Monday, 6 December, 2021
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IT नियमों का पालन करने में विफल रहा ट्विटर, जानबूझकर इनकी अवहेलना की: रविशंकर प्रसाद

सरकार का पिछले कुछ महीनों में कई बार ट्विटर के साथ विवाद हुआ है. ट्विटर ने हाल में कुछ भाजपा नेताओं के ट्वीट को ‘मैनिपुलेटेड मीडिया’ करार दिया था. इसके लेकर काफी विवाद छिड़ा है.

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नई दिल्ली: सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बुधवार को कहा कि ट्विटर मध्यस्थ नियमों का पालन करने में विफल रहा और उसने कई अवसर मिलने के बावजूद ‘जानबूझकर’ इनका पालन ना करने का रास्ता चुना.

नियमों का पालन ना करने को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर निशाना साधते हुए प्रसाद ने कहा कि यह ‘आश्चर्यजनक’ है कि स्वयं को स्वतंत्र अभिव्यक्ति के ध्वजवाहक के रूप में पेश करने वाला ट्विटर, जब मध्यस्थ दिशानिर्देशों की बात आती है तो जानबूझकर अवज्ञा का रास्ता चुनता है.

प्रसाद ने स्वेदशी सोशल मीडिया मंच ‘कू’ पर सिलसिलेवार पोस्ट में कहा, ‘इस बात को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं कि क्या ट्विटर संरक्षण प्रावधान का हकदार है. हालांकि, इस मामले का सामान्य तथ्य यह है कि ट्विटर 26 मई से लागू हुए मध्यस्थ दिशानिर्देशों का पालन करने में विफल रहा है.’

संरक्षण (हार्बर) प्रावधान, एक कानून या विनियम का प्रावधान है जो निर्दिष्ट करता है कि किसी निश्चित आचरण को दिए गए नियम का उल्लंघन करने वाला ना माना जाए.

मंत्री ने इस मामले के संबंध में ट्वीट भी किया. प्रसाद ने कहा कि ट्विटर को कई अवसर दिए गए लेकिन उसने जानबूझकर इनका पालन ना करने का रास्ता चुना.

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IT नियमों का पालन न करने पर ट्विटर ने भारत में मिली कानूनी सुरक्षा खोई

ट्विटर ने बार-बार याद दिलाए जाने के बावजूद आईटी नियमों का पालन न करके और नए दिशानिर्देशों के तहत अनिवार्य प्रमुख कर्मियों की नियुक्ति नहीं करके भारत में मिली कानूनी सुरक्षा खो दी है और वह अब तीसरा पक्ष गैरकानूनी सामग्री के लिए भारतीय दंड संहिता के तहत कार्रवाई के लिए उत्तरदायी होगा. सूत्रों ने यह जानकारी दी.

इससे पहले इस महीने की शुरुआत में सरकार ने ट्विटर को नोटिस जारी कर उसे नए आईटी नियमों के तत्काल अनुपालन के लिए ‘एक आखिरी मौका’ दिया था. सरकार ने आगाह किया था कि यदि ट्विटर इन नियमों का अनुपालन करने में विफल रहता है, तो वह आईटी कानून के तहत दायित्व से प्राप्त छूट गंवा देगा.

सरकार के सूत्रों ने पुष्टि की कि ट्विटर ने दायित्व से उसे मिली छूट गंवा दी है, क्योंकि वह आईटी नियमों का पालन करने और नए दिशानिर्देशों के तहत प्रमुख अधिकारियों की नियुक्ति करने में विफल रहा.

सूत्रों ने कहा कि कंपनी द्वारा नामित स्थानीय शिकायत अधिकारी (रेजिडेंट ग्रिवासं ऑफिसर) और नोडल संपर्क व्यक्ति भारत में ट्विटर इंक के कर्मचारी नहीं है. इसके अलावा मंत्रालय को मुख्य अनुपालन अधिकारी के नाम या विवरण के बारे में भी कोई ठोस जानकारी नहीं मिली है.

एक अन्य सूत्र ने कहा कि ट्विटर का मध्यस्थ का दर्जा और उसे मिली कानूनी सुरक्षा नए दिशानिर्देशों का पालन न करने के कारण 26 मई को स्वतः समाप्त हो गई. आईटी नियमों को पालन नहीं करने वाले हर सोशल मीडिया मंच के साथ ऐसा हुआ है.

सरकार का पिछले कुछ महीनों में कई बार ट्विटर के साथ विवाद हुआ है. ट्विटर ने हाल में कुछ भाजपा नेताओं के ट्वीट को ‘मैनिपुलेटेड मीडिया’ करार दिया था. इसके लेकर काफी विवाद छिड़ा है.

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने पांच जून को कहा था कि इन नियमों के अनुपालन से ट्विटर के इनकार से पता चलता है कि माइक्रोब्लॉगिंग साइट में प्रतिबद्धता की कमी है और वह भारत के लोगों को अपने मंच पर सुरक्षित अनुभव प्रदान करने का प्रयास नहीं करना चाहती.

मंत्रालय ने बयान में था कि ट्विटर ने मुख्य अनुपालन अधिकारी का ब्योरा नहीं दिया है, जो नियमों के तहत यह जरूरी है. इसके अलावा स्थानीय शिकायत अधिकारी और नोडल संपर्क व्यक्ति के रूप में ट्विटर ने जो नाम दिया है वह कंपनी का कर्मचारी नहीं है, जबकि यह नियमों के तहत जरूरी है. मंत्रालय ने कहा कि टि्वटर इंक ने कार्यालय का जो पता दिया है वह भारत में एक विधि कंपनी का पता है और यह नियमों के तहत नहीं आता.

मंत्रालय ने ट्विटर को स्पष्ट किया था कि इस तरह के बर्ताव के चलते उसे आईटी कानून के तहत दायित्व से छूट को गंवाना पड़ सकता है. सरकार के हालिया आंकड़ों के अनुसार भारत में ट्विटर के प्रयोगकर्ताओं की संख्या 1.75 करोड़ है.


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