नयी दिल्ली, छह फरवरी (भाषा) मानक दिव्यांगता वाले अभ्यर्थियों को सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से किये गए एक महत्वपूर्ण सुधार के तहत, संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने अपने परीक्षा केंद्र आवंटन ढांचे में व्यापक बदलाव किया है।
आयोग ने सिविल सेवा परीक्षा-2026 और भारतीय वन सेवा परीक्षा 2026 के लिए तकनीकी हस्तक्षेपों की एक श्रृंखला शुरू की है, जिसका मुख्य उद्देश्य उम्मीदवारों की सुगम्यता बढ़ाना और परीक्षा सुरक्षा को मजबूत करना है।
संशोधित व्यवस्था के तहत, दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए परीक्षा केंद्रों की सीट संख्या की कोई सीमा नहीं होगी। प्रारंभ में, प्रत्येक केंद्र की मौजूदा क्षमता का उपयोग दिव्यांग और गैर-दिव्यांग दोनों अभ्यथियों द्वारा किया जाएगा।
यूपीएससी के एक बयान के अनुसार हालांकि, एक बार किसी केंद्र की पूरी क्षमता के अनुसार अभ्यर्थी आवंटित हो जाने के बाद, वह केंद्र गैर-दिव्यांग अभ्यथियों के लिए उपलब्ध नहीं रहेगा, जबकि दिव्यांग अभ्यर्थी उक्त केंद्र का चयन कर सकेंगे।
बयान में कहा गया है कि जहां भी आवश्यकता होगी, अभ्यर्थियों के बैठने के लिए अतिरिक्त सीट की व्यवस्था की जाएगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसी भी दिव्यांग उम्मीदवार को उनके पसंदीदा परीक्षा केंद्र से वंचित न किया जाए।
यूपीएससी के अध्यक्ष अजय कुमार ने इस कदम के औचित्य के बारे में कहा, ‘‘पिछले पांच वर्षों के परीक्षा केंद्र के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि कुछ केंद्र – जिनमें दिल्ली, कटक, पटना और लखनऊ शामिल हैं – आवेदनों की उच्च संख्या के कारण बहुत ही शुरुआती चरण में अपनी क्षमता तक पहुंच जाते हैं, जिससे दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए कठिनाइयां पैदा होती हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘संशोधित व्यवस्था के साथ, प्रत्येक दिव्यांग अभ्यर्थी को उनका पसंदीदा परीक्षा केंद्र सुनिश्चित हो सकेगा, जिससे यूपीएससी परीक्षा में शामिल होने में उन्हें आसानी और सुविधा होगी।’’
आयोग ने बुधवार को सिविल सेवा परीक्षा के लिए अधिसूचना जारी की थी। इस परीक्षा के माध्यम से कुल 933 रिक्तियां भरी जाएंगी, जिनमें दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए आरक्षित 33 पद शामिल हैं। प्रारंभिक परीक्षा 24 मई को होनी है।
भाषा सुभाष शफीक
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