नयी दिल्ली, 17 फरवरी (भाषा) केंद्रीय सूचना आयोग ने गृह मंत्रालय के उस फैसले को सही ठहराया है जिसमें ‘शत्रु संपत्ति’ के तहत विचाराधीन संपत्तियों के बारे में सूचना का अधिकार कानून के तहत मांगी गई जानकारी को यह कहते हुए देने से मना कर दिया गया था कि इससे जांच बाधित हो सकती है।
पाकिस्तान और चीन की नागरिकता लेने वाले लोगों द्वारा छोड़ी गई संपत्तियों को शत्रु संपत्ति कहा जाता है जो अधिकतर 1947 से 1962 के बीच छोड़ी गई थीं।
मुख्य सूचना आयुक्त राजकुमार गोयल ने भारत के शत्रु संपत्ति के संरक्षक कार्यालय के इस रुख से सहमति जताई कि मांगी गई जानकारी आरटीआई कानून की धारा 8(1)(एच) के तहत छूट वाली है, जो “जांच की प्रक्रिया में रुकावट आने’’ की स्थिति बनने पर जानकारी देने पर रोक लगाती है।
आवेदक ने एक व्यक्ति की शत्रु संपत्तियों के बारे में विवरण मांगा था।
आवेदक ने पूछा, “…आपके कार्यालय में मौजूद रिकॉर्ड के अनुसार, गोंडा के रहने वाले अब्दुल कादिर के बेटे अब्दुल सईद बैरिस्टर किस साल भारत छोड़कर पाकिस्तान गए थे? कृपया संबंधित रिकॉर्ड की कॉपी दें।” आवेदक ने यह भी जानकारी मांगी थी कि “अब्दुल सईद बैरिस्टर की कौन सी संपत्तियों को शत्रु संपत्ति घोषित किया गया है”।
भाषा वैभव पवनेश
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