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Friday, 2 January, 2026
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नलों से बदबू, शिकायतें: इंदौर के लोगों ने की गंदे पानी की शिकायत, लेकिन किसी ने नहीं की कार्रवाई

दिप्रिंट द्वारा देखे गए मेयर हेल्पलाइन के आधिकारिक रिकॉर्ड दिखाते हैं कि भागीरथपुरा में स्वास्थ्य संकट फैलने से काफी पहले ही पानी सप्लाई से जुड़ी शिकायतें दर्ज की जा चुकी थीं.

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इंदौर: क्या देश के सबसे साफ शहर इंदौर में स्थानीय प्रशासन, पार्षद से लेकर नगर निगम और कलेक्टर तक, ने पानी में गंदगी की बार-बार की गई शिकायतों को नज़रअंदाज किया? पहली नज़र में स्थानीय लोगों की बातें इसी ओर इशारा करती हैं.

इंदौर के भागीरथपुरा इलाके के रहने वाले जितेंद्र प्रजापति का मामला देखिए. यह इलाका अब पानी से फैलने वाली गंभीर बीमारी का केंद्र बन गया है क्योंकि पीने के पानी की मुख्य पाइपलाइन में सीवर का पानी मिल गया.

पिछले एक महीने से प्रजापति के घर और आसपास के कई घरों में नलों से बदबूदार पानी आ रहा था. यह स्थिति 10–15 दिनों तक लगातार बनी रही. भागीरथपुरा एक कम आय वाला इलाका है, जो पुराने मिल एरिया के बीचों-बीच है और कई औद्योगिक इकाइयों के पास स्थित है.

प्रजापति ने दिप्रिंट से कहा, “शुरुआत में अधिकारियों ने और स्थानीय नेताओं ने भी शिकायतों को नज़रअंदाज़ किया. अब जब सैकड़ों लोग अस्पताल में भर्ती हो रहे हैं, तब जाकर प्रशासन नींद से जागा है.”

दिप्रिंट द्वारा देखे गए मेयर हेल्पलाइन के आधिकारिक रिकॉर्ड बताते हैं कि भागीरथपुरा में स्वास्थ्य संकट शुरू होने से काफी पहले ही पानी सप्लाई से जुड़ी शिकायतें दर्ज की गई थीं.

रिकॉर्ड के मुताबिक, पिछले 25 दिनों में नर्मदा जल सप्लाई से जुड़ी 1,219 शिकायतें दर्ज हुईं. इन रिकॉर्ड्स में भागीरथपुरा उन इलाकों में प्रमुख रूप से शामिल है, जहां से पानी से जुड़ी शिकायतें आईं.

इंदौर के भागीरथपुरा में स्थानीय निवासी | फोटो: नूतन शर्मा/दिप्रिंट
इंदौर के भागीरथपुरा में स्थानीय निवासी | फोटो: नूतन शर्मा/दिप्रिंट

चर्चा यह भी है कि स्थानीय नेताओं की शिकायतें भी अनसुनी कर दी गईं. लोग अब भी दस्त, उल्टी और बुखार जैसे लक्षणों के साथ अस्पतालों में भर्ती हो रहे हैं.

इंदौर जिला कलेक्टर शिवम वर्मा ने मीडिया से कहा, “हमने इस बात पर ध्यान दिया है कि लोगों की शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया गया. हमने संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की है. एक इंजीनियर को नौकरी से हटा दिया गया है और दो अन्य को निलंबित किया गया है.”

स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, लैब जांच में पुष्टि हुई है कि पानी के सैंपल्स में बैक्टीरिया की मिलावट पाई गई. यह मुख्य पीने के पानी की पाइपलाइन में लीकेज के कारण हुआ, जहां ऊपर बने शौचालय के पास सीवर का पानी नर्मदा सप्लाई लाइन में मिल गया.

भागीरथपुरा के पार्षद कमल बघेल ने कहा कि उनकी ओर से की गई शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई. उन्होंने दिप्रिंट से कहा, “हम महीनों से शिकायत कर रहे थे, लेकिन अधिकारियों ने एक भी जांच नहीं की. न तो पानी की जांच हुई और न ही सप्लाई रोकी गई.”

प्रभावित इलाके में दवाइयां बांटी जा रही हैं | फोटो: नूतन शर्मा/दिप्रिंट
प्रभावित इलाके में दवाइयां बांटी जा रही हैं | फोटो: नूतन शर्मा/दिप्रिंट

इलाके में कई अस्थायी सहायता केंद्र बनाए गए हैं, जहां प्रभावित परिवारों को दवाइयां और ओआरएस के पैकेट दिए जा रहे हैं. गंदगी के स्रोत का पता लगाने के लिए कई जगहों पर पानी की पाइपलाइन खोदी गई है.

शुक्रवार को इंदौर हाईकोर्ट ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग वाली जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई की. यह याचिका इंदौर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रितेश इनानी ने दायर की है. अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख 6 जनवरी तय की है.

