Wednesday, 29 June, 2022
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प्रयागराज का लाक्षागृह बनेगा बड़ा टूरिज्म स्पॉट, महाभारत रिसर्च सेंटर बनाने का है प्रस्ताव

लाक्षागृह पर्यटन स्थल विकास समिति का दावा है कि इस स्थल का इतिहास महाभारत से जुड़ा रहा है. इसी कारण इसे पौराणिक स्थल माना जाता है.

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज शहर से लगभग 40 किलोमीटर दूर स्थित लाक्षागृह को पर्यटन के लिहाज से बड़ा टूरिज्म स्पॉट बनाने की तैयारी की जा रही है.

यूपी पर्यटन विभाग को लाक्षागृह पर्यटन स्थल विकास समिति द्वारा यहां महाभारत रिसर्च सेंटर बनाने का प्रस्ताव दिया गया है जिस पर विभाग विचार कर रहा है. वहीं स्थल पर सत्संग भवन का निर्माण और उसके आसपास सौंदर्यीकरण का काम शुरू हो गया है.

राज्य के डिप्टी डायरेक्टर (पर्यटन) दिनेश कुमार का कहना है कि लाक्षागृह के सौंदर्यीकरण का कार्य अभी चल रहा है.

उन्होंने कहा कि प्रयागराज के पर्यटन के लिहाज से भी ये महत्वपर्ण साबित होगा. वहीं शोध स्थल का भी प्रस्ताव आया है लेकिन अभी इस पर कोई फैसला नहीं हुआ है. अगर सरकार की ओर से फैसला आता है तो इसे यहां बनवाया जाएगा.


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महाभारत काल से जुड़ाव होने का दावा

लाक्षागृह पर्यटन स्थल विकास समिति का दावा है कि इस स्थल का इतिहास महाभारत से जुड़ा रहा है. इसी कारण इसे पौराणिक स्थल माना जाता है.

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समिति के संयोजक ओंकार नाथ त्रिपाठी का कहना है कि महाभारत में प्रयागराज के हंडिया इलाके के लाक्षागृह गांव के बारे में जिक्र किया गया है. पांडवों ने यहां से सुरंग बनाकर गंगा पार की थी. इस पूरे इलाके का विकास जरूरी है.

त्रिपाठी का कहना है कि महाभारत रिसर्च सेंटर की स्थापना यहां होनी चाहिए ताकि नई पीढ़ियों को इस जगह की ऐतिहासिक और पौराणिक मान्यताओं के बार में जानकारी मिले.

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के सदस्य जगदगुरु स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया है.

त्रिपाठी के मुताबिक, इस सेंटर के जरिए महाभारत की मूल कथा का प्रचार-प्रसार होगा. वहीं पांडवों की आगे की पीढ़ियों पर भी रिसर्च वर्क हो सकेगा. माना जाता है कि इस इलाके के आसपास उनकी कई पीढ़ियां बसीं. साथ ही जिन रास्तों से होकर पांडवों ने गंगा पार की उसका निर्माण और सौंदर्यीकरण बेहद जरूरी है.

ओंकार के मुताबिक, 2011 में प्रयागराज के कुछ संत व समाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा इस समिति का गठन हुआ था. तब से ये समिति लाक्षागृह के विकास को लेकर लगातार प्रयास कर रही है.

पिछले साल यहां एक लंबी सुरंग दिखाई दी थी. इस सुरंग की जानकारी मिलने पर यहां स्थानीय लोगों की भीड़ लग गई थी. दरअसल कहा जाता है कि कौरवों ने पांडवों को जलाकर मारने की कोशिश की थी जिससे बचने के लिए पांडवों ने इस सुरंग का सहारा लिया था.

खुदाई में यहां समय-समय पर कुछ न कुछ मिलता रहता है. ओंकार नाथ त्रिपाठी के मुताबिक, महाभारत काल के समय के कई अवशेष यहां मिले हैं जिसे संग्रहालय में सुरक्षित रखा गया है.

योगी सरकार की ओर से जून में यहां सत्संग भवन के लिए 20 लाख रुपये की राशि जारी की गई थी. वहीं सरकार की ओर से उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट्स कॉरपोरेशन लिमिटेड को इस निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई थी.


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