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Monday, 1 September, 2025
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स्वयंसेवक के परिवार स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग करें, निचले तबके के लोगों के साथ करें भोजन: भागवत

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जबलपुर (मप्र), 20 नवंबर (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने रविवार को स्वयंसेवकों के परिवारों से आह्वान किया कि वे स्वदेशी वस्तुओं का अधिकतम उपयोग करें और पश्चिमी परिवार प्रणाली से दूर रहें एवं सप्ताह में कम से कम एक बार अपने आसपास रहने वाले समाज के निचले तबके के लोगों के साथ बैठकर भोजन करें।

आरएसएस सरसंघचालक ने मध्यप्रदेश के महाकौशल क्षेत्र के संघ स्वयंसेवकों के परिवार के सदस्यों को संबोधित करते हुए यह बयान दिया। इस कार्यक्रम में भाग लेने एक प्रतिभागी ने फोन पर पीटीआई-भाषा को यह जानकारी दी।

जबलपुर शहर के मध्य स्थित एमएल बाई स्कूल के मैदान में आयोजित इस कार्यक्रम का प्रारंभ गौ पूजन, तुलसी पूजन, दीप प्रज्वलन और भारत माता को पुष्पांजली से हुआ।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा जारी विज्ञप्ति में कहा गया है, ‘‘भागवत ने कहा कि समाज में कुटुंब के नाते एक उदाहरण प्रस्तुत करना हमारा कर्तव्य बन गया है। स्वभाषा, स्वदेशी का आचरण, देश-समाज के लिए अपने धन-साधनों का उपयोग, सबकी देखरेख, सब प्रकार के योग्य आचरण की आज आवश्यकता है।’’

उसमें कहा गया है, ‘‘उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता का व्यवहार हर परिवार में होना आवश्यक है। अपने आस-पड़ोस, कुटुंब और कार्यस्थल में हमें समानता के आचरण को स्थापित करना है।’’

विज्ञप्ति में कहा गया, ‘‘भागवत ने कहा कि हमारे निकट रहने वाले परिवार किसी भी जाति के हों, वे हमारे आत्मीय व्यवहार के दायरे में होने चाहिए। हमारे यज्ञ हवन, पारिवारिक कार्यक्रमों में उनकी भी भागीदारी होनी चाहिए। सब प्रकार के भेद समाप्त होने चाहिए।’’

उसमें कहा गया है, ‘‘उन्होंने कहा कि संघ की शाखा, संघ के कार्यक्रमों में किसी की जाति नहीं पूछी जाती। सब साथ खाते-पीते हैं, मिलकर काम करते हैं। हर घर में ऐसा वातावरण बनाना है।’’

विज्ञप्ति के अनुसार भागवत ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण को हर परिवार की जीवनशैली से जोड़ना है। संघ प्रमुख का कहना था कि एक माता शिक्षित होती है तो पूरी एक पीढ़ी शिक्षित होती है।

भागवत ने कहा, ‘‘सबको समान अवसर उपलब्ध करवाना है। अपनेपन का आधार धन, प्रतिष्ठा, सफलता आदि नहीं होना चाहिए। संघ के प्रत्येक स्वयंसेवक के कुटुंब को अपने आसपास सकारात्मक-रचनात्मक वातावरण का निर्माण करना है।’’

वर्तमान जीवनशैली की बात करते हुए उन्होंने कहा कि परिवार में परस्पर संवाद होना चाहिए तथा दूर रहने वाले परिजनों को साल में एक दो बार एकत्रित होना चाहिए। संघप्रमुख का कहना था कि नई पीढ़ी को अपने परिवार के इतिहास, पूर्वजों, सगे संबंधियों, कुल स्थान, तीर्थ आदि के बारे में बतलाया जाना चाहिए।

संघ के पदाधिकारी ने कहा, ‘‘सरसंघचालक भागवत जी ने परिवारों से आग्रह किया कि वे प्रेम, भाईचारे एवं सद्भाव को और मजबूत करने के लिए सप्ताह में कम से कम एक बार साथ बैठकर भोजन करें। उन्होंने श्रोताओं से पुराने भारतीय संयुक्त परिवार के मूल्यों को आगे बढ़ाने और पश्चिमी परिवार प्रणाली की नकल करने से दूर रहने के लिए कहा।’’

उन्होंने बताया कि भागवत ने परिवारों से कहा, ‘‘वे अपने घर में काम करने वाले, अखबार लाने वाले, दूध लाने वाले, सफाई करने वाले आदि निचले तबके के लोगों के हालचाल की पूछताछ करें और सप्ताह में एक बार उनके साथ भोजन या नाश्ता करें। भागवत ने स्वयंसेवकों से अच्छे काम कर समाज के लिए रोल मॉडल बनने और जातिवाद को दूर करने के लिए काम करने को भी कहा।’’

संघ के पदाधिकारी के अनुसार संघ सदस्यों के परिवारों के साथ यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब आरएसएस विदेशी निर्मित वस्तुओं के उपयोग को हतोत्साहित करने और 2025 तक संघ के जनाधार को दोगुना करने के लिए देश के प्रत्येक घर तक पहुंचने के लिए प्रयास कर रहा है।

उन्होंने कहा कि संगठन की योजना अपने शताब्दी समारोह को भव्य तरीके से मनाने की है।

चार दिन जबलपुर में रहने के बाद भागवत का सोमवार को नागपुर लौटने का कार्यक्रम है। वह पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ की चार दिवसीय यात्रा के बाद यहां आए हैं।

भाषा सं रावत रावत राजकुमार

राजकुमार

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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