नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने अनिल अंबानी से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं और फंड हेराफेरी मामले की सुनवाई के दौरान जांच एजेंसियों के रवैये पर नाराजगी जताई. कोर्ट ने कहा कि जांच एजेंसियों के कामकाज में ‘हिचकिचाहट’ नजर आ रही है, इसलिए जांच पारदर्शी, निष्पक्ष और तय समय सीमा में पूरी होनी चाहिए.
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि गंभीर आरोपों के बावजूद जांच की गति और तरीका चिंता का विषय है. कोर्ट ने कहा कि जांच ऐसी होनी चाहिए जिससे न केवल अदालत बल्कि सभी हितधारकों का भरोसा कायम हो.
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है, जिसमें विभिन्न एजेंसियों के अधिकारी और फोरेंसिक ऑडिटर शामिल हैं. वहीं, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने भी लेन-देन की जांच के लिए ऑडिटरों की नियुक्ति की है और जांच के दौरान कुछ गिरफ्तारियां भी की गई हैं.
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) की रिपोर्ट में धोखाधड़ी और फंड हेराफेरी के आरोप सामने आने के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं हुई है.
इस पर सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि अब तक चार लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जांच एजेंसियों को सच्चाई सामने लाने के लिए मिलकर काम करना चाहिए और जांच निष्पक्ष तथा स्वतंत्र तरीके से पूरी की जानी चाहिए. कोर्ट ने सभी वित्तीय संस्थानों को भी ED को जांच में पूरा सहयोग देने का निर्देश दिया है. मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी.
