, तो उसे छोड़ दिया गया.

सूत्र ने कहा, ‘हमें शक हुआ जब उसने कहा कि उसके पास उसका फोन नहीं है. फिर उसने उसे अंदर जाकर लाने की बात कही. हमने उसे एक फोन दिया, उसे एक वीडियो कॉल पर रखा, ताकि हम देख सकें कि अंदर क्या है और उसे अंदर जाकर हमें दिखाने के लिए कहा और यह भी दिखाया कि उसका फोन कहां पड़ा था. वह अंदर गया, हमें इधर-उधर दिखाया लेकिन अपने फोन के बिना वापस आ गया. उसने कहा कि वह इसे नहीं ढूंढ सका और यह दो बंद कमरों में से एक के अंदर होना चाहिए. इसी ने हमारे संदेह को और मजबूत किया.’

सूत्र ने कहा, ‘हां, आमिर को शुरू में छोड़ दिया गया क्योंकि एक पुलिसकर्मी बताया था कि वह उसे पहले से जानता है और कहा कि वह इमारत में काम करता है. हालांकि, उसे तब वापस बुलाया गया जब हमें पता चला कि वह पहली मंजिल का केयरटेकर है, जहां मुदस्सिर कॉल सेंटर चला रहा था.’

‘स्वेच्छा से अंदर गए’

सूत्रों ने बताया कि जब आमिर के फोन की तलाश की जा रही थी, इमारत के मालिक अल्ताफ ने मुदस्सिर को अपने साथ आने और ‘सुरक्षा बलों के संतोष’ के लिए उन दोनों कमरों को खोलकर जांच कर लेने देने को कहा.

सूत्र ने बताया, ‘अल्ताफ ने मुदस्सिर को दोनों कमरे चेक करा देने को कहा ताकि यह तलाशी पूरी हो सके. वह इस बात को लेकर निश्चिंत नजर आ रहे थे कि इमारत क्लियर थी.’

मुदस्सिर को फिर वीडियो कॉल पर लिया गया और तीनों लोग इमारत के अंदर चले गए.

सूत्र के मुताबिक, मुदस्सिर ने अपने कॉल सेंटर, अलमीरा समेत सभी कमरों को वीडियो कॉल पर दिखाया. वह अंदर लगे सीसीटीवी कैमरों में बंद कमरे भी नजर आ रहे हैं, जिसकी फुटेज पुलिस को मिली है.

सूत्र ने बताया वीडियो कॉल के सिर्फ 10 मिनट बाद ही मुदस्सिर का फोन बंद हो गया. इसके बाद सुरक्षा कर्मियों ने इस आशंका में मोर्चा संभाल लिया कि कहीं कुछ गलत हो गया होगा और हो सकता है कि मुदस्सिर और अन्य लोगों को अंदर छिपे आतंकवादियों ने ‘बंधक बना लिया’ हो.

सूत्र के मुताबिक, तब बाहर मौजूद कर्मियों ने तीनों लोगों को बाहर आने के लिए कहा और दो मिनट की शांति के बाद शाम करीब 6:20 बजे दूसरी मंजिल से दो गोलियों की आवाज सुनाई दी. तब तक अंधेरा हो चुका था.’

सूत्र ने बताया, ‘दो गोलियां चलीं और कुछ देर बाद एक और गोली की आवाज आई. हम सबने पोजीशन ली और पांच-छह सेकेंड के बाद हमने देखा कि पहली मंजिल पर कोई जा रहा है. हमने फायरिंग शुरू कर दी. कुछ ही सेकंड में हमने देखा कि दो आदमी प्रवेश द्वार से बाहर आ रहे हैं. एक शख्स के हाथ में पिस्टल थी और वो फायरिंग कर रहा था. तभी ऑपरेशन शुरू हुआ.’

सूत्र ने कहा, ‘नागरिकों के परिवार भले ही यह दावा कर हैं कि उन्हें मानव ढाल के तौर पर इस्तेमाल किया गया था, लेकिन कोई भी कर्मी उन्हें ढाल बनाकर इमारत के अंदर नहीं गया था. वे स्वेच्छा से अंदर गए थे.’

दिप्रिंट से बातचीत में अल्ताफ की भतीजी साइमा ने पूछा कि कैसे पुलिस ने तीन नागरिकों को बिना किसी सुरक्षा उपकरण के इमारत के अंदर एक आतंकवादी का सामना करने के लिए भेज दिया?

