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Monday, 2 March, 2026
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बंगाल में एसआईआर से पहले ही एक करोड़ मतदाताओं के नाम हटाने का लक्ष्य तय था : अभिषेक बनर्जी

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कोलकाता, एक मार्च (भाषा) पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के सांसद एवं महासचिव अभिषेक बनर्जी ने राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया के बाद रविवार को निर्वाचन आयोग पर अपना हमला तेज करते हुए आरोप लगाया कि ‘‘एक करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम हटाने का लक्ष्य प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही तय कर लिया गया था’’।

तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव ने घोषणा की कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एसआईआर प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं के नाम ‘‘मनमाने तरीके से हटाने’’ के विरोध में छह मार्च को धरना देंगी।

बनर्जी ने एसआईआर के बाद अंतिम मतदाता सूची के पहले चरण के प्रकाशन के एक दिन बाद यहां आयोजित संवाददाता सम्मेलन में दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि ‘‘1.2 करोड़ नाम’’ मतदाता सूची से हटा दिए जाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि हटाए गए नामों और ‘‘विचाराधीन’’ रखे गए मतदाताओं की कुल संख्या अब उस आंकड़े के लगभग बराबर है।

उन्होंने कहा, ‘‘पश्चिम बंगाल में एक करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम हटाने का लक्ष्य एसआईआर शुरू होने से पहले ही तय कर लिया गया था। भाजपा नेताओं ने बार-बार कहा था कि 1.2 करोड़ नाम हटाए जाएंगे। हटाए गए नामों और विचाराधीन नामों को मिलाकर देखें तो यह संख्या लगभग 1.2 करोड़ के करीब पहुंच जाती है।’’

बनर्जी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी, भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार और केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर द्वारा मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने पर पहले की गईं टिप्पणियों का उल्लेख किया।

उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘एसआईआर शुरू होने से पहले ही इन नेताओं ने कहा था कि एक करोड़ से 1.25 करोड़ मतदाताओं के नाम हटा दिए जाएंगे। उन्होंने एक लक्ष्य निर्धारित किया था। निर्वाचन आयोग उसी के अनुसार कार्रवाई कर रहा है।’’

बनर्जी ने संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करने से पहले एक वीडियो क्लिप भी दिखाई जिसमें कथित तौर पर भाजपा नेताओं को लगभग 1.2 करोड़ के आंकड़े का जिक्र करते हुए सुना जा सकता है।

तृणमूल महासचिव ने भाजपा पर ‘‘बदले की राजनीति’’ करने का आरोप लगाया और कहा कि केंद्र की सत्तारूढ़ पार्टी को वोट न देने वालों के नाम चुनिंदा रूप से हटाए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘भाजपा स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के माध्यम से चुनाव नहीं जीत सकती। इसलिए वह निर्वाचन आयोग का उपयोग करके वास्तविक मतदाताओं को हटाकर चुनाव परिणाम को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है।’’

बनर्जी ने कहा कि इस तरह की कोशिशों के बावजूद भाजपा को चुनावी रूप से कोई फायदा नहीं होगा।

उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘चाहे आप एसआईआर कराएं या एफआईआर दर्ज कराएं, 2026 में आपकी सीट 50 से नीचे ही रहेंगी। मैंने यह बात एक साल पहले भी कही थी और आज फिर दोहरा रहा हूं।’’

बनर्जी ने अपने इस दावे को दोहराया कि भाजपा विधानसभा चुनाव में 50 सीट के आंकड़े को पार नहीं कर पाएगी।

तृणमूल नेता ने एसआईआर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाया। उन्होंने सवाल किया कि आयोग ने उन आंकड़ों को क्यों नहीं प्रकाशित किया जिससे जानकारी मिले कि एसआईआर के दौरान कितने ‘‘रोहिंग्या और बांग्लादेशी’’ पाए गए, जबकि भाजपा नेताओं द्वारा अवैध घुसपैठियों द्वारा राज्य की जनसांख्यिकी को बदलने के बार-बार आरोप लगाए जा रहे हैं।

बनर्जी ने सवाल किया, ‘‘अगर इस पूरे अभियान का मकसद घुसपैठियों की पहचान करना था, तो निर्वाचन आयोग यह क्यों नहीं बता रहा कि कितने रोहिंग्या और बांग्लादेशी पकड़े गए हैं?’’

भारतीय महिला क्रिकेट टीम की सदस्य ऋचा घोष को ‘विचाराधीन’ श्रेणी में शामिल करने को लेकर निर्वाचन आयोग पर निशाना साधते हुए बनर्जी ने कहा, ‘‘अगर ऋचा घोष का नाम विचाराधीन है, तो भारत की विश्वकप जीत भी विचाराधीन है।’’

बनर्जी ने सवाल किया कि निर्धारित समयसीमा समाप्त होने के बाद भी फॉर्म-7 आवेदनों के माध्यम से नाम हटाने की प्रक्रिया अब भी कैसे जारी है।

उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ‘‘भाजपा की ओर से’’ काम कर रहे हैं।

तृणमूल नेता ने संकेत दिया कि पार्टी इस मुद्दे पर एक बार फिर उच्चतम न्यायालय का रुख करेगी।

उन्होंने कहा कि पार्टी एसआईआर के बाद प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची को उच्चतम न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करेगी।

उनकी यह टिप्पणी निर्वाचन आयोग द्वारा एसआईआर के बाद अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित किए जाने के एक दिन बाद आई।

निर्वाचन आयोग द्वारा शनिवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल नवंबर में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) शुरू होने के बाद मतदाताओं की संख्या में लगभगत 8.3 प्रतिशत यानी 63.66 लाख की कमी आई है। प्रक्रिया से पहले राज्य में कुल मतदाताओं की संख्या 7.66 करोड़ थी जो घटकर करीब 7.04 करोड़ रह गई है।

भाषा धीरज नेत्रपाल

नेत्रपाल

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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