नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को संकेत दिया कि वह अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) को निर्देश देगा कि वह एक समिति बनाए, जो याचिकाकर्ता द्वारा दिए गए सुझावों की जांच करे, जो मरीज को ब्रेन डेड घोषित करने की प्रक्रिया से जुड़े हैं.
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच केरल हाई कोर्ट के जून 2017 के एक आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी.
याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर यह आरोप लगाया था कि मरीज को ब्रेन डेड घोषित करने में गड़बड़ी होती है.
मंगलवार की सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ता, जो खुद पेश हुए थे, ने मरीज को ब्रेन डेड घोषित करने की प्रक्रिया का जिक्र किया.
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से कहा, “यह साबित करने के लिए पक्के सबूत होने चाहिए कि मरीज ब्रेन डेड है.”
उन्होंने कहा कि ब्रेन डेथ वह स्थिति है जब दिमाग तक खून की सप्लाई नहीं होती. उन्होंने सुझाव दिया कि एंजियोग्राफी और दिमाग का EEG टेस्ट किया जाना चाहिए.
इलेक्ट्रोएन्सेफेलोग्राम (EEG) टेस्ट दिमाग की इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी को मापता है.
बेंच ने याचिकाकर्ता से कहा कि वह अपने सुझाव लिखित में दे.
बेंच ने कहा, “हम AIIMS के न्यूरोलॉजी विभाग के प्रमुख से अनुरोध करेंगे कि वह एक समिति बनाए और आपके दिए गए सुझावों पर हमें रिपोर्ट या टिप्पणी दे.”
अदालत ने यह भी कहा कि इस मामले की अगली सुनवाई जुलाई में होगी.
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