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Monday, 13 April, 2026
होमदेशअमित शाह की समय-सीमा के दो हफ्ते बाद, बस्तर में ‘आखिरी सक्रिय तेलुगु माओवादी कैडर’ मुठभेड़ में मारी गई

अमित शाह की समय-सीमा के दो हफ्ते बाद, बस्तर में ‘आखिरी सक्रिय तेलुगु माओवादी कैडर’ मुठभेड़ में मारी गई

रूपी बस्तर में मुठभेड़ में मारी गई 28वीं माओवादी कैडर है. इसी साल अब तक करीब 400 माओवादी कैडर ने क्षेत्र में आत्मसमर्पण किया है.

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नई दिल्ली: देश में प्रतिबंधित कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओवादी) के कमजोर पड़ने और लगातार हो रहे आत्मसमर्पण के कुछ हफ्तों बाद, सोमवार को सुरक्षा बलों ने छत्तीसगढ़ के कांकेर में एरिया कमेटी स्तर की एक कैडर को मार गिराया.

कांकेर के पुलिस अधीक्षक निखिल रखेचा ने बताया कि मारी गई कैडर की पहचान रूपी के रूप में हुई है. वह तेलुगु राज्य की आखिरी सक्रिय माओवादी कैडर थी. साथ ही, वह माओवादी कमांडर विजय रेड्डी की पत्नी भी थी, जिसे पिछले साल अगस्त में राज्य के मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में सुरक्षा बलों ने मुठभेड़ में मार गिराया था.

रेड्डी प्रतिबंधित संगठन की दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZCM) का सदस्य था, जो इस संगठन की सबसे महत्वपूर्ण कमेटियों में से एक है.

यह ताजा मुठभेड़ तब हुई, जब सुरक्षा बलों को कांकेर जिले के छोटेबेठिया–पार्टापुर थाना क्षेत्र के सीमावर्ती इलाके में माओवादी कैडरों की मौजूदगी की खुफिया जानकारी मिली और उन्होंने सर्च ऑपरेशन शुरू किया.

रखेचा ने बयान में कहा, “सर्च ऑपरेशन के दौरान मछपल्ली इलाके में पुलिस और माओवादियों के बीच फायरिंग हुई. मुठभेड़ के बाद तलाशी में सुरक्षा बलों को एक महिला माओवादी कैडर का शव मिला.”

उन्होंने आगे कहा, “मुठभेड़ स्थल से मिले शव की पहचान महिला माओवादी कमांडर ‘रूपी’ (ACM) के रूप में हुई है” और कहा कि “रूपी बस्तर क्षेत्र में आखिरी सक्रिय तेलुगु माओवादी कैडर थी.”

यह घटना केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा देश से वामपंथी उग्रवाद खत्म करने के लिए तय और सार्वजनिक की गई समय-सीमा के कुछ हफ्तों बाद सामने आई है.

रूपी बस्तर क्षेत्र में मुठभेड़ में मारी गई 28वीं माओवादी कैडर है. इस साल के पहले चार महीनों में ही करीब 400 माओवादी कैडरों ने हथियार छोड़कर मुख्यधारा में वापसी की है.

इस मुठभेड़ पर प्रतिक्रिया देते हुए बस्तर रेंज के आईजी सुंदर राज पाटिलिंगम ने कहा कि बड़ी संख्या में माओवादी कैडरों ने प्रशासन और सुरक्षा बलों की अपील मानकर सरेंडर किया है और पुनर्वास का रास्ता अपनाया है. लेकिन उन्होंने कहा, “कुछ कैडर जैसे रूपी ने पुनर्वास का रास्ता छोड़कर हिंसा का रास्ता चुना, जिसका नतीजा आज उनकी मौत के रूप में सामने आया.”

छत्तीसगढ़ पुलिस के सूत्रों के अनुसार, बस्तर क्षेत्र में अब लगभग 15-16 माओवादी कैडर ही बचे हैं, जिनमें से अधिकतर ने हथियार छोड़ दिए हैं और गांवों में घूम रहे हैं या शरण ले रहे हैं. आईजी सुंदर राज ने एक बार फिर सभी बचे हुए माओवादी कैडरों से सरेंडर करने की अपील की है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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