नयी दिल्ली, छह फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने तेलंगाना विधानसभा अध्यक्ष को अंतिम मौका देते हुए शुक्रवार को कहा कि यदि वह (अध्यक्ष) कांग्रेस में शामिल हुए भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के 10 विधायकों की दलबदल संबंधी शेष अयोग्यता याचिकाओं पर तीन सप्ताह के भीतर निर्णय लेने में विफल रहते हैं तो उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू की जाएगी।
न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति ए. जी. मसीह की पीठ ने विधायकों द्वारा दायर अवमानना याचिका की सुनवाई करते हुए यह बात कही।
न्यायमूर्ति करोल ने अध्यक्ष की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी से कहा, ‘‘हम आपसे अनुरोध करते हैं कि इसका तमाशा न बनाएं। यही हो रहा है। ऐसा न करें।’’
उन्होंने टिप्पणी की कि इस तरह की चीज़ें अब एक नया ‘उद्योग’ बनती जा रही हैं, जो उचित नहीं है।
सिंघवी ने कहा कि एक मामले में फैसला लिया जा चुका है, जबकि अध्यक्ष दो अन्य मामलों में फैसला लेने वाले हैं।
वरिष्ठ अधिवक्ता ने देरी का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य में नगर निगम चुनाव हैं। उन्होंने सभी लंबित अयोग्यता याचिकाओं पर निर्णय के लिए तीन सप्ताह का समय मांगा।
भारत राष्ट्र समिति के विधायकों की ओर से पेश वकील ने कहा कि अध्यक्ष ने पहले भी समय मांगा था और इस संबंध में अब तक केवल एक ही बैठक हुई है।
न्यायमूर्ति कैरोल ने कहा कि पिछली सुनवाई के दौरान अध्यक्ष ने तीन सप्ताह का समय मांगा था, लेकिन शीर्ष अदालत ने उन्हें दो सप्ताह का समय दिया था, ताकि स्थिति में हुए बदलाव का आकलन किया जा सके।
पीठ ने कहा, ‘हम अध्यक्ष से सकारात्मक निर्णय की अपेक्षा करते हैं, अन्यथा हम अवमानना की कार्यवाही करेंगे।’
भाषा सुरेश पवनेश
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