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अरविंद केजरीवाल और उपराज्यपाल अनिल बैजल /दिप्रिंट
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नई दिल्ली: पिछले चार सालों से चला आ रहा दिल्ली का बॉस कौन पर फैसला आ गया है. दिल्ली का भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो जो अधिकारियों के खिलाफ जांच करता है का नियंत्रण केंद्र के हाथ में ही रहेगा. ये फैसला अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के लिए बड़ा झटका है. गुरुवार को दो जजों की बेंच को केंद्र और राज्य सरकार में अधिकार को लेकर फैसला सुनाया गया लेकिन कुछ अधिकारों के मामलों पर दो जजों की बेंच में मतभेद होने के कारण इसे बड़ी बेंच के पास भेज दिया गया है.

बड़े अधिकारियों की ट्रांसफर पोस्टिंग उपराज्यपाल के हाथों में

अपना फैसला सुनाते हुए जस्टिस एके सीकरी ने कहा है कि ज्वांइट सेक्रेटरी और ऊपर के अधिकारियों की ट्रांसफर और पोस्टिंग उपराज्यपाल के हाथों में ही रहेगी, जबकि ग्रेड 3, 4 के अधिकारियों की ट्रांसफर व पोस्टिंग सीएम ऑफिस करेगा. जस्टिस सीकरी ने फैसला सुनाते हुए साफ-साफ कहा कि अगर कोई मतभेद होता है तो मामला राष्ट्रपति को भेजा जाएगा. बता दें कि आज दिल्ली सरकार बनाम उपराज्यपाल के अधिकारों की लड़ाई पर फैसला दो जजों की बेंच सुना रही थी जिसमें दूसरे न्यायाधीश अशोक भूषण थे. उन्होंने कहा सर्विसेज केंद्र के पास ही रहेगा क्योंकि सर्विसेज यानी अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग पर वह सहमत नहीं हैं.

कुछ फैसलों पर दोनों जज नहीं हो सके सहमत

कुछ मामलों को छोड़कर दोनों जज कई मामलों में सहमत नजर आए. इसलिए यह फैसला थोड़ा बिखरा-बिखरा नजर आया. फैसले के अंतर्गत स्पेशल पब्लिक प्रॉसीक्यूटर की नियुक्ति का अधिकार दिल्ली सरकार के पास रहेगा. वहीं, ऐंटी-करप्शन ब्रांच का अधिकार केंद्र को दिया गया है क्योंकि दिल्ली पुलिस केंद्र के अधीन है.

दिल्ली सरकार अपने अधिकारों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था जिसमें वह पूर्ण राज्य का दर्जा चाहती थी लेकिन देश की राजधानी को पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं दिया जा सकता है. इसी मामले में रेवेन्यू पर दिल्ली सरकार को कोई बी फैसला लेते समय उपराज्यपाल की सहमति लेनी होगी जबकि बिजली मामले में निदेशक की नियुक्ति सीएम के पास होगी. वहीं बिजली विभाग से जुड़े हर ट्रांसफर, पोस्टिंग और बिजली के दर दिल्ली सरकार ही तय करेगी.

अफसरों के ट्रांसफर-पोस्टिंग को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि ग्रेड-1 और ग्रेड-2 के अधिकारियों की ट्रांसफर और पोस्टिंग केंद्र सरकार करेगी जबकि ग्रेड-3 और ग्रेड-4 के अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग का मामला दिल्ली सरकार कर सकती है.

फेसले पर क्या कहा आप नेता ने

आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने कहा कि यह फैसला अरविंद केजरीवाल के लिए दुर्भाग्यपूर्ण नहीं बल्कि पूरी दिल्ली के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है. जिस सरकार के पास यह अधिकार न हो कि वह किसी अधिकारी का ट्रांसफर तक कर सके तो वह सरकार और कानून किस काम का है. आपके अधिकारियों पर आपका अधिकार न हो फिर यह कानून कैसा है. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लगभग सिरे से खारिज करते हुए असहमती जताई है.

वहीं आप पार्टी से राज्यसभा सांसद और नेता संजय सिंह ने ट्वीट कर कहा है कि क्या सुप्रीम कोर्ट ने अपनी सारी गरिमा समाप्त कर दी है? “न्याय में विलम्ब न्याय नही है” जज को जनता भगवान मानती है लेकिन भगवान भी इंसाफ़ करने में विफल है. संजय ने ट्वीट किया कि, ‘क्या मोदी जी की मर्ज़ी के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट निर्णय नही देता? राफ़ेल में खुला भ्रष्टाचार हुआ केन्द्र सरकार ने सुप्रीम में झूठ बोला पर सुप्रीम ख़ामोश ? सीबीआई पर सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय दिया या मज़ाक़ किया? दिल्ली की करोड़ों जनता की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया सुप्रीम कोर्ट है या नायब तहसीलदार कोर्ट?’

तीन जजों की बेंच को भेजा गया केस

कुछ फैसलों में जजों के बीच मतभेदों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली बनाम एलजी केस को तीन जजों वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच को भेज दिया है. इस मामले में दिल्ली के अधिकार को लेकर चली आ रही जंग अब भी बरकरार है. इस फैसले के बाद ये संशय बना हुआ है कि दिल्ली का बॉस कौन है.

बता दें कि पिछले साल जुलाई में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने दिल्ली का बॉस कौन विवाद को देखते हुए कानून व्यवस्था, पुलिस और जमीन को छोड़कर उपराज्यपाल स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर सकते का फैसला दिया था. फैसले में यह भी कहा गया था कि उपराज्यपाल को दिल्ली की सलाह पर काम करना होगा. वहीं विवाद बढ़ने पर मामला राष्ट्रपति को भेजने की बात भी कही गई थी.


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