नयी दिल्ली, नौ फरवरी (भाषा) पश्चिम बंगाल की मुख्य विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सोमवार को राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर उच्चतम न्यायालय की टिप्पणियों और राज्य सरकार को दिए गए निर्देशों को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा लोगों को गुमराह करने की कोशिशों के खिलाफ एक ‘‘करारा जवाब’’ करार दिया। पार्टी ने कहा कि ममता बनर्जी के पास अब लोकतंत्र के मार्ग पर चलने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं है।
शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया था कि वह मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को पूरा करने में किसी को भी बाधा उत्पन्न करने की अनुमति नहीं देगी और पश्चिम बंगाल के पुलिस प्रमुख को निर्वाचन आयोग के उन आरोपों पर हलफनामा दाखिल करने को कहा कि शरारती तत्वों द्वारा उसके नोटिस जलाए गए थे।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची व न्यायमूर्ति एन वी अंजारिया की पीठ ने कहा कि अपने 19 जनवरी के आदेश में उसने पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी), प्रत्येक जिले के पुलिस अधीक्षकों और जिलाधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि कानून-व्यवस्था की कोई समस्या न हो और पूरी गतिविधि सुचारू रूप से चले।
इस घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा, ‘‘पीठ ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वह इस मामले में जो भी आदेश या स्पष्टीकरण आवश्यक होंगे, जारी करेगी, लेकिन एसआईआर प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं आने देगी… मुझे लगता है कि यह ममता बनर्जी को करारा जवाब है, जो एसआईआर प्रक्रिया को लेकर लोगों को गुमराह कर रही थीं।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी इस प्रक्रिया को ‘‘लोकतंत्र विरोधी’’ और पश्चिम बंगाल के खिलाफ ‘‘षड्यंत्र’’ बता रही हैं और इसे रोकने की मांग कर रही हैं।
पात्रा ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘ उच्चतम न्यायालय में भारतीय लोकतंत्र की बड़ी जीत हुई है और ममता बनर्जी द्वारा खेला जा रहा ‘पीड़ित कार्ड’ उनके हाथों से निकल गया है। एसआईआर मुद्दे पर बंगाल और देश को गुमराह करने वालों को आज उच्चतम न्यायालय में हार का सामना करना पड़ा है।’’
भाजपा के पश्चिम बंगाल मामलों के सह-प्रभारी अमित मालवीय ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा दायर याचिका पर न्यायालय की टिप्पणियां बनर्जी के लिए एक ‘बड़ा झटका’ है।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने न्यायालय की टिप्पणियों और निर्देशों को सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के लिए ‘‘करारा तमाचा’’ करार दिया।
भाषा
शुभम धीरज
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