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Wednesday, 11 February, 2026
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उप्र: जालसाजी मामले में पप्पू यादव को जमानत, दूसरे मामले में रहेंगे हिरासत में

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पटना, 10 फरवरी (भाषा) बिहार के पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव को 31 साल पुराने जालसाजी मामले में मंगलवार को एक विशेष अदालत ने जमानत दे दी हालांकि एक अन्य मामले में सुनवाई लंबित होने के कारण वह न्यायिक हिरासत में ही रहेंगे।

पप्पू यादव के वकील शिवनंदन भारती ने बताया कि 1995 के मामले में उनके मुवक्किल को जमानत मिल गई है लेकिन गिरफ्तारी के दौरान पुलिस कार्य में बाधा डालने के आरोप में बुद्धा कॉलोनी थाने में दर्ज दूसरे मामले के कारण वह हिरासत में रहेंगे।

उन्होंने बताया कि इस मामले (संख्या 72/2026) की सुनवाई बुधवार, 11 फरवरी को अदालत में होगी।

भारती ने आरोप लगाया कि पुलिस ने “साजिश” के तहत पप्पू यादव के खिलाफ यह मामला दर्ज किया और उन पर पुलिस कार्य में बाधा डालने का आरोप लगाया जबकि निर्दलीय सांसद ने खुद वारंट देखकर गिरफ्तारी की पेशकश की थी।

वकील ने यह भी आरोप लगाया कि अधिकारियों ने उनके मुवक्किल के साथ “दुर्व्यवहार” किया।

भारती ने कहा, “अदालत ने मामले को गंभीरता से लिया और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है।”

पप्पू यादव को सात फरवरी की मध्यरात्रि को गिरफ्तार किया गया था और पहले उन्हें न्यायिक हिरासत में चिकित्सीय जांच के लिए पटना चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल ले जाया गया।

पप्पू यादव के वकील ने बताया कि उनके मुवक्किल को नौ फरवरी को अदालत में पेश किया जाना था लेकिन उस दिन दीवानी अदालत में “बम की धमकी” के कारण न्यायिक कार्य स्थगित हो गया।

उन्होंने बताया कि बाद में पप्पू यादव को पटना के बेऊर जेल भेजा गया और वहां से 10 फरवरी को अदालत में पेश किया गया, जहां उन्हें जमानत मिली।

यह मामला 1995 में गर्दनीबाग थाने में तत्कालीन भारतीय दंड संहिता की धारा 467 (दस्तावेजों की जालसाजी) के तहत दर्ज किया गया था।

पप्पू यादव पर आरोप है कि जिस मकान में वह किराये पर रहते थे, उसी मकान में उन्होंने बाद में सांसद कार्यालय खोल लिया, जिसके बाद पीड़ित मकान मालिक ने यह मामला दर्ज कराया।

इस मामले में अदालत लंबे समय से पप्पू यादव के खिलाफ वारंट जारी कर रही थी लेकिन वह पिछले 31 साल से अदालत में कथित तौर पर पेश नहीं हो रहे थे। भाषा कैलाश जितेंद्र

जितेंद्र

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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