(अंजलि ओझा)
मदुरै, पांच अप्रैल (भाषा) मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के अगले महासचिव का चुनाव करने की तैयारियां पूरी हो गई हैं और अब इस बात को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं कि देश की सबसे बड़ी वामपंथी पार्टी की कमान कौन संभालेगा। इस दौड़ में एम ए बेबी और अशोक धावले को सबसे आगे बताया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, 2012 से पोलित ब्यूरो के सदस्य बेबी इस पद के लिए प्रबल दावेदार हैं। उन्हें पार्टी की केरल इकाई का समर्थन प्राप्त है।
उन्होंने बताया कि पार्टी का एक वर्ग अखिल भारतीय किसान सभा (एआईकेएस) के अध्यक्ष अशोक धावले को यह जिम्मेदारी देने के पक्ष में है, क्योंकि कृषि मुद्दे अभी भी चर्चा में हैं और माकपा ग्रामीण क्षेत्रों में अपना आधार बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
सूत्रों ने बताया कि माकपा सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का मुकाबला करने के लिए वामपंथी एकता और धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक ताकतों के लिए एक मंच बनाने पर जोर दे रही है, इसलिए धावले के समर्थकों का मानना है कि वह इस भूमिका के लिए बेहतर होंगे।
उन्होंने बताया कि धावले को पश्चिम बंगाल खेमे का भी समर्थन प्राप्त है और कई लोगों का मानना है कि वह हिंदी पट्टी में पार्टी के लिए मददगार साबित होंगे।
पोलित ब्यूरो के एक अन्य वरिष्ठ सदस्य मोहम्मद सलीम को भी इस पद के दावेदारों में गिना जा रहा है। हालांकि, सूत्रों ने बताया कि सलीम ने पार्टी की पश्चिम बंगाल इकाई के सचिव पद पर बने रहने की इच्छा जताई है।
तेलंगाना के नेता और माकपा पोलित ब्यूरो के वरिष्ठतम सदस्य बी वी राघवुलु का नाम भी चर्चा में है, जबकि पार्टी के एक अन्य वर्ग का मानना है कि तेजतर्रार नेता वृंदा करात के नाम पर इस पद के लिए विचार किया जाना चाहिए।
माकपा ने केंद्रीय समिति के सदस्यों के लिए 75 वर्ष की आयु सीमा तय की है, लेकिन कुछ मामलों में इसमें छूट दी जा सकती है।
पूर्व में भी माकपा के महासचिव के चुनाव में केरल और पश्चिम बंगाल खेमों ने अलग-अलग उम्मीदवारों का समर्थन किया है और दिलचस्प मुकाबला देखने को मिला है।
निवर्तमान केंद्रीय समिति रविवार को यहां 24वें पार्टी सम्मेलन में नए सदस्यों के चुनाव के लिए नामों की सिफारिश करेगी।
प्रतिनिधि किसी भी प्रस्तावित नाम के संबंध में आपत्ति उठा सकते हैं। वे संबंधित सदस्यों की पूर्व स्वीकृति से नए नामों की सिफारिश भी कर सकते हैं।
केंद्रीय समिति अपने सदस्यों में से महासचिव सहित पोलित ब्यूरो का भी चुनाव करेगी। पोलित ब्यूरो के सदस्यों की संख्या केंद्रीय समिति द्वारा तय की जाती है।
पिछले साल सीताराम येचुरी के निधन के बाद माकपा महासचिव का पद खाली है। येचुरी के निधन के बाद प्रकाश करात ने पार्टी के अंतरिम समन्वयक का पद संभाला।
भाषा धीरज शफीक
शफीक
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