नई दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रविवार को संसद में वित्त वर्ष 2026-27 का यूनियन बजट पेश करेंगी. 2019 में यह जिम्मेदारी संभालने के बाद यह उनका लगातार नौवां बजट भाषण होगा.
बजट प्रस्तुति सुबह करीब 11 बजे लोकसभा में शुरू होगी. इसके बाद बजट की एक प्रति राज्यसभा में भी रखी जाएगी. यह मोदी 3.0 सरकार का दूसरा पूर्ण बजट भी होगा.
हर साल की तरह, बजट पेश होने से पहले वित्त मंत्रालय ने अर्थव्यवस्था के अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े लोगों से बातचीत की है. यह बजट अगले वित्त वर्ष के लिए देश की आर्थिक और वित्तीय दिशा तय करेगा.
बजट की तैयारी के लिए, सीतारमण को सीनियर सेक्रेटरी और अधिकारियों की एक टीम सपोर्ट करती है, जिसमें इकोनॉमिक अफेयर्स सेक्रेटरी अनुराधा ठाकुर, रेवेन्यू सेक्रेटरी अरविंद श्रीवास्तव, एक्सपेंडिचर सेक्रेटरी वुमलुनमांग वुअल्नाम, फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्रेटरी एम. नागराजू, DIPAM सेक्रेटरी अरुणिश चावला, पब्लिक एंटरप्राइजेज सेक्रेटरी के. मूसा चलाई और चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर वी. अनंत नागेश्वरन शामिल हैं।
29 जनवरी को पेश किए गए इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 के अनुसार, भारत दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना हुआ है. भारत की अर्थव्यवस्था के FY26 में 7.4 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है, जबकि सकल मूल्य वर्धन की वृद्धि 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है.
FY27 के लिए जीडीपी वृद्धि 6.8 से 7.2 प्रतिशत के दायरे में रहने का अनुमान है, जबकि वैश्विक अर्थव्यवस्था अभी भी नाजुक बनी हुई है.
अपने भाषण के बाद, वित्त मंत्री देश भर के करीब 30 कॉलेज छात्रों से बातचीत करेंगी.
अपडेट्स
8.30 am: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण केंद्रीय बजट से पहले कर्तव्य भवन पहुंचीं.
फोटो: सूरज सिंह बिष्ट | दिप्रिंट

8.00 am: इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 की मुख्य बातें
इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 गुरुवार को संसद में पेश किया गया. यह भारतीय अर्थव्यवस्था पर सरकार का सबसे व्यापक रिपोर्ट कार्ड है और यह यूनियन बजट के लिए बौद्धिक ढांचा भी तैयार करता है.
सर्वे में भारत की संभावित मीडियम-टर्म ग्रोथ रेट को तीन साल पहले के लगभग 6.5 प्रतिशत से बढ़ाकर लगभग 7 प्रतिशत कर दिया गया है. यह बदलाव अहम है क्योंकि यह सिर्फ़ एक अच्छे साल को नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था की क्षमता में बदलाव को दिखाता है. ग्रोथ को अब पॉलिसी-ड्रिवन या अस्थायी नहीं बताया जा रहा है. सर्वे असल में कह रहा है कि भारत की ग्रोथ की ऊपरी सीमा बढ़ गई है, लेकिन तभी जब सुधार जारी रहेंगे.
सर्वे में बार-बार यह चेतावनी भी दी गई है कि दुनिया की अर्थव्यवस्था स्थायी अनिश्चितता के दौर में प्रवेश कर रही है. भू-राजनीति से लेकर व्यापार और पूंजी प्रवाह तक. फिर भी, भारत को उसके घरेलू बाज़ार के आकार, मैक्रो स्थिरता और रणनीतिक स्वायत्तता के कारण “दूसरे देशों के मुकाबले बेहतर स्थिति में” बताया गया है. यह आशावाद नहीं है, यह सोच-समझकर किया गया यथार्थवाद है. सर्वे कह रहा है कि भारत लगातार विकास कर सकता है, लेकिन वैश्विक जोखिमों को नज़रअंदाज़ करके नहीं, बल्कि दूसरों से बेहतर तरीके से उन्हें मैनेज करके.
इस बीच, अप्रैल और दिसंबर 2025 के बीच भारत की औसत हेडलाइन CPI महंगाई दर सिर्फ़ 1.7 प्रतिशत थी, जो CPI सीरीज़ शुरू होने के बाद से सबसे कम है. यह गिरावट मुख्य रूप से भोजन और ईंधन की कीमतों के कारण हुई, जो मिलकर CPI बास्केट का 52.7 प्रतिशत हिस्सा हैं. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मांग में गिरावट के बिना महंगाई कम हुई है. इसका मतलब है कि महंगाई को सप्लाई में सुधार के ज़रिए नियंत्रित किया गया है, न कि आर्थिक दर्द से. यही उस स्थिरता और बाद में टूटने वाली स्थिरता के बीच का अंतर है.
