Tuesday, 5 July, 2022
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कोविड-19 से लड़ाई में भारत को दोगुने डॉक्टर, तीन गुना नर्स और चार गुना पैरामेडिक्स की जरूरत : डॉ प्रताप सी रेड्डी

डॉक्टर रेड्डी ने कहा कि कोविड के मामले में 90 प्रतिशत लोगों को इलाज की ज़रूरत नहीं पड़ती. वहीं, मुश्किल से 6-7 प्रतिशत लोगों को आईसीयू की जरूरत पड़ती है.

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नई दिल्ली: कोविड-19 महामारी से जूझ रहे भारत के लिए गर्व की बात है कि यहां मृत्यु दर बाकी की दुनिया से काफ़ी कम है. ऐसा कहना है कि अपोलो हॉस्पिटल ग्रुप के चेयरमैन डॉक्टर प्रताप सी रेड्डी का. उन्होंने नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा लगाए गए लॉकडाउन तारीफ़ भी की. कोविड से लड़ाई के लिए उन्होंने देश में मेडिकल स्टाफ़ की संख्या व्यापक तौर पर बढ़ाए जाने पर भी ज़ोर दिया.

दिप्रिंट के कार्यक्रम ऑफ़ द कफ़  में उन्होंने दिप्रिंट के सीईओ और प्रधान संपादक शेखर गुप्ता से बातचीत में कहा, ‘सरकार द्वारा लगाए गए लॉकडाउन से गहरा असर पड़ा. इससे हमें समझ आया की ये बीमारी बेहद तेज़ी से फ़ैलने वाली है. लेकिन लॉकडाउन की वजह से ये उतनी तेज़ी से नहीं फ़ैली.’

वहीं, मेडिकल स्टाफ़ बढ़ाए जाने को लेकर उन्होंने कहा, ‘कोविड संकट से निपटने के लिए भारत को डॉक्टर की संख्या दोगुना, नर्सों की संख्या तीन गुना और पैरामेडिक्स की संख्या चार गुना बढ़ाने की ज़रूरत है.’ इसी के साथ उन्होंने कहा कि अपने यहां वो इंटेसिव केयर के मामले में ज़्यादा लोगों को ट्रेन करने की कोशिश कर रहे हैं.

उन्होंने ये भी कहा कि देश में ज़्यादा मेडिकल कॉलेज शुरू किया जाने की ज़रूरत है, जो 600 ज़िला अस्पतालों उनमें हर अस्पताल पर 20 करोड़ ख़र्च करके उन्हें बेहतर बनाए जाने की ज़रूरत है. इससे छोटे शहरों में बेहतर इलाज मिलेगा. उन्हें उम्मीद है कि प्राइवेट-पब्लिक सेक्टर मिलकर भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था को बहुत बेहतर बना सकते हैं.

वायरस के पीक आने को लेकर डॉक्टर रेड्डी ने कहा, ‘इससे जुड़ी कई अटकलें हैं. ये इसपर निर्भर करता है हम चीज़ों को कैसे मैनेज करते हैं.’ राहत के साथ उन्होंने कहा कि पहले की तुलना में टेस्टिंग बढ़ी है. कुछ दवाएं भी आ रही हैं. उन्होंने उनके अस्पताल में ठीक हुए 96 साल के एक मरीज़ का उदाहरण दिया.

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उन्होंने कहा, ‘हमने 96 साल के एक मरीज़ पर रेमडेसिवीर और स्टेरॉयड के हल्के डोज़ का इस्तेमाल किया गया. इससे वो ठीक होकर गया.’ कोविड के इलाज को लेकर अपोलो ने कवच नाम का एक प्रोटोकॉल तैयार किया है और इसी के आधार पर कोविड संदिग्धों का इलाज किया जा रहा है.

उन्होंने बार-बार इस पर भी ज़ोर दिया कि कोविड-19 की वजह से बाकी बीमारियों से जुड़े मरीज़ों का काफ़ी परेशानी हो रही है. हालांकि, कवच का हवाला देते हुए उन्होंने भरोसा दिलाया कि अपोलो में मरीज़ बिना किसी डर के अन्य बीमारियों का इलाज कराने आ सकते हैं.

