नयी दिल्ली, दो अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस महानिदेशकों (डीजीपी) को निर्देश दिया है कि वे हिरासत में लिए गए व्यक्तियों के लिए उपलब्ध सभी सुरक्षा उपायों का कड़ाई से पालन करें।
न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने कहा कि पुलिस राज्य तंत्र का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसका समाज और विशेष रूप से व्यक्तियों की सुरक्षा पर सीधा असर पड़ता है।
इसने कहा, ‘‘इसलिए, पुलिस में व्यक्तियों और समाज का विश्वास बनाए रखना बहुत आवश्यक है।’’
पीठ ने 26 मार्च के अपने आदेश में कहा, ‘‘प्रथम दृष्टया इसे देखने से विश्वास पैदा नहीं होता। बल्कि, ऐसा प्रतीत होता है कि इसे केवल औपचारिकता के तौर पर प्रस्तुत किया गया है।’’
शीर्ष अदालत की यह टिप्पणी उस समय आई जब एक व्यक्ति ने आरोप लगाया कि हरियाणा पुलिस ने उसे गिरफ्तारी कानून का उल्लंघन करते हुए हिरासत में लिया और हिरासत के दौरान तथा पुलिस थाने के अंदर उसके साथ शारीरिक दुर्व्यवहार भी किया गया।
इस दलील के समर्थन में याचिकाकर्ता के वकील ने अपने भाई द्वारा उसी दिन पूर्वाह्न लगभग 11.24 बजे संबंधित पुलिस अधीक्षक को अपने भाई की कथित गिरफ्तारी के संबंध में भेजे गए ई-मेल का हवाला दिया।
वकील ने आरोप लगाया कि पुलिस थाने में शारीरिक यातना तब दी गई जब उच्च अधिकारियों को ई-मेल भेजा गया और दो घंटे बाद लगभग 1.30 बजे प्राथमिकी दर्ज की गई।
उच्चतम न्यायालय ने संबंधित पुलिस अधिकारियों को भविष्य में सतर्क रहने की चेतावनी दी।
भाषा
देवेंद्र पवनेश
पवनेश
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