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Friday, 1 March, 2024
होमदेश'सीलबंद कवर' की प्रथा को खत्म करना चाहता है सुप्रीम कोर्ट, कहा - 'यह निष्पक्ष न्याय के विपरीत है'

‘सीलबंद कवर’ की प्रथा को खत्म करना चाहता है सुप्रीम कोर्ट, कहा – ‘यह निष्पक्ष न्याय के विपरीत है’

सुप्रीम कोर्ट ने ओआरओपी योजना के सिलसिले में केंद्र सरकार से सीलबंद कवर नोट स्वीकार करने से इनकार कर दिया और कहा, 'यह अदालत में गोपनीयता नहीं हो सकती है.'

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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को ‘वन रैंक वन पेंशन’ (ओआरओपी) योजना के तहत पूर्व सैनिकों को पेंशन देने के सिलसिले में केंद्र सरकार से सीलबंद कवर नोट स्वीकार करने से इनकार कर दिया और कहा, ‘यह अदालत में गोपनीयता नहीं हो सकती है.’

जब अटॉर्नी जनरल आर.वेंकटरमनी ने चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने एक सीलबंद कवर पेश किया. चंद्रचूड़ ने इसे स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया और कहा कि इसे दूसरे पक्ष के साथ साझा किया जाना है.

इस पर वेंकटरमणि ने कहा कि नोट ‘गोपनीय’ था.

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने तब कहा, ‘मैं व्यक्तिगत रूप से सीलबंद लिफाफों के खिलाफ हूं. क्या होता है कि हम वो देखते हैं जो वह नहीं देखते. और हम उसे दिखाए बिना मामले का फैसला करते हैं. यह मूल रूप से न्यायिक प्रक्रिया के उलट हैं. अदालत में गोपनीयता नहीं हो सकती. कोर्ट को पारदर्शी होना चाहिए. केस डायरी में गोपनीयता समझ में आती है…अभियुक्त इसका हकदार नहीं है, या ऐसा कुछ जो सूचना के स्रोत को प्रभावित करता है या किसी के जीवन को प्रभावित करता है लेकिन यह हमारे फैसले के निर्देशों के अनुसार पेंशन का भुगतान है. इसमें बड़ी गोपनीयता क्या हो सकती है?’

जब महाधिवक्ता ने कहा कि कुछ ‘संवेदनशीलता के मुद्दे’ हैं तब सीजेआई चंद्रचूड़ ने टिप्पणी की, ‘जब आप विशेषाधिकार का दावा करते हैं तो हमें उस दावे का फैसला करना होगा.’

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उन्होंने कहा, ‘हमें इस सीलबंद कवर प्रक्रिया को खत्म करने की जरूरत है जिसका पालन सुप्रीम कोर्ट में किया जा रहा है क्योंकि तब हाई कोर्ट भी पालन करना शुरू कर देंगे. और यह मूल रूप से निष्पक्ष न्याय की मूल प्रक्रिया के विपरीत है.’

इन टिप्पणियों के बाद, वेंकटरमणि ने वह नोट पढ़ा जिसमें कहा गया था कि बजट परिव्यय खर्चों को पूरा करने के लिए काफी नहीं था.

गौरतलब है कि, ओआरओपी बकाया भुगतान के लिए समयसीमा का पालन नहीं करने के लिए पिछले मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने रक्षा मंत्रालय की आलोचना की है.

बकाया राशि 28 हज़ार करोड़ रुपए के दायरे में है और पेंशनभोगियों की संख्या लगभग 25 लाख है. वेंकटरमणि नोट में कहा गया है कि रक्षा मंत्रालय ने इस मामले को वित्त मंत्रालय के साथ उठाया था जिसने एक बार में बकाया राशि का भुगतान करने के बजाय अलग-अलग भुगतान का सुझाव दिया था.

इसके बाद पूर्व सैनिकों की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता हुजेफ़ा अहमदी ने कहा कि किश्तें मार्च 2019 में आनी थीं.

अहमदी ने कहा, ‘उन्होंने अपने जीवन के सबसे अच्छे वर्षों में देश की सेवा की है और ऐसा क्यों है कि वे सरकार की अंतिम प्राथमिकता हैं… वे अब कह रहे हैं कि वे अप्रैल 2024 में भुगतान करेंगे. यह बिल्कुल अनुचित है.’

बेंच ने इसके बाद कई दिशानिर्देश जारी किए, जिसमें केंद्र को 30 अप्रैल, 2023 को या उससे पहले पारिवारिक पेंशनरों और वीरता पुरस्कार विजेताओं को एक बार में भुगतान करने के लिए कहना शामिल है.

पूरा आदेश यहां पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.

(इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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