गुवाहाटी, 21 फरवरी (भाषा) गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने असम सरकार को निर्देश दिया है कि वह यह सुनिश्चित करे कि पिछले साल जून में गोलपाड़ा जिले में बेदखली अभियान से प्रभावित परिवारों को पीने योग्य पानी, बुनियादी चिकित्सा और स्वच्छता सुविधाएं तथा उचित मूल्य की दुकानों के माध्यम से खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाए।
इसने कहा कि ‘जीवन के अधिकार’ में ‘‘गरिमापूर्ण जीवन जीने का अधिकार, पीने योग्य पानी का अधिकार, स्वच्छता का अधिकार, साथ ही बुनियादी चिकित्सा सुविधाओं का अधिकार’’ शामिल है।
यह आदेश न्यायमूर्ति देवाशीष बरुआ के नेतृत्व वाली पीठ ने 16, 17 और 18 जून, 2025 को हाशिला बील (आर्द्रभूमि) क्षेत्र में की गई बेदखली से प्रभावित 60 याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर एक रिट याचिका पर दिया।
याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि बच्चों सहित 566 परिवारों को कुछ अन्य व्यक्तियों से संबंधित पट्टा भूमि के एक छोटे से भूखंड में शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि याचिकाकर्ताओं सहित प्रभावित परिवार आठ महीने से अधिक समय से घोर अभाव की स्थिति में रह रहे हैं, जहां पीने योग्य पानी, स्वच्छता, भोजन या उचित चिकित्सा देखभाल की कोई उपलब्धता नहीं है।
न्यायमूर्ति बरुआ ने याचिकाकर्ता और प्रतिवादियों के अधिवक्ताओं द्वारा प्रस्तुत तर्कों को सुनने के बाद अपने आदेश में कहा, ‘‘इस न्यायालय की राय है कि जीवन के अधिकार में गरिमा के साथ जीने का अधिकार, पीने योग्य पानी का अधिकार, स्वच्छता का अधिकार और साथ ही बुनियादी चिकित्सा सुविधाओं का अधिकार शामिल है। इस न्यायालय की यह भी राय है कि 2013 के अधिनियम के तहत पात्र व्यक्तियों को लाभ प्रदान किए जाने हैं।’’
यहां ‘2013 के अधिनियम’ से तात्पर्य राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 से है।
अदालत ने आदेश दिया कि याचिकाकर्ताओं के साथ-साथ अन्य प्रभावित परिवारों को भी पीने योग्य पानी और बुनियादी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
इसने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे ‘‘एक उचित अस्थायी स्वच्छता तंत्र स्थापित करने के लिए उपाय तलाशें ताकि याचिकाकर्ता और उक्त पट्टा भूमि के छोटे भूखंड पर रह रहे अन्य परिवार इसका उपयोग कर सकें’’।
अदालत ने संबंधित अधिकारियों से नौ मार्च या उससे पहले हलफनामे दाखिल कर अपना पक्ष स्पष्ट करने को भी कहा है।
भाषा
नेत्रपाल माधव
माधव
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