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Saturday, 11 April, 2026
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देश में अघोषित ‘आपातकाल’: गहलोत

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जयपुर, आठ फरवरी (भाषा) राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मंगलवार को कहा कि देश में अघोषित ‘आपातकाल’ है और कोई नहीं जानता की देश किस दिशा में जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘‘70 साल की कमियां सामने लाने के बजाय विकास कार्य पर ध्यान देना चाहिए।’’

कांग्रेस को लेकर प्रधानमंत्री मोदी की टिप्पणी के बारे में पूछे जाने पर गहलोत ने कहा, ‘‘आज अघोषित आपातकाल है … (लालकृष्ण) आडवाणी जी ने खुद सरकार बनते ही संकेत दिया था। दबाव पड़ा आरएसएस का उन पर, उनको चुप होना पड़ा … देश जानता है।’’

मोदी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा था कि ‘‘आपातकाल लगाने वाले लोकतंत्र की बात कर रहे हैं।’’

गहलोत ने कहा,‘‘ वह आपातकाल लगा, एक फैसला हुआ दुनिया को मालूम है। उसके बाद हमारी सरकार चली गई, उसको गिनाने की क्या तुक है। सब जानते हैं कि आपातकाल लगा था, किन कारणों से लगा, क्यूं लगा था, क्या हुआ आपातकाल में … क्या खमियां क्या उपलब्धियां रहीं, यह तो अनुसंधान का विषय हो सकता है।’’

मुख्यमंत्री ने कहा,‘‘ लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगर यह बात कहें .. जैसे उन्होंने इंडिया गेट पर कहा कि हम 70 साल की कमियों को डंके की चोट पर सामने लाएंगे …. आप कमियां ही बताते रहेंगे या अपना खुद का इतिहास बनाएंगे। कमियों को सामने लाते-लाते समय निकल जाएगा, आपका … आप विकास की बात करें तो समझ में आता है।’’

कांग्रेस पर मजदूरों को भड़काने के प्रधानमंत्री मोदी के बयान पर मुख्यमंत्री ने कहा,‘‘ मोदी जी का इस प्रकार का बयान बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। देश में क्या हो रहा है, देश किस दिशा में जा रहा है किसी को नहीं मालूम… देश में हिंसा, अशांति, अविश्वास व तनाव का माहौल है… ये हमारे आरोप हैं राजग, भाजपा व आरएसएस पर और प्रधानमंत्री मोदी उलटा हमें कह रहे हैं हम लोगों को भड़का रहे हैं?’’

सत्तारूढ़ कांग्रेस व उसके समर्थक विधायकों के तीन दिवसीय चिंतन शिविर के बारे में गहलोत ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘दो दिन का संवाद अच्छा रहा, खुलकर सबने बात की। बहुत अच्छे ढंग से अच्छी बातें हुई हैं, सबने खुलकर अपनी-अपनी बात कही है और मैं समझता हूं कि ऐसे चिंतन शिविर होते रहने चाहिए।’’

उन्होंने कहा, ‘‘अगर जनता ने हमें आशीर्वाद दिया है और सरकार बनाने का मौका दिया है तथा मैं तीसरी बार मुख्यमंत्री हूं तो मेरी नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि मैं सुशासन के लिए काम करूं और मेरी पूरी टीम काम करे। हम जनता के विश्वास पर खरा उतरना चाहेंगे, प्रयास कर रहे हैं।’’

तीन दिवसीय शिविर मंगलवार को यहां संपन्न हो गया।

भाषा पृथ्वी कुंज नेत्रपाल

नेत्रपाल

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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