उसने कहा, ‘आप तीन नागरिकों को बिना सुरक्षा व्यवस्था के कैसे अंदर भेज सकते हैं जबकि जानते हैं कि घर में एक आतंकवादी है. एक आम आदमी जो ऑपरेशन के बारे में कुछ नहीं जानता, अगर कुछ गलत हो जाता है तो वह खुद को कैसे बचाएगा? पुलिस का दावा हो सकता है कि उन्होंने नागरिकों को मानव ढाल के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया, लेकिन उन्हें ऐसे चारे की तरह इस्तेमाल करना बदतर और अमानवीय है.’

उसने यह भी कहा कि रॉयल एनफील्ड शोरूम, जहां सभी दुकानदार एकत्र थे, में मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों ने उन्हें बताया कि अल्ताफ और मुदस्सिर को तीन बार इमारत के अंदर ले जाया गया था.

उन्होंने कहा, ‘अगर वे स्वेच्छा से अंदर गए थे तो प्रत्यक्षदर्शियों ने ऐसा क्यों कहा कि उन्हें तीन बार इमारत के अंदर ले जाया गया? अल्ताफ कैसे घायल हुए? इन सभी सवालों का जवाब कौन देगा?’

‘पिस्तौल से फायरिंग करते हुए निकला पाक आतंकी’

सूत्र के अनुसार, जैसे ही सुरक्षा बलों ने देखा कि ‘वो लोग गेट से बाहर आ रहे हैं और एक के पास पिस्तौल है’ उन्होंने गोलियां चला दी.

इस दौरान मौके पर ही सबसे पहले आमिर की मौत हो गई. सूत्रों ने दावा किया कि उसके हाथ में पिस्टल थी. सूत्र ने बताया, ‘फिर, अल्ताफ पीछे आया जो निहत्था था.’ साथ ही स्वीकारा कि ‘ऑपरेशन में ये जोखिम’ होते हैं.

सूत्र ने बताया, ‘हमने गोलियों की आवाज सुनी. फिर फायरिंग शुरू हो गई. इमारत से बाहर आने वाले पहले व्यक्ति के पास पिस्तौल थी, इसलिए हमने गोली चलाई. हो सकता है कि अल्ताफ, जो निहत्था था, पूरी तरह से निर्दोष हो और बस गोलीबारी में फंसकर मारा गया, लेकिन यह जांच में ही स्पष्ट हो पाएगा. जिस वक्त हमने फायरिंग की उस वक्त अंधेरा होने के कारण हम किसी की पहचान नहीं पाए. उनके मरने के बाद ही हमें पता चला कि वे आमिर और अल्ताफ थे. फायरिंग शुरू होने कुछ ही सेकंड के भीतर, जब दो लोग मारे गए तब बिलाल भाई कथित तौर पर पिस्तौल का इस्तेमाल कर अंधाधुंध फायरिंग करते हुए इमारत से बाहर आया.

उन्होंने कहा, ‘पिस्तौल पर उसकी इतनी अच्छी पकड़ थी कि वह एके-47 से लैस सुरक्षा कर्मियों पर फायरिंग कर रहा था. वह इमारत से निकल कर सड़क पर आ गया. उसे गोली मार दी गई और वह इमारत से महज 20 मीटर दूर सड़क पर गिरा.’

सूत्र ने बताया कहा कि उसका शव फिर पीसीआर में ले जाया गया और आमिर का फोन, जिसे वह तलाश रहा था, बिलाल की जेब से बरामद हुआ.

साइमा ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाया. उसने कहा, ‘हम यहां लोगों की जिंदगी की बात कर रहे हैं. क्या यह नहीं हो सकता कि वे उस आतंकवादी से अपनी जान बचाने के लिए बाहर निकले हों? क्या वे केवल पुलिस की गोलियां खाने के लिए निकले थे. क्या गोली चलाने से पहले देखना नहीं चाहिए था? क्या उन्हें गिरफ्तारी की कोशिश नहीं करनी चाहिए थी? क्या जान बचाना पुलिस की प्राथमिकता नहीं होनी चाहिए?’

उसने आगे कहा, ‘और यह सब तब हुआ जब पुलिस और सेना को पता था कि तीन नागरिकों को अंदर भेजा गया है.’

कैमरे से लैस आर्मी डॉग अंदर भेजे गए—मुदस्सिर की तलाश की

बिलाल, अल्ताफ और आमिर, इन तीनों लोगों की मुठभेड़ में मौत के बाद मुदस्सिर की तलाश शुरू हुई. चूंकि वह इमारत से बाहर नहीं आया था, इसलिए सुरक्षा बलों को लगा कि शायद उसे किसी अन्य विदेशी आतंकवादी ने बंधक बना लिया है.

