प्रयागराज (उप्र), 17 फरवरी (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 1983 में डकैती के आरोप में दोषी ठहराये गये तीन लोगों को बरी कर दिया है।
उच्च न्यायालय की एक पीठ ने सोमवार को उन्हें 1982 में बदायूं जिले में हुई डकैती की कथित घटना में संदेह का लाभ देते हुए और मामले में कमजोर अभियोजन के आधार पर बरी कर दिया।
फैसला सुनाते हुए न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना ने कहा कि गवाहों के बयान में महत्वपूर्ण विसंगतियां पाईं, इसलिए आरोपियों को संदेह के आधार पर इसका लाभ दिया जाना चाहिए। अदालत ने अली हसन, हरपाल और लटूरी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।
यह पुरानी आपराधिक अपील 1983 में सात आरोपियों ने दायर की थी, जो 29 अगस्त, 1983 को बदायूं के विशेष सत्र न्यायाधीश की अदालत के सजा के फैसले के विरोध में थी। यह मामला 27 जुलाई, 1982 का है, जब उनके खिलाफ बदायूं के उझानी पुलिस थाना में भारतीय दंड संहिता की धारा 395 (डकैती की सजा) और 397 (जान से मारने या गंभीर चोट पहुंचाने की कोशिश के साथ डकैती) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
पीठ ने कहा, अली हसन को भारतीय दंड संहिता की धारा 395 के तहत अपराध के लिए बरी किया जाता है, जबकि हरपाल और लटूरी को भारतीय दंड संहिता की धारा 395 के साथ 397 के तहत अपराध से बरी किया जाता है।
भाषा सं आनन्द रंजन गोला
गोला
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.
