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Sunday, 4 January, 2026
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‘वे मुझे मार देंगे’ : पिता की FIR में रैगिंग और यौन उत्पीड़न के आरोप, धर्मशाला की छात्रा की मौत

19-वर्षीय छात्रा की मौत के बाद 4 छात्राओं और एक प्रोफेसर पर केस दर्ज किया गया है, लेकिन पुलिस का कहना है कि पोस्टमॉर्टम या मौत के कारण बताने वाली मेडिकल रिपोर्ट न होने से जांच प्रभावित हो रही है.

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नई दिल्ली: हिमाचल प्रदेश पुलिस ने गुरुवार को धर्मशाला के एक सरकारी डिग्री कॉलेज की चार छात्राओं और एक प्रोफेसर के खिलाफ मामला दर्ज किया है. आरोप है कि 19-वर्षीय दलित छात्रा को रैगिंग, जातिसूचक गालियों और यौन उत्पीड़न के जरिए इस कदर प्रताड़ित किया गया कि उनकी मौत हो गई.

एफआईआर छात्रा की 26 दिसंबर को लुधियाना के एक अस्पताल में मौत के कुछ दिन बाद दर्ज की गई. उन्हें 25 दिसंबर को भर्ती कराया गया था और अगले दिन उनकी मौत हो गई.

शिकायत के अनुसार, पिछले साल सितंबर में रैगिंग का शिकार होने के बाद वे पहली बार बीमार पड़ी थीं. शिकायत में कहा गया है कि तब भी उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था और बाद में वह लौटीं, लेकिन पूरी तरह ठीक नहीं हो पाई. 25 दिसंबर को उनकी हालत फिर बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें लुधियाना अस्पताल ले जाया गया.

पिता की शिकायत पर धर्मशाला डिग्री कॉलेज की चार छात्राओं—हर्षिता, कोमोलिका, आकृति और गौरी, के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 115(2) (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना) और 3(5) (साझा इरादा) तथा हिमाचल प्रदेश शैक्षणिक संस्थान (रैगिंग निषेध) अधिनियम, 2009 की धारा 3 के तहत मामला दर्ज किया गया है.

राज्य पुलिस ने प्रोफेसर अशोक कुमार के खिलाफ बीएनएस की धारा 75 (यौन उत्पीड़न) भी लगाई है, क्योंकि पीड़िता के पिता ने उन पर दूसरे वर्ष की बीए छात्रा का यौन उत्पीड़न करने का आरोप लगाया है.

प्रोफेसर कुमार ने आरोपों से इनकार किया है. उन्होंने फोन पर दिप्रिंट से कहा, “मैं दूसरे वर्ष में भूगोल नहीं पढ़ाता था और सितंबर में उनसे मेरी सिर्फ एक बातचीत हुई थी, जब वह बैक पेपर के नतीजे लंबित होने के बावजूद दूसरे वर्ष में दाखिले को लेकर एक अन्य प्रोफेसर से बहस कर रही थीं.”

मौत से पहले रिकॉर्ड किए गए वीडियो में छात्रा ने यह भी आरोप लगाया था कि उन्हें जातिसूचक गालियां दी जाती थीं.

नॉर्दर्न रेंज की डीआईजी सौम्या संबासिवन ने कहा कि मामले की जांच के लिए पुलिस उपाधीक्षक के नेतृत्व में एक टीम बनाई गई है.

सौम्या ने दिप्रिंट को बताया, “एक मेडिकल बोर्ड के गठन के आदेश दिए गए हैं, जो सितंबर से अब तक पीड़िता के इलाज से जुड़े सभी रिकॉर्ड की जांच करेगा, जब पिता के अनुसार वह पहली बार बीमार पड़ी थी. मौत के कारण पर मेडिकल बोर्ड की राय के आधार पर जांच की दिशा तय होगी.”

हालांकि, वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि जांच में कई मुश्किलें हैं, जैसे पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट या मौत का कारण बताने वाली मेडिकल रिपोर्ट का न होना. उन्होंने कहा कि आपराधिक जांच आगे बढ़ाने के लिए ये अनिवार्य होती हैं.

इस बीच, उच्च शिक्षा की केंद्रीय नियामक संस्था विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने मामले का संज्ञान लेते हुए एक तथ्य-जांच टीम गठित की है.

यूजीसी ने बयान में कहा, “यूजीसी एंटी-रैगिंग हेल्पलाइन ने मीडिया रिपोर्टों के आधार पर स्वतः संज्ञान लेते हुए शिकायत दर्ज की है, जिसमें सरकारी डिग्री कॉलेज, धर्मशाला में रैगिंग के आरोपों के चलते एक छात्रा की कथित आत्महत्या का ज़िक्र है. पुलिस जांच जारी है. यूजीसी ने छात्रा की दुखद मौत का गंभीर संज्ञान लिया है और घटना की जांच के लिए एक फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी बनाई है. यूजीसी आश्वस्त करता है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और कड़ी कार्रवाई की जाएगी, क्योंकि छात्रों की सुरक्षा सर्वोपरि है.”

छात्राओं और प्रोफेसर पर लगे विशिष्ट आरोपों पर टिप्पणी से इनकार करते हुए धर्मशाला कॉलेज के प्रिंसिपल राकेश पठानिया ने कहा कि पीड़िता ने दूसरे वर्ष में दाखिला नहीं लिया था और वह आखिरी बार जुलाई में कॉलेज आई थीं. उन्होंने दिप्रिंट से कहा, “रैगिंग के आरोप में जिन तीन छात्राओं का नाम पहले आया था, वे सभी अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से हैं. प्रोफेसर कुमार के खिलाफ पहले कभी कोई शिकायत नहीं आई है.”