सूत्र ने कहा, ‘मुदस्सिर इमारत के अंदर गया लेकिन वापस नहीं लौटा. इसके अलावा, हमने अंदर से गोलियों की आवाज सुनी थी. इसलिए हमें लगा कि शायद उसे अंदर छिपे किसी अन्य विदेशी आतंकी ने बंधक बना लिया है.’

रात करीब 10 बजे कैमरे से लैस आर्मी डॉग को बिल्डिंग के अंदर भेजा गया. सूत्र ने बताया कि कुत्ते को बाहर से निर्देश दिया जा रहा था वह एक कमरे से दूसरे कमरे में जा रहा था और सेना बाहर से हर चीज पर नजर रख रही थी.

कुत्ता जब दूसरी मंजिल पर पहुंचा तो कैमरे में मुदस्सिर का शव फर्श पर पड़ा नजर आया. सेना तब भी अंदर नहीं गई, यह सोचकर कि कई और हथियारबंद लोग अंदर छिपे हो सकते हैं.

चित्रण: सोहम सेन/ दिप्रिंट

सूत्र ने बताया, ‘कैमरे वाला कुत्ता मुदस्सिर का शव नजर आने के बाद करीब आधे घंटे तक इधर-उधर घूमता रहा, लेकिन साफ नजर आया कि इमारत में कोई और नहीं दिख रहा. हालांकि, यह सुनिश्चित करने के लिए कि सेना के एक हमलावर कुत्ते को बुलाया गया और अंदर भेज दिया गया.’

सूत्र ने कहा, ‘हमलावर कुत्तों को कहीं भी छिपे हुए किसी भी जीवित इंसान को बाहर निकालने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है.’

हमलावर कुत्ता भी अंदर गया, इधर-उधर घूमता रहा लेकिन कुछ पता नहीं चला. कुत्ते के लौटने के बाद एक रूम इंटरवेंशन टीम अंदर गई और रात करीब 12 बजे मुदस्सिर का शव बरामद किया गया.

सूत्र ने बताया, ‘इसके बाद टीम ने दूसरी मंजिल पर ठिकाने, जो दो कमरे बंद थे, सहित सभी जगहों की तलाशी ली और फिर इमारत को क्लियर कर दिया. इसके बाद औपचारिक रूप से ऑपरेशन खत्म हुआ.’

मुदस्सिर के घाव अलग तरह के, सीसीटीवी में सब कुछ रिकॉर्ड

मुदस्सिर के परिवार ने जहां यह दावा किया है कि उसे मानव ढाल के तौर पर इस्तेमाल किया गया था, सुरक्षा प्रतिष्ठान से जुड़े सूत्र ने कहा कि वह पुलिस की गोली से नहीं मरा क्योंकि मुठभेड़ खत्म होने के काफी देर बाद उसका शव दूसरी मंजिल पर मिला था. इसके अलावा, मुदस्सिर की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में उसके चेहरे पर चोट के निशान भी दिखाई दे रहे हैं, जिससे पता चलता है कि गोली मारने से पहले उसे पीटा गया था.

सूत्र ने कहा, ‘मुदस्सिर इमारत से बाहर आया ही नहीं था और बहुत पहले ही मर चुका था. डॉक्टर का मानना है कि उसके शरीर में लगी गोलियों के घाव आमिर, अल्ताफ और बिलाल से अलग हैं, जो पुलिस की गोलियों से मारे गए थे. मुदस्सिर की ऑटोप्सी से यह भी पता चला कि उसके दाहिने गाल पर कुछ चोटें हैं जो हाथापाई का संकेत है कि उसे पीटा गया था. संभव है कि जब वह वीडियो कॉल पर फोन लेकर अंदर गया था इसलिए बिलाल ने उसे पीटा हो.’

पुलिस सूत्र ने यह भी कहा कि उनके पास डिजिटल सबूत और फुटप्रिंट हैं जो बताते हैं कि इमारत के बाहर क्या हुआ था, जिसमें टाटा मोटर्स के शोरूम के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज भी शामिल हैं, जो मुठभेड़ स्थल के ठीक सामने स्थित है और उसमें सब कुछ रिकॉर्ड है.

सूत्र ने कहा, ‘इसके अलावा हमारे पास अंदर के सीसीटीवी फुटेज भी हैं जब आमिर को उसका फोन खोजने के लिए भेजा था या जब अल्ताफ, मुदस्सिर और आमिर एक साथ अंदर गए थे. सीसीटीवी से पता चलता है कि न तो सेना और न ही पुलिस इमारत में घुसी और इमारत के अंदर कोई गोली नहीं चलाई गई.

पुलिस अब फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी की रिपोर्ट का इंतजार कर रही है, जिसके बारे में उसका कहना है कि यही पूरे घटनाक्रम की पुष्टि कर पाएगी.

(इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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