गुवाहाटी, 29 जनवरी (भाषा) असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने बृहस्पतिवार को कहा कि ‘मिया’ टिप्पणी को लेकर उन पर निशाना साधने वालों को उच्चतम न्यायालय का वह आदेश पढ़ना चाहिए, जिसमें राज्य पर ‘चुपचाप और द्वेषपूर्ण जनसांख्यिकीय आक्रमण’ का उल्लेख किया गया है।
मुख्यमंत्री ने हाल ही में एक बयान में कहा था कि राज्य में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान ‘मिया’ समुदाय के लोगों को ‘परेशान’ किया जा रहा है, क्योंकि उन्हें असम में मतदान करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
शर्मा ने अवैध रूप से भारत में दाखिल होने वाले बांग्लादेशी मुसलमानों के लिए ‘मिया’ शब्द का इस्तेमाल किया है।
उन्होंने दावा किया कि एसआईआर की इस प्रक्रिया में किसी भी असमिया व्यक्ति- हिंदू या मुस्लिम- को किसी भी प्रकार की समस्या का सामना नहीं करना पड़ रहा है।
विपक्षी दलों ने शर्मा की इस टिप्पणी के लिए उनकी आलोचना की है।
मुख्यमंत्री शर्मा ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘जो लोग ‘मिया’ पर मेरी टिप्पणी के लिए मुझ पर निशाना साध रहे हैं, उन्हें यह पढ़ना चाहिए कि उच्चतम न्यायालय ने असम के बारे में क्या कहा है।’’
असम में अवैध रूप से दाखिल होने वाले बांग्लादेशी मुसलमानों को ‘मिया’ कहा जाता है।
उन्होंने वर्ष 2005 में उच्चतम न्यायालय द्वारा अवैध प्रवासी (न्यायाधिकरण द्वारा निर्धारण) अधिनियम, 1983 (आईएमडीटी अधिनियम) को रद्द करते हुए दिए गए फैसले का हवाला देते हुए यह बात कही।
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि देश की शीर्ष संवैधानिक अदालत ने ‘जनसांख्यिकीय आक्रमण’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया और क्षेत्र तथा राष्ट्रीय एकता के संभावित नुकसान की चेतावनी दी और न्यायालय ने यह स्वीकार किया कि वास्तविकता न तो घृणा है, न ही सांप्रदायिकता है, और न ही यह किसी समुदाय पर हमला है।
निर्वाचन आयोग ने त्रुटिरहित मतदाता सूची तैयार करने के लिए असम में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण कराने का निर्देश दिया था।
निर्वाचन आयोग ने उच्चतम न्यायालय की निगरानी में असम में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण का आदेश दिया था, जिसका उद्देश्य नागरिकता का सत्यापन करना था। यह प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है।
असम में नागरिकता अधिनियम के तहत नागरिकता संबंधी अलग प्रावधान हैं।
भाषा रवि कांत सुरेश
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