नयी दिल्ली, नौ जनवरी (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने रेलवे के एक ठेके के संबंध में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कराने का झूठा आश्वासन देकर एक व्यापारी से दो करोड़ रुपये की ठगी करने के आरोपी को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया है।
इसके साथ ही उच्च न्यायालय ने कहा कि शिकायतकर्ता को धोखा देने के लिए ऐसे संवैधानिक अधिकारियों के नामों का इस्तेमाल करना अपराध की गंभीरता को बढ़ा देता है।
अदालत ने अग्रिम जमानत की याचिका खारिज कर दी और कहा कि मामले के सभी तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए, आरोपी अनीश बंसल को अग्रिम जमानत देने का कोई आधार नहीं बनता है। इसके साथ ही अदालत ने कहा कि पूरी साजिश में सभी आरोपियों की की विशिष्ट भूमिका का पता लगाया जाना जरूरी है।
न्यायमूर्ति स्वर्णकांत शर्मा ने कहा, ‘इसके अलावा, यह अदालत यह भी गौर करती है कि आरोपी लोगों ने शिकायतकर्ता को बड़ी रकम देने के लिए प्रेरित करने की खातिर केंद्रीय गृह मंत्री के नाम का इस्तेमाल किया है, यह अच्छी तरह से जानते हुए कि उन्हें दिया जा रहा आश्वासन झूठा था।’’
अदालत ने अपने आदेश में आगे कहा, ‘यह आरोप अपराध की गंभीरता को बढ़ा देता है कि शिकायतकर्ता को धोखा देने के लिए ऐसे संवैधानिक प्राधिकारी और उनके परिवार के नामों का इस्तेमाल किया गया। इस संबंध में जांच करने की जरूरत है।’’
दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ ने भारतीय दंड संहिता के तहत धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक षडयंत्र के कथित अपराधों के लिए 2022 में एक मामला दर्ज किया था। पुलिस को शिकायत मिली थी कि शिकायतकर्ता व्यवसायी ने बंसल के जरिए बृजेश रतन नाम के एक अन्य व्यक्ति से मुलाकात की थी।
आरोप है कि रतन ने खुद को केंद्रीय गृह मंत्री के पुत्र का व्यापारिक भागीदार बताया और कहा कि उसके भाजपा नेता के साथ व्यापारिक संबंध हैं।
भाषा अविनाश माधव
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