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Thursday, 18 July, 2024
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श्रीनगर पुलिस बस हमलाः हथियार लूटने के लिए ड्राइवर को मारी गोली, खून बहता रहा पर वह बस चलाता रहा

पुलिस बस पर ये हमला पुलवामा हमले की तर्ज़ पर हुआ, जिसमें फरवरी 2019 में 40 CRPF कर्मी मारे गए थे.

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नई दिल्ली: जैश-ए-मोहम्मद की शाखा के तीन संदिग्ध उग्रवादी, जिन्होंने सोमवार को श्रीनगर के ज़ेवान इलाक़े में एक पुलिस बस पर हमला किया था, जिसमें दो पुलिस कर्मी मारे गए और 12 अन्य घायल हुए, दरअसल पुलिस कर्मियों को मार कर हथियार लूटना चाहते थे, ये ख़ुलासा पुलिस सूत्रों ने दिप्रिंट से किया है.

सूत्रों ने बताया कि वो लोग एके-47 रायफलों से लैस थे, और हमले से पहले उन्होंने एक बार टोह ली थी, जिससे कि जम्मू-कश्मीर पुलिस टीम के आने जाने के समय और गतिविधियों का पता लगाया जा सके, जिसमें 24 से अधिक पुलिसकर्मी थे.

एक सूत्र ने कहा, ‘प्राप्त हुई सूचना, ख़ुफिया इनपुट्स और हमारे इंटरसेप्ट्स के अनुसार, इन लोगों की योजना थी कि टायरों पर गोलियां चलाकर, बस को रोका जाएगा और ड्राइवर को भी मार दिया जाएगा. उसके बाद उनकी योजना पुलिस पार्टी पर हमला करके उनके हथियार छीनने की थी, ठीक वैसे ही जैसे उन्होंने 10 दिसंबर को बांदीपुरा में किया था, जिसमें दो पुलिसकर्मी मारे गए थे’.

सूत्र ने आगे कहा, ‘कश्मीर में आतंकी संगठनों को हथियारों की सप्लाई प्रभावित हुई है. यही कारण है कि ये उग्रवादी पुलिसकर्मियों को निशाना बना रहे हैं और उनके हथियार हथियार छीन रहे हैं’.

पुलवामा बमबारी के बाद से जिसमें फरवरी 2019 में 40 केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) कर्मी मारे गए थे, ताज़ा वारदात घाटी में सुरक्षा बलों पर पहला बड़ा हमला था. सूत्रों ने कहा कि इसकी योजना पुलवामा हमले की तर्ज़ पर ही बनाई गई थी.

जवाबी फायरिंग में उग्रवादियों को भी गोलियां लगीं, लेकिन वो मौक़े से भागने में कामयाब हो गए.


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ड्राइवर को गोली लगी, लेकिन वो बस को चलाता रहा

तीन उग्रवादियों ने- जिनमें से दो के पाकिस्तानी होने का शक है- सोमवार शाम 6 बजे घात लगाकर हमला किया, जहां वो पुलिस बस के आने का इंतज़ार कर रहे थे.

ऊपर हवाला दिए गए सूत्रों के अनुसार, उग्रवादियों ने पहली गोली बस के दाहिनी ओर का टायर फ्लैट करने के लिए चलाई, और फिर ड्राइवर को निशाना बनाया, जिसकी पहचान कॉन्सटेबल नरिंदर के तौर पर हुई.

हालांकि गोली लगने के बाद सिपाही को ख़ून बहना शुरू हो गया, लेकिन वो बस को ड्राइव करता हुआ ज़ेवान कैम्प तक ले आया, जिसके परिसर में जेएंडके पुलिस की सशस्त्र विंग, सीआरपीएफ सेक्टर मुख्यालय, और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस स्टेशन मुख्यालय स्थित हैं.

सूत्र ने बताया, ‘ड्राइवर को जैसे ही गोली लगी, वो समझ गया कि ये कोई आतंकी हमला है, और वो बस को चलाता रहा ताकि उसे किसी तरह, कैंप के सुरक्षित परिसर में ले आए. तीन लोग अंधाधुंध गोलियां बरसा रहे थे, और वो चाहते थे कि सभी टायर फट जाएं, लेकिन ड्राइवर किसी तरह बस को चलाता हुआ, उसे कैम्प के अंदर तक लाने में सफल हो गया’.

सिपाही नरिंदर बुरी तरह घायल हुआ था, और फिलहाल उसका इलाज चल रहा है.

सूत्र ने कहा, ‘जब बस कैंपस के अंदर पहुंची, तो वो लोग भाग गए. एक कार उनका इंतज़ार कर रही थी. चूंकि पहले ही अंधेरा और कोहरा छा चुका था, इसलिए वो मौक़े से भाग निकलने में कामयाब हो गए’.

सहायक सब-इंस्पेक्टर ग़ुलाम हुसैन, और एक सिपाही शफीक़ अली वो पुलिस कर्मी थे जो हमले में मारे गए.

ज़मीन पर ख़ून व मांस मिला

सूत्र के अनुसार, पुलिस अभी तक तीन उग्रवादियों की पहचान नहीं कर पाई है, लेकिन उसे शक है कि वो कश्मीर टाइगर्स से थे, जो जैश-ए-मोहम्मद की एक शाखा है.

सूत्र ने कहा, ‘ये जैश का एक ख़ास अंदाज़ है, कि वो किसी पुलिस दल की गाड़ी पर हमला करते हैं. हमें संदेह है कि ये हमला इलाक़े में लश्कर की मौजूदगी पर भारी पड़ने के लिए किया गया, और इसलिए भी कि उन्हें हथियारों की ज़रूरत है. हमें ये भी शक है कि तीन में से एक व्यक्ति पाकिस्तानी था और दो स्थानीय थे, या फिर दो पाकिस्तानी और एक स्थानीय था. हम अभी तक उनकी शिनाख़्त नहीं कर पाए हैं’.

सूत्र ने बताया कि हमले की जगह से कुछ ख़ून, और उग्रवादियों के मांस के कुछ टुकड़े बरामद हुए हैं.

सूत्र ने कहा, ‘चूंकि बस के अंदर मौजूद पुलिसकर्मियों ने जवाब में गोलियां चलाईं, इसलिए उग्रवादी भी घायल हुए और हमें मौक़े से उनका ख़ून और कुछ मांस बरामद हुआ है, जिससे उनकी पहचान पता करने में हमें कुछ मदद मिल सकती है. हम निश्चित नहीं हैं कि वो सूचीबद्ध आतंकवादी थे या फिर हाइब्रिड उग्रवादी थे, लेकिन चूंकि वो एके-47 रायफलों से लैस थे, इसलिए ये किसी प्रशिक्षित पाकिस्तानी ऑपरेटिव का काम था.’

(इस खबर को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)


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