उन्होंने कहा, ‘हमने आयरन कर्टन लगाकर कोविड-19 का इलाज करने वालों को अलग कर दिया है. हम बाकी बीमारियों से पीड़ित लोगों को बताना चाहते हैं कि अपोलो उनके लिए सुरक्षित है.’ उन्होंने जानकारी दी कि कोविड के मरीज़ों के लिए उन्होंने देश भर में कई होटल ले रखे हैं जिनमें उन्हें आइसोलेट किया जाता है.

डॉक्टर रेड्डी ने कहा कि कोविड के मामले में 90 प्रतिशत लोगों को इलाज की ज़रूरत नहीं पड़ती. वहीं, मुश्किल से 6-7 प्रतिशत लोगों को आईसीयू की जरूरत पड़ती है. उन्हें अस्पताल लाया जाता है. वहीं, प्राइवेट अस्पताल में लोगों की इलाज से टूट रही कमर के लिए उन्होंने इंश्योरेंस का रास्ता सुझाया.

उन्होंने कहा, ‘जब प्राइवेट अस्पताल में इलाज में मरीज़ का खर्चा ज़्यादा हो जाता है, तो मीडिया हमारी आलोचना करती है. अगर लोगों के पास इंश्योरेंस हो तो ये नौबत नहीं आएगी. दो तिहाई लोगों को अपने और अपने परिवार के लिए इंश्योरेंस ले लेना चाहिए.’ उन्होंने कहा कि वो 15-18 प्रतिशत फ़ायदे में यकीन रखते हैं, ताकि बाद में 8 प्रतिशत रिर्सच में ख़र्च किया जा सके.

सरकार द्वारा स्वास्थ्य पर किए जा रहे है कम खर्च पर उन्होंने कहा , ‘सरकार इस पर 1 से 1.25 प्रतिशत तक ख़र्च कर रही है. हमने इसे 3 प्रतिशत करने का अनुरोध किया है हमने कहा है कि प्राइवेट 7 प्रतिशत खर्च करेगा, जिससे ये 10 प्रतिशत हो जाएगा और हम मध्यम आय वाले देशों के बराबर हो जाएंगे.’

दवा विकसित करने को लेकर उन्होंने कहा, ‘हम कुछ दवाओं का क्लिनिकल ट्रायल कर रहे हैं. इनमें से कुछ काम भी कर रही हैं.’ उन्होंने ये भी बताया इम्युनिटी को बेहतर बनाने के लिए वो अश्वगंधा लेते हैं. हालांकि, उन्होंने कहा कि वो अपने मरीज़ों को ये नहीं देते और आयुष की दवाओं के इस्तेमाल के लिए और वैज्ञानिक साक्ष्य की ज़रूरत है. हालांकि, उन्होंने बार-बार आयुष पर भी ज़ोर दिया और बताया कि अपने गांव में आयुष अस्पताल बनावा रहे हैं.

उन्होंने मेडिकल टूरिज़्म से भारत को होने वाले फ़ायदे का भी ज़िक्र किया. उन्होंने कहा, ‘यूरोप में आयुष पद्धति से इलाज कर रहे हैं. इस पर लोग 10-20 लाख़ ख़र्च करते हैं. मेडिकल टूरिज़्म 350 मिलियन डॉलर की इडंस्ट्री है. अगर हम मेडिकल टूरिज़्म को प्रमोट करते हैं तो इसका आधा हमारे हिस्सा आ सकता है.’

वैक्सीन को लेकर उन्होंने कहा कि कई सेंटर वैक्सीन बना रहे हैं. हालांकि, उन्होंने कहा कि वैक्सीन बनने के साथ ही इसका बेहद सस्ता होना भी ज़रूरी है. इन सबके अलावा उन्होंने कहा कि वो इस वायरस के लैब में बने होने की आशंका से इंकार नहीं कर सकते.

उन्होंने कहा, ‘ये बिल्कुल अलग तरह का वायरस है. इस पर गर्मी का भी असर नहीं पड़ा. ये तेज़ी से अपनी मॉर्फ़ोलॉजी भी बदल रहा है. मैं नहीं कह सकता कि ये लैब का वायरस है या नहीं. वुहान के अलावा ये चीन में ज़्यादा नहीं फ़ैला. कोई सीक्रेट है जो चीन दुनिया को नहीं बता रहा. चीन के पास अगर कोई सीक्रेट है तो उन्हें बड़ा दिल दिखाते हुए दुनिया से ये साझा करना चाहिए.’

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