Thursday, 20 January, 2022
होमदेशUP में धर्मांतरण विरोधी कानून का एक साल पूरा—108 मामले दर्ज, 72 में चार्जशीट दाखिल, 11 में ‘सबूतों का अभाव’

UP में धर्मांतरण विरोधी कानून का एक साल पूरा—108 मामले दर्ज, 72 में चार्जशीट दाखिल, 11 में ‘सबूतों का अभाव’

पुलिस का डाटा दर्शाता है कि 24 नवंबर 2020 को यूपी में अध्यादेश जारी होने के नौ महीनों के भीतर कम से कम 189 लोगों को धर्मांतरण विरोधी मामलों के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था.

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नई दिल्ली: यूपी पुलिस ने जबरन, अनुचित दबाव में, धमकाकर या प्रलोभन देकर धर्म बदलवाने को अपराध करार देने वाले एक विवादास्पद अध्यादेश के तहत अब तक कुल 108 मामले दर्ज किए हैं. विवाह के लिए धर्म परिवर्तन को भी इस अध्यादेश के दायरे में रखा गया है.

धर्मांतरण के खिलाफ यूपी सरकार के कानून विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश, 2020, जिसे इस वर्ष के शुरू में कानून बना दिया गया, को लागू हुए बुधवार को एक वर्ष पूरे हो गए हैं. यह अध्यादेश 24 नवंबर 2020 को जारी किया गया था और उपरोक्त मामले तब से इस साल 31 अगस्त तक दर्ज किए गए थे.

दिप्रिंट को हासिल यूपी पुलिस आंकड़ों के मुताबिक, 108 में से 72 मामलों में चार्जशीट दायर की जा चुकी है. पुलिस शिकायत में नामजद लोगों के खिलाफ साक्ष्यों के अभाव में 11 मामलों में अंतिम रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है और 24 मामलों की जांच जारी है. एक मामले की जांच बेंगलुरु ट्रांसफर कर दी गई है.

यूपी में सबसे ज्यादा मामले बरेली जोन (28) में आए हैं इसके बाद मेरठ जोन (23), गोरखपुर जोन (11), लखनऊ जोन (नौ) और आगरा जोन (नौ) का नंबर है. प्रयागराज और गौतम बौद्ध नगर दोनों में सात-सात मामले सामने आए हैं, जबकि वाराणसी और लखनऊ में छह-छह केस दर्ज हुए हैं. कानपुर में ऐसे केवल दो मामले आए हैं.


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एक विवादास्पद कानून

यह कानून यूपी सरकार की तरफ से ‘अवैध धर्मांतरण’ के मामलों से निपटने और ‘लव जिहाद’—जिसे आम तौर पर मुस्लिम युवकों द्वारा हिंदू लड़कियों को बहलाने-फुसलाने और इस्लाम धर्म अपनाकर शादी करने पर राजी करने करने की साजिश करार दिया जाता है—पर रोक लगाने के उद्देश्य से पारित किया गया था.

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दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति को ‘अपराध’ की गंभीरता के आधार पर 10 साल तक की जेल हो सकती है. जुर्माने की राशि 15,000 रुपये से 50,000 रुपये तक है. अंतर-धार्मिक विवाह करने वाले जोड़ों को शादी करने से दो महीने पहले जिला मजिस्ट्रेट को सूचित करना होगा.

कानून के तहत जबरन धर्म परिवर्तन कराने पर न्यूनतम 15,000 रुपये के जुर्माने के साथ एक से पांच साल की कैद का प्रावधान है और एससी/एसटी समुदाय के नाबालिगों और महिलाओं के धर्मांतरण पर तीन से 10 साल जेल की सजा का प्रावधान है. जबरन सामूहिक धर्मांतरण के लिए जेल की सजा तीन से 10 साल और जुर्माना 50,000 रुपये है.

कानून के मुताबिक, यदि यह पाया जाता है कि विवाह का एकमात्र उद्देश्य महिला का धर्म परिवर्तन कराना था तो ऐसी शादियों को अवैध करार दे दिया जाएगा.

कई मामलों में गिरफ्तारी हुई

अध्यादेश जारी होने के नौ महीने के भीतर पुलिस ने धर्मांतरण विरोधी मामलों में कम से कम 189 लोगों को गिरफ्तार किया.

आंकड़ों के मुताबिक, 108 मामलों में 257 लोग नामजद किए गए थे लेकिन पुलिस जांच में अतिरिक्त 83 संदिग्धों की पहचान हुई, जिससे कुल संख्या बढ़कर 340 हो गई. इनमें से 56 को कानून तोड़ने का दोषी नहीं पाया गया. पिछले नवंबर से इस साल 31 अगस्त के बीच दर्ज मामलों में 31 शिकायतकर्ता नाबालिग थे. इसके अलावा पुलिस ने 77 महिलाओं के बयान भी दर्ज किए हैं.

कुछ मामले जहां अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत की गई थी, वे कानून के कथित दुरुपयोग के लिए चर्चा में रहे.

उदाहरण के तौर पर पिछले साल दिसंबर में मुरादाबाद में एक मुस्लिम युवक को उसके भाइयों के साथ धर्मांतरण विरोधी कानून के तहत गिरफ्तार किया गया था. नारी निकेतन में पांच दिन तक कथित यातना के बाद उसकी हिंदू पत्नी का गर्भपात हो गया था और उसने दिप्रिंट को बताया था कि बजरंग दल कार्यकर्ता उसे और उसके पति को ‘घसीटते’ हुए पुलिस थाने तक ले गए थे. गिरफ्तार किए गए युवक और उसके भाई को बाद में छोड़ दिया गया था.

बजरंग दल के नगर संयोजक राम लखन वर्मा की शिकायत के आधार पर इस साल जनवरी में शाहजहांपुर में पांच लोगों पर कथित तौर पर कुछ लोगों को ईसाई धर्म ग्रहण कराने की कोशिश के आरोप में मामला दर्ज किया गया था.

(इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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