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Thursday, 2 April, 2026
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न्यायालय ने कल्याण कोष संबंधी याचिका पर केंद्र और बीसीआई से जवाब मांगा

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नयी दिल्ली, 25 मार्च (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) द्वारा दायर एक याचिका पर बुधवार को केंद्र सरकार और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) सहित बार निकायों से जवाब मांगा जिसमें उच्चतम न्यायालय के समक्ष पेश होने वाले अधिवक्ताओं के लिए एक समर्पित कल्याण कोष के गठन का अनुरोध किया गया है।

न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक आराधे की पीठ ने याचिका पर केंद्र सरकार और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) के अलावा बार काउंसिल आफ दिल्ली (बीसीडी) और उच्चतम न्यायालय के महासचिव को भी नोटिस जारी किया और कहा कि ऐसे कोष का गठन ‘समय की आवश्यकता’ है।

उच्चतम न्यायालय के बार निकाय का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता एवं एससीबीए अध्यक्ष विकास सिंह ने दलील दी कि अधिवक्ता कल्याण कोष अधिनियम में उच्चतम न्यायालय के वकीलों को लाभ देने के संबंध में वैधानिक खामी है।

उन्होंने कहा, ‘अधिवक्ता कल्याण कोष अधिनियम में उच्चतम न्यायालय में वकालतनामे का उल्लेख है, लेकिन धन दिल्ली बार काउंसिल को जाएगा।’

उन्होंने अधिनियम के अंतर्गत ‘एडवोकेट’ की परिभाषा का उल्लेख किया, जो उसे उन वकीलों तक सीमित रखती है जो ‘स्टेट बार काउंसिल द्वारा तैयार और अनुरक्षित राज्य सूची’ में पंजीकृत हैं या ‘स्टेट बार एसोसिएशन या स्टेट एडवोकेट्स एसोसिएशन के सदस्य’ हैं। उन्होंने कहा, ‘‘एससीबीए पूरी तरह से इसके दायरे से बाहर है।’’

याचिका में इस कमी को दूर करने के लिए प्रस्तावित ‘नियम 15ए’ को शामिल करने हेतु उच्चतम न्यायालय नियमों में संशोधन करने के साथ-साथ नियमों के परिभाषा खंड और अनुसूची तीन में संशोधन करने का अनुरोध किया गया है।

न्यायमूर्ति नरसिम्हा ने कहा, ‘उच्चतम न्यायालय नियम 15ए में कुछ बदलाव किया जा सकता है। निश्चित रूप से यह समय की मांग है।’

वकील कल्याण कोष अधिनियम की धारा 27 के तहत प्रत्येक वकील को उच्चतम न्यायालय सहित प्रत्येक अदालत में दाखिल किए जाने वाले वकालतनामों पर कल्याण स्टाम्प लगाना अनिवार्य है। इन स्टाम्प से प्राप्त राशि संबंधित स्टेट बार काउंसिल के कल्याण कोष में जाती है। उच्चतम न्यायालय के वकालतनामे से प्राप्त राशि दिल्ली बार काउंसिल वेल्फेयर फंड में जाती है, जिससे एससीबीए सदस्यों को कोई संरक्षण नहीं मिलता।

याचिका में इस बात को और स्पष्ट करते हुए कहा गया है, ‘इससे एक असमानता पैदा होती है, जहां उच्चतम न्यायालय में कार्यरत वकील, जो अक्सर अपने मूल स्टेट बार काउंसिल की स्थानीय कल्याण योजनाओं से अलग-थलग रहते हैं, चिकित्सा आपात स्थितियों या अप्रत्याशित कठिनाइयों के दौरान सुरक्षा कवच से वंचित रह जाते हैं।’

याचिका में वित्तीय निष्ठा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए भारत के प्रधान न्यायाधीश या किसी मनोनीत न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली एक समिति द्वारा प्रबंधित एससीबीए कल्याण कोष के गठन का भी प्रस्ताव है।

इसमें उच्चतम न्यायालय में दाखिल प्रत्येक वकालतनामे पर 500 रुपये का अनिवार्य ‘वकील कल्याण स्टाम्प’ लगाने का भी प्रस्ताव है, जिसकी राशि विशेष रूप से एससीबीए कल्याण कोष के लिए आरक्षित हो।

भाषा अमित नरेश

नरेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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