नयी दिल्ली, 26 अगस्त (भाषा) प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार को आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस के गिरफ्तार किये गए विधायक जीवन कृष्ण साहा ने पश्चिम बंगाल में सहायक शिक्षकों के पद पर नौकरी दिलाने के बदले में अयोग्य उम्मीदवारों से अपने सहयोगियों के साथ मिलकर भारी मात्रा में धन इकट्ठा करने के लिए एक एजेंट के रूप में काम किया।
मुर्शिदाबाद जिले के बुरवान विधानसभा क्षेत्र से विधायक साहा को सोमवार को संघीय जांच एजेंसी ने उनके आवास पर छापेमारी के बाद हिरासत में लिया था। छापेमारी उनके सहयोगियों और प्रसन्न कुमार रॉय नामक एक कथित बिचौलिए के परिसरों पर भी की गई थी।
विशेष धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) अदालत ने सोमवार को उन्हें 6 दिनों के लिए ईडी की हिरासत में भेज दिया।
यह जांच पश्चिम बंगाल सरकार के विद्यालयों में सहायक अध्यापकों (कक्षा नौ-12वीं) की कथित अवैध नियुक्तियों से संबंधित है और आरोप है कि ऐसा पश्चिम बंगाल केंद्रीय विद्यालय सेवा आयोग (एसएससी) के अधिकारियों के साथ आपराधिक षड्यंत्र के तहत किया गया।
इस साल अप्रैल में, उच्चतम न्यायालय ने एसएससी द्वारा शिक्षकों और कर्मचारियों के रूप में नियुक्त किए गए 25,000 से ज़्यादा उम्मीदवारों की नियुक्तियों को धोखाधड़ी करार देते हुए रद्द कर दिया था।
ईडी ने एक बयान में आरोप लगाया कि साहा ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर सहायक शिक्षक के पद पर नौकरी दिलाने के बदले अयोग्य उम्मीदवारों से भारी रकम वसूलने के लिए एक एजेंट के रूप में काम किया। ईडी ने कहा, ‘अपराध की आय (अवैध धन) उनके अपने और उसकी पत्नी के बैंक खातों में जमा की गई थी।’
एजेंसी ने कहा कि विभिन्न अभ्यर्थियों ने ईडी के पास दर्ज अपने बयानों में नियुक्तियों के बदले साहा को ‘सीधे’ नकद भुगतान करने की ‘पुष्टि’ की है।
एजेंसी ने यह भी कहा कि छापेमारी के दौरान साहा ने परिसर से भागने की कोशिश की और अपने मोबाइल फोन को नाले में फेंककर/छिपाकर सबूत नष्ट करने की कोशिश की, जिसे बाद में तलाशी दल ने बरामद कर लिया।
एजेंसी ने कहा है कि इस मामले में अपराध की आय ‘सैकड़ों करोड़ रुपये’ में है और उसने अब तक 238 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की है और अप्रैल 2024 में आरोपपत्र भी दायर किया है।
भाषा
अमित माधव
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