चेन्नई, चार अप्रैल (भाषा) तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर अनुरोध किया कि राज्य के कावेरी डेल्टा क्षेत्र में केंद्र द्वारा नीलामी के लिए प्रस्तावित तीन कोयला/लिग्नाइट खनन ब्लॉक को प्रक्रिया से हटा देना चाहिए।
स्टालिन ने पत्र लिखकर कहा कि इस मामले में तमिलनाडु सरकार से सलाह तक नहीं ली गयी और केंद्रीय कोयला मंत्रालय ने एकपक्षीय तरीके से काम किया है।
उन्होंने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया कि भविष्य में राज्य सरकार से परामर्श लिया जाए।
स्टालिन के पत्र से पहले ‘कॉर्डिनेशन कमेटी ऑफ तमिलनाडु ऑल फार्मर्स एसोसिएशन्स’ ने घोषणा की थी कि प्रस्तावित खानें पर्यावरण के लिए आपदा की स्थिति पैदा कर देंगी, इसलिए संगठन इसका विरोध करेगा।
किसान नेता पी.आर. पांडियान ने कहा, ‘‘अगर नीलामी की अनुमति दी गयी तो खनन परियोजना से जमीन अनुपजाऊ हो जाएगी, भूजल खत्म हो जाएगा और लोगों का विस्थापन होगा।’’
माकपा और पीएमके समेत अन्य दलों ने तमिलनाडु में प्रस्तावित नीलामी का कड़ा विरोध किया है। वामपंथी संगठन टीएन विवासईगल संगम ने चेतावनी दी है कि वह विरोध प्रदर्शन करता रहेगा।
राज्य सरकार के मंत्रियों एमआरके पन्नीरसेल्वम और उदयनिधि स्टालिन ने आश्वासन दिया कि इस तरह की खनन परियोजनाओं की अनुमति नहीं दी जाएगी।
उदयनिधि ने कहा कि मुख्यमंत्री स्टालिन इस संबंध में बुधवार को विधानसभा में घोषणा करेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि देशभर में 101 ब्लॉक नीलामी के लिए चिह्नित किये गये हैं जिनमें तीन तमिलनाडु में हैं। ये तीन ब्लॉक तमिलनाडु के कावेरी डेल्टा क्षेत्र में आते हैं जिसे राज्य का ‘धान का कटोरा’ कहा जाता है।
भाषा वैभव प्रशांत
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