Friday, 12 August, 2022
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सीएए प्रदर्शन के बाद ‘पुलिस कार्रवाई’ पर मुजफ्फरनगर के लोग बोले- 2013 के दंगे में भी ऐसा डर नहीं था

नागरिकता कानून के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन के दौरान मस्जिदों, घरों में तोड़-फोड़ ने लोगों में डर पैदा किया है, जबकि पुलिस का कहना है कि दंगा करने वाले ही डरें.

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मुजफ्फरनगर: पिछले सप्ताह नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान भड़की हिंसा के सिलसिले में मुजफ्फरनगर में और गिरफ्तारियां होंगी, इस विरोध प्रदर्शन में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी.

अब तक 48 लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं और वे न्यायिक हिरासत में हैं.

मुजफ्फरनगर के पुलिस अधीक्षक सतपाल अंतिल ने दिप्रिंट से कहा और भी गिरफ्तारियां होंगी. हम अपने वीडियो फुटेज के साथ-साथ पत्रकारों के सबूतों के आधार पर इन गिरफ्तारियों को आधार बना रहे हैं.

लोगों को दंगा, हत्या और शांति भंग करने का प्रयास सहित अन्य अपराधों के आरोपी बनाया गया है.

इस बीच डर ने मुजफ्फरनगर के निवासियों को जकड़ लिया है क्योंकि उन्हें लगता है कि वे अगले अपराधी हो सकते हैं.

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‘पता नहीं पुलिस मेरे पिता और भाइयों को कहां ले गई’

निवासियों ने पुलिस द्वारा मनमानी कर की गई गिरफ्तारी की शिकायत की है.

शुक्रवार की नमाज के बाद हुई हिंसा में 26 वर्षीय युवक नौशाद घायल हो गया, जिसके बाद उसे पास के अस्पताल ले जाया गया. नौशाद के परिवार के चार सदस्य उस समय उनसे मिलने गए थे जब पुलिस अस्पताल पहुंची और नौशाद के साथ उन सभी को गिरफ्तार कर लिया था.

नौशाद के बड़े भाई मुहम्मद वाजिद ने दिप्रिंट को बताया कि उन्होंने हमें गिरफ्तार करने से ठीक पहले कहा कि पुलिस उन्हें ले जा रही है. हमारे पिता और भाई केवल अस्पताल में नौशाद से मिलने गए थे और पुलिस ने उन्हें भी ले के चली गयी. वाजिद ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि पुलिस उन्हें कहां ले गई थी.

हालांकि, न केवल गिरफ्तारी, बल्कि मस्जिदों और घरों सहित संपत्ति की तोड़फोड़ ने स्थानीय निवासियों के बीच भय पैदा कर दिया है.

शुक्रवार देर रात करीब 12.30 बजे, लगभग 70-100 लोगों ने कथित तौर पर 74 वर्षीय अनवर इलाही के घर का ताला तोड़ा, उनकी कार का शीशा तोड़ दिया और तीन मंजिला घर जाकर हर चीज नष्ट कर दिया. इलाही ने दावा किया कि सभी लोग पुलिस की वर्दी में नहीं थे- कई सिविल कपड़ों में थे.

जबकि इलाही, जो अभी मामले के बारे में अनिश्चित थे उन्हें बाहर खड़ी पुलिस की गाड़ी में ले जाया गया, कुछ लोगों ने उनकी संपत्ति को नष्ट करना जारी रखा, उसके परिवार ने आरोप लगाया.

अपने घर पर अनवर इलाही, साथ के कमरे में सारा सामान बिखरा हुआ । फोटो: प्रवीण जैन/दिप्रिंट

इलाही की पत्नी हजन फखरा ने कहा, ‘सब कुछ नष्ट करने के बाद, वे दो बेटियों की शादी के लिए हमारे पास रखे गहने उठा ले गए. उन्होंने हमारे पास मौजूद 3.5 लाख रुपये नकदी भी ले गए.

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इलाही के घर में खाली ज्वेलरी बॉक्स । फोटो: प्रवीण जैन/दिप्रिंट

इलाही ने कहा कि वह रविवार दोपहर को रिहा होने से दो दिन पहले पुलिस हिरासत में थे.

उन्होंने कहा, ‘मैंने अपनी सारी जिंदगी मुजफ्फरनगर में बिताई है. मैंने ऐसा आतंक और डर कभी नहीं यहां तक कि 2013 में मुजफ्फरनगर दंगे के दौरान भी नहीं महसूस किया.’

लोकल न्यूज चैनल तहजीब टीवी के संवाददाता अजहर खान के भी ऐसे ही सेंटीमेंट महसूस हुए. खान ने दिप्रिंट को बताया कि मुजफ्फरनंगर का दंगा हिंदू बनाम मुस्लिम था. आज आदमी वर्दी में घरों में प्रवेश करता है और शांति भंग करता है जिससे भारी अविश्वास पैदा हो रहा है.

‘अब मैं नहीं जानती की अपने दो बच्चों को कैसे पालूंगी’

19 साल की शन्नो बात करते हुए सिहर गईं, अपनी डेढ़ साल की बेटी, उमैरा को सांत्वना देते हुए उन्होंने अपने पति की मौत का एहसास कराने की कोशिश की. शन्नो को 7 महीने का दूसरा बच्चा गर्भ में हैं जिन्होंने पिछले शुक्रवार को हुई हिंसा में अपने पति नूर मुहम्मद (25) को खो दिया है.

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शन्नो के चाचा अपनी डेढ़ साल की बेटी के साथ । फोटो: प्रवीण जैन/दिप्रिंट

शन्नों ने कहा, ‘मेरे पास उनके सिवा कोई नहीं था. मेरे ससुराल में भी कोई नहीं है. वही मेरे सब कुछ थे. मुझे नहीं पता कि अब मैं अपने दो बच्चों को कैसे पालूंगी.’

अपनी नतिनी के साथ खड़े शख्स

वहीं, मुहम्मद के परिवार को यकीन नहीं है कि उन पर गोली किसने चलाई, एसपी अंतिल ने कहा कि वह 100 फीसदी निश्चित हैं कि विरोध प्रदर्शन के दौरान कोई पुलिस गोलीबारी नहीं हुई.

पिछले हफ्ते हुई हिंसा के मद्देनजर मीनाक्षी चौक की कुछ दुकानों को सील कर दिया गया है । फोटो: प्रवीण जैन/दिप्रिंट

हिंसा के बाद इलाके की 70 में से कुछ दुकानों को सील कर दिया गया है.


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सील की गई दुकानें

एसपी अंतिल ने कहा कि दुकानों को सील करना एक प्रशासनिक निर्णय है. ‘हमें इस पर कोई बात नहीं करनी.’ एसपी ने कहा कि केवल वे लोग डरें जो दंगे का हिस्सा थे.

लेकिन यह सिर्फ मीनाक्षी चौक नहीं जो शांत है. यहां तक ​​कि दरज़ियान गली, अब्दुल करीम मस्जिद जहां कथित रूप से पुलिस द्वारा बर्बरता की गई थी, यहां भी सन्नाटा है.

एक निवासी, जो मस्जिद के पास रहता है और पहचान करने से इनकार करते हुए कहा, ‘देखिए, उन्होंने इस मस्जिद का क्या हाल किया है. अब कोई कैसे बोलेगा? बहुत ही भयानक है.’

लोगों को बुरी तरह से डराने के बारे में पूछे जाने पर, एसपी ने कहा, ‘केवल जो लोग दंगे का हिस्सा थे, उन्हें डरना चाहिए किसी और को नहीं.’

(इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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