नागपट्टिनम (तमिलनाडु), 20 दिसंबर (भाषा) तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने शनिवार को आरोप लगाया कि केंद्र द्वारा एक बार फिर ‘‘हिंदी थोपने’’ का प्रयास किया जा रहा है और राज्य इसे कभी बर्दाश्त नहीं करेगा।
दिवंगत गायक और द्रमुक नेता नागोर ई. एम. हनीफा (1925-2015) की जन्म शताब्दी के अवसर पर एक कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए उदयनिधि ने कहा कि पार्टी के संस्थापक एम. करुणानिधि की तरह हनीफा स्वतंत्रता-पूर्व युग में पेरियार ई. वी. रामासामी के सुधारवादी लेखन से प्रभावित थे।
उन्होंने कहा कि जब पेरियार ने 1930 के दशक में हिंदी थोपने के खिलाफ ‘‘युद्ध’’ की घोषणा की, तो इन दोनों नेताओं ने इस संघर्ष में एकजुट होकर उनका साथ दिया।
उपमुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘आज के युवाओं को इस इतिहास का अध्ययन करना चाहिए। उन्हें यह जानना चाहिए कि हनीफा द्रविड़ आंदोलन के दर्शन की ओर कैसे आकर्षित हुए थे।”
अपनी अनूठी और लोकप्रिय आवाज के लिए मशहूर हनीफा ने अपने राजनीतिक गीतों के माध्यम से द्रमुक को और अधिक लोकप्रिय बनाया। द्रमुक की बड़ी राजनीतिक सभाओं की शुरुआत हमेशा हनीफा के गीतों से होती थी।
उदयनिधि ने कहा कि पेरियार और बाद में सी. एन. अन्नादुरई ने हिंदी थोपे जाने के खिलाफ लड़ाई लड़ी एवं तमिलनाडु हमेशा ऐसे संघर्षों में विजयी रहा।
उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान में केंद्र सरकार किसी न किसी रूप में ‘हिंदी थोपने’ का प्रयास कर रही है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार एक बार फिर अपनी त्रिभाषा नीति के माध्यम से हिंदी थोपने की कोशिश कर रही है और उसका कहना है कि वह लगभग 2,000 करोड़ रुपये तभी जारी करेगी जब राज्य त्रिभाषा नीति को स्वीकार करेगा।
उपमुख्यमंत्री ने कहा, ‘हमारे मुख्यमंत्री (एम. के. स्टालिन) ने स्पष्ट रूप से कहा है कि चाहे केंद्र सरकार 10,000 करोड़ रुपये (सिर्फ 2,000 करोड़ रुपये नहीं) ही क्यों न उपलब्ध कराए लेकिन हिंदी थोपने की अनुमति नहीं दी जाएगी।’
भाषा सुभाष राजकुमार
राजकुमार
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