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Wednesday, 1 April, 2026
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श्रवणबेलगोला जैन मठ के प्रमुख स्वस्तिश्री चारुकीर्ति भट्टारक स्वामी का निधन

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बेंगलुरु, 23 मार्च (भाषा) श्रवणबेलगोला जैन मठ के प्रमुख स्वस्तिश्री चारुकीर्ति भट्टारक स्वामी का बृहस्पतिवार सुबह निधन हो गया। मठ के सूत्रों ने यह जानकारी दी।

सूत्रों ने बताया कि पिछले कुछ महीनों से भट्टारक स्वामी (73) का स्वास्थ्य ठीक नहीं था।

वर्ष 1981 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने मठ की अपनी यात्रा के दौरान भट्टारक स्वामी को ‘‘कर्मयोगी’’ की उपाधि दी थी।

भट्टारक स्वामी का जन्म तीन मई 1949 को कर्नाटक के उडुपी जिले के वारंग में हुआ। बचपन में उनका नाम रत्नवर्मा था। उन्होंने मैसूर विश्वविद्यालय से इतिहास में स्नातकोत्तर और बैंगलोर विश्वविद्यालय से दर्शनशास्त्र में एम.ए. किया था। भट्टारक स्वामी 1969 में संत बने और 1970 में श्रवणबेलगोला मठ के प्रमुख बने।

मठ के प्रमुख के रूप में वह 57 फुट ऊंची गोमेतेश्वर प्रतिमा का ‘महामस्तकाभिषेक’ करते थे जो 12 वर्ष में एक बार किया जाता है। वर्ष 1981, 1993, 2006, 2018 में महाभिषेक किया जा चुका है।

श्रवणबेलगोला जैन मठ भगवान बाहुबली की 57 फुट ऊंची प्रतिमा के लिए प्रसिद्ध है।

भट्टारक स्वामी मठ में सुबह की सैर की दौरान अचानक अचेत हो गये थे। उनके अनुयायी तुरंत उन्हें उपचार के लिए बेल्लूर क्रास स्थित आदिचुनचुनगिरी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस ले गए, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए ट्वीट किया कि कर्मयोगी स्वस्तिश्री चारुकीर्ति भट्टारक स्वामी के निधन के बारे में सुनकर उन्हें गहरा दुख हुआ।

उन्होंने कहा, ‘‘ राज्य को उनके निधन से अपूरणीय क्षति पहुंची है। भगवान उनकी आत्मा को शांति दे।’’

पूर्व प्रधानमंत्री एच. डी. देवगौड़ा और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की कर्नाटक इकाई के प्रमुख नलिन कुमार कतील ने भी उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है।

भाषा निहारिका पवनेश

पवनेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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