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Monday, 26 February, 2024
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उत्तरकाशी टनल हादसा: ड्रिलिंग में अब सेना भी हुई शामिल, इंजीनियर रेजिमेंट के 30 जवान मौके पर पहुंचे

बचाव कार्य में तेजी लाने के लिए इंजीनियर रेजिमेंट के 30 जवान मौके पर पहुंच गए हैं. मैनुअल ड्रिलिंग के लिए भारतीय सेना नागरिकों के साथ मिलकर सुरंग के अंदर रैट बोरिंग करेगी.

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नई दिल्ली: भारतीय सेना के कोर ऑफ इंजीनियर्स के एक इंजीनियर समूह मद्रास सैपर्स की एक इकाई को उत्तरकाशी की सिल्क्यारा सुरंग में उस स्थान पर मैनुअल ड्रिलिंग के लिए बुलाया गया है, जहां पिछले 15 दिनों से 41 श्रमिक फंसे हुए हैं. बचाव कार्य में तेजी लाने के लिए इंजीनियर रेजिमेंट के 30 जवान मौके पर पहुंच गए हैं. मैनुअल ड्रिलिंग के लिए भारतीय सेना नागरिकों के साथ मिलकर सुरंग के अंदर रैट बोरिंग करेगी.

सेना के एक अधिकारी ने कहा, “मैनुअल ड्रिलिंग करने के लिए भारतीय सेना नागरिकों के साथ मिलकर हाथ, हथौड़े और छेनी जैसे हथियारों से सुरंग के अंदर के मलबे को खोदेगी और फिर पाइप के अंदर बने प्लेटफॉर्म से आगे बढ़ाया जाएगा.”

अधिकारी ने आगे बताया कि सुरंग के अंदर 41 लोग सुरक्षित और स्थिर हैं. बचाव स्थल पर आज सुबह ही हैदराबाद से प्लाज्मा कटर पहुंचा और पाइप लाइन में फंसी मशीन को काटना शुरू किया.

एक अधिकारी ने बताया कि अगर शाम तक अमेरिकन ऑगर मशीन को प्लाज्मा कटर के जरिए पाइपलाइन से हटा दिया जाए तो सुरंग का काम 15 घंटे में पूरा हो सकता है.

अधिकारियों ने यह भी बताया कि बचाव अभियान में जुटी रेस्क्यू टीम ने अब तय किया है कि मैनुअल ड्रिलिंग के जरिए थोड़ी-थोड़ी दूरी पर खुदाई करके पाइपलाइन को आगे भेजा जाएगा.

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उन्होंने कहा, “अगर इस प्रक्रिया में कोई रुकावट आती भी है तो उस समस्या को मैन्युअल रूप से हल किया जाएगा और पाइपलाइन को कुछ दूरी तक आगे भेजा जाएगा.”

साथ ही यहां फंसे 41 श्रमिकों को बाहर निकालने के लिए चल रहे बचाव अभियान की निगरानी के लिए विशेषज्ञों द्वारा ड्रोन कैमरों का उपयोग किया जा रहा है.

इस बीच, केंद्रीय मंत्री जनरल वीके सिंह रविवार को सिल्क्यारा सुरंग स्थल पर पहुंचे, जहां फंसे श्रमिकों को बाहर निकालने के लिए बचाव अभियान चल रहा है.

12 नवंबर को सुरंग का एक हिस्सा धंसने के बाद, सुरंग के सिल्क्यारा किनारे पर 60 मीटर के हिस्से में गिरे मलबे के कारण 41 मजदूर निर्माणाधीन ढांचे के अंदर फंस गए.


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