मध्य प्रदेश सरकार ने अपनी स्टेटस रिपोर्ट में पानी की गंदगी से चार मौतों की बात स्वीकार की है, जबकि याचिकाकर्ताओं का दावा है कि मौतों की संख्या 8 से 15 के बीच हो सकती है.

जैसे-जैसे हालात सामने आ रहे हैं, राजनेता स्थानीय प्रशासन पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं.

कैबिनेट मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायक कैलाश विजयवर्गीय ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर प्रशासनिक और तकनीकी खामियों की ओर इशारा किया, जिनकी वजह से यह बीमारी फैली. उन्होंने दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए तुरंत सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की.

हालांकि, प्रशासन यह साफ नहीं कर रहा है कि शिकायतों और बुनियादी ढांचे के कामों की निगरानी करने वाले सुपरवाइजर या वरिष्ठ अधिकारियों पर कार्रवाई होगी या नहीं. स्थानीय लोगों का कहना है कि कार्रवाई केवल जान जाने के बाद की जा रही है और वह भी सिर्फ मैदानी स्तर के इंजीनियरों तक सीमित है.

शिकायतें दर्ज हुईं, लेकिन आगे नहीं बढ़ाईं

शिकायतों की बड़ी संख्या ने इंदौर नगर निगम की शिकायत निवारण और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. अधिकारियों ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की कि एक ही जोन से बार-बार आई शिकायतों पर समय रहते रोकथाम के कदम क्यों नहीं उठाए गए.

आम बात यही सामने आ रही है कि हेल्पलाइन और जोन स्तर पर शिकायतें तो दर्ज हुईं, लेकिन उन्हें तुरंत पीने के पानी में सीवर मिल जाने जैसे गंभीर मामले के रूप में नहीं पहचाना गया.

शहर में पानी की गंदगी से हुई मौतों के बाद अब इंदौर नगर निगम असहज सवालों का सामना कर रहा है | फोटो: नूतन शर्मा/दिप्रिंट
शहर में पानी की गंदगी से हुई मौतों के बाद अब इंदौर नगर निगम असहज सवालों का सामना कर रहा है | फोटो: नूतन शर्मा/दिप्रिंट

नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि शुरुआत में इन शिकायतों को सामान्य “पानी की गुणवत्ता” से जुड़ी समस्याएं माना गया और शुरुआती दिनों में पाइपलाइन लीकेज या नाली के कनेक्शन को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं थी.

इंदौर जिले के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दिप्रिंट से कहा, “शिकायतें मिली थीं, लेकिन उनकी गंभीरता को समझने और समय पर ऊपर तक पहुंचाने में कई स्तरों पर चूक हुई. हम पूरी शिकायत निपटान और निगरानी व्यवस्था की समीक्षा कर रहे हैं ताकि इन कमियों को दूर किया जा सके और जिम्मेदारी तय की जा सके.”

कुल मिलाकर 27 सरकारी और निजी अस्पतालों को जोड़ा गया है और दूषित पानी से बीमार हुए लोगों को इलाज के लिए वहां भर्ती किया जा रहा है.

इंदौर कलेक्टर ने दिप्रिंट से कहा, “सभी अस्पतालों में कुल 201 मरीज भर्ती हैं. अब संख्या कम हो रही है. हमारी सर्वे टीम मौके पर काम कर रही है और शुरुआती स्तर पर ही मरीजों का इलाज कर रही है. पूरा इलाज मुफ्त होगा और अगर किसी ने इलाज पर पैसा खर्च किया है तो उसकी भरपाई की जाएगी.”

इंदौर के भागीरथपुरा में उस जगह पर मिट्टी के ढेर, जहां खुदाई की गई | फोटो: नूतन शर्मा/दिप्रिंट
इंदौर के भागीरथपुरा में उस जगह पर मिट्टी के ढेर, जहां खुदाई की गई | फोटो: नूतन शर्मा/दिप्रिंट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार और इंदौर नगर निगम को इलाके में साफ पीने का पानी उपलब्ध कराने और प्रभावित लोगों को चिकित्सा उपचार देने के निर्देश दिए हैं. वहीं राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है.

पिछले तीन दिनों से स्थानीय प्रशासन युद्ध स्तर पर काम कर रहा है ताकि रिसाव के स्थानों का पता लगाया जा सके और गंदगी की समस्या को दूर किया जा सके. प्रभावित इलाकों में अब टैंकरों से पीने का पानी सप्लाई किया जा रहा है.

इंदौर के प्रभावित इलाके में खड़ा एक पानी का टैंकर | फोटो: नूतन शर्मा/दिप्रिंट
इंदौर के प्रभावित इलाके में खड़ा एक पानी का टैंकर | फोटो: नूतन शर्मा/दिप्रिंट

वर्मा ने कहा, “लोगों को पानी उबालकर पीने की घोषणा की गई है. टीमें घर-घर जाकर लोगों को क्या करें और क्या न करें की जानकारी दे रही हैं और साथ ही उनकी सेहत पर भी नज़र रखी जा रही है.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


यह भी पढ़ें: इंदौर में दूषित पानी के मामले पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगी रिपोर्ट


 

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