नयी दिल्ली, सात मार्च (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने तमिलनाडु में प्रवासी मजदूरों पर हमलों के दावे संबंधी कथित झूठी सूचना देने के मामले में राज्य पुलिस द्वारा दर्ज एक प्राथमिकी में एक वकील को चेन्नई की अदालत का रुख करने के लिए 20 मार्च तक ट्रांजिट अग्रिम जमानत दे दी।
उच्च न्यायालय ने वकील प्रशांत कुमार उमराव को 13 दिनों के लिए राहत देते हुए कहा कि वह तमिलनाडु सरकार के वकील को अपना स्थाई पता और मोबाइल नंबर उपलब्ध कराने के साथ-साथ अपना ‘लाइव गूगल लोकेशन’ साझा करें।
उमराव के सत्यापित ट्विटर हैंडल के अनुसार, वह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की उत्तर प्रदेश इकाई के एक प्रवक्ता हैं।
न्यायमूर्ति जसमीत सिंह ने कहा, “मेरा विचार है कि याचिकाकर्ता को संबंधित क्षेत्रीय अदालत का रुख करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए। याचिका स्वीकार की जाती है। सक्षम स्थानीय अदालत का रुख करने के लिए याचिकाकर्ता को 20 मार्च तक ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी जाती है।”
पुलिस के मुताबिक, उमराव के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है, जिसमें दंगा भड़काने के इरादे से उकसाना, दुश्मनी और नफरत को बढ़ावा देना, शांति भंग करने के लिए उकसाने वाला बयान देना शामिल है। यह प्राथमिकी तमिलनाडु के थूथुकुडी सेंट्रल पुलिस थाने में दर्ज की गई है।
उमराव की पैरवी करने वाले अधिवक्ता कुशल कुमार और हर्ष आहूजा ने दलील दी कि उनके मुवक्किल को इस मामले में गिरफ्तार होने की आशंका है और जमानत के लिए स्थानीय अदालत का रुख करने के वास्ते उन्हें वक्त चाहिए।
शुरुआत में याचिकाकर्ता के वकीलों ने 12 हफ्ते की राहत मांगी थी। हालांकि, अदालत ने कहा याचिकाकर्ता को चेन्नई की अदालत का रुख करने के लिए वह केवल कुछ समय के लिए अग्रिम जमानत दे सकती है।
भाषा पारुल सुभाष
सुभाष
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.
