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Thursday, 25 April, 2024
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टेक्निकल रेग्युलेटर ने यूनिवर्सिटी, कॉलेजों से वैदिक बोर्ड के छात्रों को मान्यता और एडमिशन देने को कहा

ये कदम अगस्त में एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज की तरफ से महर्षि संदीपणि राष्ट्रीय वेद संस्कृत शिक्षा बोर्ड को समकक्ष बोर्ड का दर्जा दिए जाने के बाद उठाया गया है.

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नई दिल्ली: तकनीकी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से कहा गया है कि हालिया मान्यता प्राप्त वैदिक बोर्ड से 10वीं और 12वीं की पढ़ाई करने वाले छात्रों की योग्यता को किसी भी अन्य नियमित स्कूल बोर्ड के समकक्ष मानें और उन्हें प्रवेश दें.

इस संबंध में एक सर्कुलर तकनीकी शिक्षा पर देश की सर्वोच्च नियामक संस्था अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) की तरफ से पिछले सप्ताह अपने सभी संबद्ध संस्थानों को भेजा गया है.

कक्षा 10 और कक्षा 12 की परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले इन छात्रों को क्रमशः वेद भूषण और वेद विभूषण प्रमाणपत्र मिलते हैं.

अब तक सिर्फ सीमित संख्या में ही उच्च शिक्षण संस्थान—जिनमें संस्कृत पढ़ाने वाले 17 विश्वविद्यालय शामिल हैं—प्रवेश के लिए दोनों प्रमाणपत्र स्वीकारते हैं. इनमें राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान (नई दिल्ली), राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ (तिरुपति), श्री वेंकटेश्वर वैदिक विश्वविद्यालय (तिरुपति), कर्नाटक संस्कृत विश्वविद्यालय (बेंगलुरु) आदि शामिल हैं.


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एआईसीटीई के सर्कुलर के बाद भविष्य में और उच्च शिक्षण संस्थानों की तरफ से इन दोनों प्रमाणपत्रों को स्वीकार किए जाने की उम्मीद है.

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अगस्त में भारतीय विश्वविद्यालयों के संघ (एआईयू) ने महर्षि संदीपणि राष्ट्रीय वेद संस्कृत शिक्षा बोर्ड (एमएसआरवीएसबीबी) को बोर्ड के ही समकक्ष (उच्च स्तर के डिग्री कोर्स के लिए किसी अन्य तृतीयक संस्थान से योग्यता को मान्यता) का दर्जा दिया था.

एआईयू को एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) विकसित करने का जिम्मा सौंपा गया था जिसका उपयोग विभिन्न गैर-मान्यता प्राप्त स्कूल बोर्डों को मान्यता प्रदान करने के लिए किया जा सकता हो. इसी प्रक्रिया के तहत इसने नवस्थापित एमएसआरवीएसबीबी को भी समकक्षता का दर्जा मिला है.

एमएसआरवीएसबीबी को नरेंद्र मोदी सरकार की तरफ से वैदिक शिक्षा के लिए पहले समर्पित बोर्ड के तौर पर बढ़ावा दिया गया है जो उज्जैन के महर्षि संदीपणि राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान (एमएसआरवीवीपी) के अधीन होगा. प्रतिष्ठान पहले से ही अपने अधीन वैदिक स्कूल चला रहा है और अब बोर्ड के तौर पर मंजूरी मिलने के बाद सभी स्कूल औपचारिक शिक्षा प्रणाली का हिस्सा बन जाएंगे.

एआईसीटीई के सर्कुलर में कहा गया है, ‘भारत में स्कूल बोर्डों की समकक्षता के लिए भारत सरकार द्वारा नामित निकाय एआईयू ने महर्षि संदीपणि राष्ट्रीय वेद संस्कृत शिक्षा बोर्ड (एमएसआरवीएसएसबी) की 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा योग्यता को समकक्षता का दर्जा दिया है और यह भारत के भीतर किसी अन्य नियमित स्कूल बोर्ड के तौर पर काम करेगा. इसलिए आपसे अनुरोध है कि शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए एमएसआरवीवीपी के छात्रों को मिलने वेद भूषण और वेद विभूषण प्रमाणपत्रों को क्रमशः 10वीं और 12वीं कक्षा के प्रमाणपत्र के बराबर मानें.’

एमएसआरवीवीपी की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, ‘प्रतिष्ठान वैदिक ज्ञान और संस्कृति और वैदिक अध्ययन के प्रचार-प्रसार में लगा’ है.

वेद विद्या प्रतिष्ठान की आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, छात्र अपने पाठ्यक्रम के एक भाग के रूप में वेदों और हिंदू शास्त्रों का अध्ययन करेंगे. उदाहरण के तौर पर, कक्षा 12 के छात्र ‘बृहदारण्यक उपनिषद’ का अध्ययन करेंगे, जो हिंदू धर्म के प्रमुख उपनिषदों में से एक है. उनके पाठ्यक्रम में आयुर्वेद का अध्ययन भी शामिल है.

(इस ख़बर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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