उन्होंने कहा कि कॉलेज प्रशासन ने मृतका से जुड़े सभी रिकॉर्ड पुलिस को सौंप दिए हैं और जांच में सहयोग कर रहा है.

नर्स से बातचीत

गुरुवार को पुलिस को दी गई शिकायत में पीड़िता के पिता ने कहा कि 18 सितंबर की दोपहर उनकी बेटी ने फोन कर रैगिंग और हमले की जानकारी दी थी. उन्होंने कहा कि इसके बाद उन्होंने अपने बेटे से बहन को घर लाने को कहा.

एफआईआर में, जिसकी एक प्रति दिप्रिंट ने देखी है, पिता ने बताया कि वह सितंबर में बेटी द्वारा बताए गए तीन छात्रों से बात करना चाहते थे, जिनमें से एक ने कथित तौर पर उनकी बेटी के गले पर चाकू रख दिया था और उनका पीछा किया था.

पिता ने शिकायत में कहा, उन्होंने 19 सितंबर को कॉलेज जाने की योजना बनाई, लेकिन दिन ढल चुका था. अगले दिन पीड़िता को बुखार हो गया, क्योंकि रैगिंग की घटना के बाद वह पूरे दिन रोती रहीं.

अगले दिन पीड़िता ने कॉलेज न लौटने की ज़िद्द की और धर्मशाला शहर में एक कंप्यूटर कोर्स में दाखिला दिलाने को कहा.

पिता ने कहा, “मैंने उसे वहां (कंप्यूटर सेंटर) में दाखिला दिलाया और फिर उसे घर ले आया. घर आने के बाद वह कुछ परेशान रहने लगी और अजीब बातें कहने लगी, जैसे ‘वे मुझे मार देंगे, पापा’. इस पर परिवार ने उसे बहुत समझाया, लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ. खराब तबीयत देखकर मैं उसे अस्पताल ले गया.”

उन्होंने आगे बताया कि बाद में उसे राज्य के कम से कम चार अस्पतालों में ले जाया गया, जिसके बाद पड़ोसी राज्य पंजाब के पठानकोट जिले के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया.

इसी अस्पताल में पीड़िता ने प्रोफेसर अशोक कुमार द्वारा कथित यौन उत्पीड़न का खुलासा किया. नर्स और पीड़िता के बीच रिकॉर्ड की गई बातचीत में, पिता के अनुसार, बेटी ने आरोप लगाया कि अशोक कुमार उनके शरीर के अनुचित हिस्सों, छाती और निजी अंगों, को छूते थे. बातचीत में पीड़िता ने चौथी छात्रा का नाम भी लिया.

जब पीड़िता की हालत में सुधार हुआ, तो वे घर लौटीं और उन्होंने बाल काटे जाने और बोतलों से सिर पर हमला किए जाने सहित अन्य घटनाएं भी बताईं.

हालत फिर बिगड़ने पर 25 दिसंबर को परिवार उन्हें लुधियाना के एक निजी अस्पताल ले गया, जहां से उसे शहर के दयानंद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल रेफर किया गया. वहां पहुंचने पर उसे मृत घोषित कर दिया गया.

पिता ने पुलिस से शिकायत में कहा, “(उसकी) मौत के सदमे से उबरने के बाद मुझे याद आया कि बीमारी के दौरान (उसने) मुझे बताया था कि हर्षिता ने ऊपर नाम ली गई लड़कियों के साथ मिलकर कॉलेज में रैगिंग के जरिए उसे परेशान किया था और उसके बाल भी काटे थे.”

उन्होंने आगे कहा, “इस प्रकार हर्षिता, आकृति, कोमोलिका और गौरी ने मेरी बेटी के साथ रैगिंग के जरिए उत्पीड़न का अपराध किया है और धर्मशाला कॉलेज में कार्यरत प्रोफेसर अशोक कुमार ने अश्लील हरकत का अपराध किया है, जिसकी जानकारी मैं अपनी बेटी के सदमे और बीमारी के कारण पहले पुलिस को नहीं दे सका. आज मैंने पुलिस को सूचित किया है. उपरोक्त पांचों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए.”

‘शुरुआत में यौन उत्पीड़न की शिकायत नहीं’

कांगड़ा के पुलिस अधीक्षक अशोक रत्तन ने कहा कि पीड़िता के पिता ने सबसे पहले 20 दिसंबर को मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर रैगिंग की शिकायत की थी, लेकिन उसमें यौन उत्पीड़न के आरोप नहीं थे.

कांगड़ा एसपी अशोक रत्तन ने शुक्रवार को प्रेस से कहा, “20 दिसंबर को सीएम हेल्पलाइन के जरिए जो मामला आया था, उसकी जांच में यौन उत्पीड़न के आरोप शामिल नहीं थे. हालांकि, हम इस समय किसी भी आरोप से इनकार नहीं कर रहे हैं. जैसे-जैसे जांच में तथ्य सामने आएंगे, हम उनका संज्ञान लेंगे और उचित कार्रवाई करेंगे. जांच दिन-प्रतिदिन के आधार पर की जाएगी.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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